लेखक परिचय

गंगानन्द झा

गंगानन्द झा

डी.ए.वी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वनस्पति शास्त्र के प्राध्यापक के पद से सेवानिवृत होने के पश्चात् चण्डीगढ़ में गत पन्‍द्रह सालों से रह रहे गंगानंद जी को लिखने पढ़ने का शौक है।

दिलचस्प दिन

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साठ के दशक के मध्य में अमेरिका में युवा आन्दोलन की एक धारा के रुप में हिप्पी उपसंस्कृति का जन्म हुआ और दुनिया भर के अनेको देशों में फैल गया। हिप्पियों के फैशन और मूल्य-बोध ने संगीत, फिल्म, साहित्य और शिल्प पर गहरा असर डाला। इस हिप्पी संस्कृति के अनेको पहलुओं का दुनिया भर के देशों की आज की संस्कृति की मुख्य धारा में समावेश हो गया है। साठ के दशक में दुनिया के विभिन्न देशों में प्रतिवाद और प्रतिरोध के स्वर गूँजते रहे थे। अमेरिका, यूरोप और एशिया के विश्वविद्यालयों के कैम्पस में छात्र अशान्त और उत्तेजित रहा करते थे।

धर्म का सत्य —- विज्ञान का सत्य

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 सबसे सुन्दर और गम्भीर अनुभूतियाँ, जिनका हम अनुभव कर सकते हैं, अध्यात्म की सिहरन है। यह विज्ञान की शक्ति है। — एलबर्ट आइंस्टिन भगवान और भूत तमाम मानव सभ्यताओं में प्रारम्भ से मौजूद रहे हैं। इनके जरिए आदमी अपनी प्रासंगिकता समझता रहा है। प्राचीन सभ्यताएँ जीवों के साथ नदी, पर्वत, तथा हवा जैसी निर्जीव वस्तुओं… Read more »



संघ, शाखा और मैं

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मैंने नहीं सोचा था कि राष्ट्रीय संवयंसेवक संघ की शाखा के साथ अपने साथ, अनुभवों, उत्तेजनाओं और आनन्द को कभी शेयर करने का अवसर मिलेगा। या उसकी कोई प्रासंगिकता होगी। तब मैं सातवीं-आठवीं का छात्र था, समय 1945-46। शाखा वालों से परिचय कैसे हुआ, याद नहीं है। पहली यादें हैं कि रोज दोपहर बाद चार… Read more »

डायरी के पन्ने

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 अपने जीवन की संध्याकाल में अपनी जीवनयात्रा का लेखाजोखा करने की कोशिश करता हूँ तो एक दिलचस्प तस्वीर उभड़ती है। दिलचस्प वह है जो ध्यान खींचता है। जिसके बारे में और जानने का मन होता है। दिलचस्प आदमी हों अथवा हालत अथवा वस्तु—उससे जुड़े रहने का मन होता है। वह कभी उबाऊ नहीं होता, कभी… Read more »

टिया और मैं

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एक मशहूर पौराणिक कथा से बात शुरु होती है। नारद मुनि को हाथ में तेल से लबालब भरा कटोरा लिए राजर्षि जनक के बाग का पूरा चक्कर लगाने को कहा गया था। शर्त थी कि तेल की एक भी बूँद छलकने नहीं पाए। मुनिवर ने सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। अब उनसे बाग का वर्णन देने को… Read more »

जीवित अन्त्येष्टि

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कभी कभार आपको ऐसी किताब मिल जाती है जो आपको चौंकाती है और जीवन के प्रति आकर्षण बढ़ाती है। पिछले दिनो एक किताब पढ़ने का अवसर मिला। किताब का नाम है Tuesdays with Morrie. यह किताब अमेरिका के मैसाचुसेट्स के ब्राण्डिस विश्वविद्यालय में सामाजिक मनोविज्ञान के प्रोफेसर मॉरी श्वार्ज़ की कहानी कहती है। मॉरी जीवन… Read more »

गंगा

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 गंगा की भोगौलिक उत्पत्ति मध्य-हिमालय के गंगोत्री हिमवाह(ग्लेसियर) से हुई। इस हिमवाह के पूर्व दिशा से अलकनन्दा का स्रोत आया है एवम् पश्चिम की ओर से भागीरथी का। देवप्रयाग में ये दो धाराएँ मिलित होकर गंगा नाम धारण कर लेती हैं । गोमुख जैसी गुहामुख से पिघले बर्फ की धारा के रूप में भागीरथी उतरती… Read more »

घर

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घर ऐसा परिवेश है, जो एकान्तता और भागीदारी ( privacy and sharing) के घिरे स्थान को समेटे हुए होता है। आदिम मनुष्य जानवरों की तरह ही जंगलों में रहता था। अपना भोजन जंगलों से खाद्य संग्रह और शिकार के द्वारा जुटाता था। फिर उसने खेती करना सीख ही नहीं लिया, अपना भी लिया। इसके साथ… Read more »

तब का और अब का भारत—एक अवलोकन

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जेरेमी सीब्रुक अनुवाद—गंगानन्द झा तीस साल पहले जिस भारत  को मैं गया था, वह आज के भारत से बिलकुल अलग मुल्क था। विदेशी के जेहन में उस वक्त यह अभी भी एक धुँधले, लेकिन व्यापक खतरे के खिलाफ आगाह करता था। सैलानी जरते थे कि उन्हें कोई छूत न लग जाए. भारत गन्दगी और मुसीबत… Read more »

तीसरी किश्त

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-गंगानंद झा- इस्लाम साहब से हमारी मुलाकात कई वर्षों के बाद हुई । अब वे बाकायदा प्रतिष्ठित और सम्पन्न पाकिस्तानी नागरिक और उद्योगपति हो चुके थे, बाकायदे पासपोर्ट, विसा पर आए थे । पाकिस्तान की बातें करते हुए उन्होंने कहा, ‘अरे हम लोग तो बनिया हैं । रोजगार की खातिर दूर-दराज जाना हमारी फितरत रही… Read more »