लेखक परिचय

अतुल तारे

अतुल तारे

सहज-सरल स्वभाव व्यक्तित्व रखने वाले अतुल तारे 24 वर्षो से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। आपके राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और समसामायिक विषयों पर अभी भी 1000 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से अनुप्रमाणित श्री तारे की पत्रकारिता का प्रारंभ दैनिक स्वदेश, ग्वालियर से सन् 1988 में हुई। वर्तमान मे आप स्वदेश ग्वालियर समूह के समूह संपादक हैं। आपके द्वारा लिखित पुस्तक "विमर्श" प्रकाशित हो चुकी है। हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी व मराठी भाषा पर समान अधिकार, जर्नालिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, महाराजा मानसिंह तोमर संगीत महाविद्यालय के पूर्व कार्यकारी परिषद् सदस्य रहे श्री तारे को गत वर्ष मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेशस्तरीय पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया है। इसी तरह श्री तारे के पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान को देखते हुए उत्तरप्रदेश के राज्यपाल ने भी सम्मानित किया है।

असाधारण जनादेश के नैतिक दायित्व

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प्रश्न उठता है कि ऐसा क्या है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में। उत्तर है देश को लंबे समय बाद ऐसा नेतृत्व मिला है जिसकी प्रामाणिकता, परिश्रम एवं निष्ठा पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं है। उत्तर है कि प्रधानमंत्री मोदी उस पार्टी के कार्यकर्ता हैं जिसका अधिष्ठान राष्ट सर्वोपरि है। उत्तर है, भाजपा के पीछे उन हजारों, लाखों, करोड़ों कार्यकर्ताओं एवं जन सामान्य का विश्वास है जो भाजपा के सदस्य नहीं हैं पर यह मानते हैं कि देश के लिए आज भाजपा आवश्यक है। उत्तर है, कि आज भाजपा को उनका भी समर्थन प्राप्त है जो परंपरागत रूप से भाजपा के साथ नहीं रहे हैं।

यह कैसा ‘राष्ट्रधर्म’ है?

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माचार पत्र एवं दृश्य मीडिया इसमें एक कारगर हथियार है। विगत इतिहास में सरकारी पैसों से वामपंथियों ने इसकी दम पर जहर घोला है घोल रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में मूल्य आधारित पत्रकारिता राष्ट्रीय विचारों की पत्रकारिता के टिमटिमाते ही सही दीए कौन कौन से हैं यह सरकार को सरकारी चश्मा हटाकर देखना होगा, समझना होगा। ध्ांधे के लिए पत्रकारिता एवं विचार के लिए पत्रकारिता इसमें सरकार को भेद करना होगा।



यह एक क्रांति की शुरूआत है।

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:संदेह महाविजय के महानायक देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। बेशक जीत का सेहरा, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सिर पर बंधना चाहिए। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि लगभग निष्प्राण हो चुके प्रदेश भाजपा संगठन में पार्टी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य एवं उनकी पूरी टीम और एक-एक कार्यकर्ता ने परिश्रम की पराकाष्ठा की। परिणाम सामने हैं।

लाल आतंक का क्रूर चेहरा

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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की इस बात से सौ फीसदी सहमत हुआ जा सकता है कि उनके खिलाफ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुए विरोध प्रदर्शन के पीछे ‘संघ संस्कृति’ है। नि:संदेह यह संघ अर्थात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ही संस्कृति है, जो विचारों में घोर असहमति के बावजूद सामने वाले पक्ष को अपना मानती है।

विस्मृत होती एक तिथि

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8 दिसम्बर 2016 चुपचाप बीत गई। मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख का इतने हौले से गुजर जाना पीड़ादायक है। जोर दें अपनी स्मृति को। याद आएगा 8 दिसम्बर 2003।  कांगे्रस के 10 साल के कुशासन से आज ही के दिन मध्यप्रदेश को मुक्ति मिली थी। लाखों लाखों कार्यकर्ताओं के समर्पण से, परिश्रम… Read more »

सबक सिखाते उपचुनाव के नतीजे

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देश की आठ विधानसभा एवं चार लोकसभा सीटों पर हुए उप चुनाव से संदेश स्पष्ट है। यद्यपि भारत जैसे एक विशाल लोकतांत्रिक देश में यह छोटे से उपचुनाव देश की अभिव्यक्ति नहीं है, पर जनादेश के संकेत समझे जा सकते हैं। पहला केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार के प्रति देश का भरोसा कायम है। दूसरा बंगाल हो या तमिलनाडु देश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की अपने-अपने क्षेत्रों में जडं़े गहरी हंै।

कौन कहता है देश कतार में है ?

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– अतुल तारे कौन कहता है देश कतार में है? प्रसव हो या सृजन, निर्माण के क्षणों में एक पीड़ा होती ही है। यह घड़ी मंथन की है। अमृत छलकने में अभी समय है। यह घड़ी विष पान की हो सकती है और विष को पीने के लिए विशेष योग्यता की आवश्यकता होती है। अभिनंदन… Read more »

शहीदों को सलामी कब तक ?

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जम्मू कश्मीर के उरी क्षेत्र में आतंकी हमला सिर्फ एक आतंकवादी हमला नहीं है, यह सीधे-सीधे पाकिस्तान का हमला है। हमले में 17 सैनिक फिर शहीद हो गए है। हाल ही के हमलों को गिनें तो पहले गुरुदासपुर फिर पठानकोट और अब उरी में सैनिकों का बलिदान देखकर देशवासी स्तब्ध हैं, दुखी हंै और वे… Read more »

राजभवन-एक काला अध्याय समाप्त

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राजभवन। महामहिम राज्यपाल। यह शब्द स्वयं अपने आप में एक आदर सम्मान एवं वैशिष्ट्य लिए हुए होते हैं। किसी भी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होना एक गौरव की अनुभूति जो पद पर आसीन है, उसे तो होती ही है, उस प्रदेश की जनता को भी होती है। यही कारण है कि जब कभी सत्ता निरंकुश… Read more »

एक नए इतिहास का सृजन करते मोदी

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अतुल तारे हम सबने स्वामी विवेकानंद को नहीं देखा है। जाहिर है उनका विश्व विख्यात व्याख्यान भी नहीं सुना है। श्री नरेन्द्र मोदी, श्री नरेन्द्र मोदी है। स्वामी विवेकानंद नहीं है। पर यह मानना होगा कि श्री मोदी के आदर्श वाकई स्वामी विवेकानंद है और वे उनके आदर्श अनुयाई होने का हक रखते हैं। अमेरिकी… Read more »