लेखक परिचय

नीरज वर्मा

नीरज वर्मा

1998 से सक्रिय, टी.वी.पत्रकारिता की शुरुवात , 16 सालों का तज़ुर्बा, राजनीति-आध्यात्म-समाज और मीडिया पर लगातार लेखन ! एक्टिव ब्लॉगर ! हिन्दी-मराठी-अंग्रेजी-भोजपुरी पर ख़ासी पकड़ ! अघोर-परम्परा पर, पिछले कई सालों से लगातार शोध !

आशुतोष-प्रसून और रवीश जैसों के भरोसे तो राष्ट्र निर्माण कत्तई नहीं हो सकता श्रीमान केजरीवाल

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-नीरज– कुछ दिन पहले दिल्ली में “आप” पार्टी ने किसानों के समर्थन में सभा की थी ! ये सभा केंद्र सरकार के भूमि-अधिग्रहण बिल का विरोध करने के लिए आयोजित की गयी थी! इस सभा की चर्चा खूब हुई ! चर्चा होने का कारण बिल का विरोध नहीं था, बल्कि सभा में, राजस्थान से आये… Read more »

लव सेक्स धोखा और “आप”

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70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 67 विधायक अरविन्द केजरीवाल के हैं ! ये सबको मालूम हैं ! कमाल का बन्दा है ये केजरीवाल ! क्या सहयोगी, क्या विरोधी ! सबको ठिकाने लगा देता है ! क्या अपने- क्या पराये ! “जो हमसे टकराएगा-चूर चूर हो जाएगा ” के मंत्र का निरंतर जाप करता हुआ… Read more »



जब औघड़-श्राप से मुक्त हुआ था काशी- राजघराना

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अघोर-परम्परा का उदगम, सृष्टि के निर्माण से ही है ! कहा जाता है कि भगवान शिव इस दुनिया के पहले अघोरी थे ! उत्तर-भारत में भगवान शिव को औघड़-दानी कहने का चलन बरसों पुराना है ! किसी भी समय-काल में , विधाता की सम्पूर्ण शक्ति को समाहित किये, इस पृथ्वी पर हमेशा एक अघोरी मानव-तन… Read more »

यकीं मानिए- दुनिया में सिर्फ दो-कौम हैं !

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दुनिया में सिर्फ 2 कौम हैं ! अमीर-गरीब ! गर हिन्दुस्तान की बात करें तो टाटा-बिड़ला और अम्बानी-अडानी जैसों की अलग कौम और खून पसीने से रोटी का जुगाड़ करने वालों की अलग कौम ! मुकेश अम्बानी, टाटा-बिरला-अदानी, सचिन तेंदुलकर, शाहरुख़ खान जैसों के पास अरबों-करोड़ों के बंगले और बेशुमार-दौलत , 40% भारतीयों के पास… Read more »

नमो-नमो हक़ीक़त नहीं, सपनों का सौदागर !

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– नीरज वर्मा- सपने बेचना कोई खेल नहीं ! तमाशा नहीं ! हुनर चाहिए ! एक हुनर-मंद गया ! दूसरा अभी-अभी आया है ! बदकिस्मती से ये तमाशा बदस्तूर जारी है ! देश को 60,000 करोड़ की एक बुलेट ट्रेन चाहिए या इसी रकम में सैकड़ों एक्सप्रेस ट्रेनों का कायाकल्प चाहिए ? बुलेट ट्रेन में… Read more »

अघोरियों का तीर्थ- बाबा कीनाराम स्थल

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…..लीक से हटकर अघोर या अघोरी जैसे शब्द कान में गूंजते ही अजीबो-गरीब ख्याल आते हैं ! शमशान, दारू , स्त्री-संग , चमत्कार , भय-विकृति और ना जाने क्या-क्या ! पर मजे की बात ये है कि- ज़ेहन में ये सारे सवाल बरसों पुराने मिथक पर आधारित होते हैं या फिर “काल-कपाल-महाकाल” जैसे भ्रामक सीरियल्स… Read more »

जेम्स फोले को गीदड़ पत्रकारिता की श्रद्धांजलि

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-नीरज वर्मा- अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले मार दिए गए ! क़त्ल का अंदाज़ वहशियाना था! बकरे की गर्दन माफ़िक उनकी गर्दन को रेता गया ! दुनियाभर में इसकी खूब निंदा हो रही है ! अब दूसरे पत्रकार स्टीवन जोएल सोटलॉफ की कटी गर्दन की ख़बर का इंतज़ार है ! दुनिया के तमाम देशों के गृह-युद्ध… Read more »

मीडिया के योगी, गरीब विरोधी

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-नीरज वर्मा- सरकारी गुणा-गणित के मुताबिक़, भारत के गांव और शहर में रहने वाला व्यक्ति अगर 30 व 40 रुपये रोज़ कमाता है, तो वो गरीब नहीं है ! अब इस तीस और चालीस रुपये का हिसाब देख लें ! दाल 80 रुपये, आटा 30 रुपये, टमाटर 90 , चावल 30, प्याज 70, आलू 30,… Read more »

औकात चवन्नी- भवकाल डॉलर का

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-नीरज वर्मा- “अच्छे दिनों” की शुरूआत हो चुकी है! रेलभाड़े में 14 और माल-भाड़े में 6.5 फ़ीसदी की बढ़ोतरी कर मोदी सरकार ने जता दिया है कि “अच्छे दिनों” के मामले में वो मनमोहन सिंह से भी बीस पड़ेंगे! यानि आने वाले दिनों में महंगाई, मनमोहन राज से भी ज़्यादा होगी! नून-तेल-आटा- प्याज- सब महंगा… Read more »

वाह रज़ा बनारस, वाह !

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-नीरज वर्मा-    भारतवर्ष ! उसका एक बड़ा और अहम हिस्सा उत्तर-प्रदेश ! और उत्तर-प्रदेश का बेहद अहम् हिस्सा वाराणसी / काशी / बनारस ! मोक्ष की नगरी – तीर्थाटन की नगरी – और औघड़-दानी भगवान शिव की नगरी ! हिन्दुस्तानी संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक ! विदेशों में सर्वाधिक लोकप्रिय भारतीय शहर ! एक अजीब… Read more »