लेखक परिचय

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

कौन हैं मुसलमानों को योगी का डर दिखाने वाले लोग?

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कुछेक बयानों को आधार बनाकर यह लोग योगी आदित्यनाथ को बदनाम कर रहे हैं। निश्चित तौर पर उनके कुछ बयान कड़े हैं, लेकिन समूचा देश यह भी जानता है कि वे बयान अकारण नहीं आए थे। उन बयानों के पीछे एक पीडि़त,आहत और व्यथित मन था। योगी की कट्टर छवि गढऩे वाले मीडिया और कम्युनिस्टों को आज से 10 साल पहले वर्ष2007 में संसद में दिए गए गोरखपुर के सांसद आदित्यनाथ का आँसुओं से तरबतर पूरा भाषण सुनना चाहिए। प्रोपोगंडा फैलाने में माहिर और हिटलर के सूचना मंत्री गोएबल्स के वंशज यह लोग क्या इस बात का जवाब दे सकते हैं कि संसद में एक संत क्यों फफक-फफक कर रोया था?

कट्टरपंथ की बुरी नजर से कला-संस्कृति को बचाना होगा

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लोकेन्द्र सिंह असम के 46 मौलवियों की कट्टरपंथी सोच को 16 वर्षीय गायिका नाहिद आफरीन ने करारा जवाब दिया है। नाहिद ने कहा है कि खुदा ने उसे गायिका का हुनर दिया है, संगीत की अनदेखी करना मतलब खुदा की अनदेखी होगा। वह मरते दम तक संगीत से जुड़ी रहेंगी और वह किसी फतवे से… Read more »



रामजस पर हल्ला, केरल पर चुप्पी क्यों?

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लोकेन्द्र सिंह   रामजस महाविद्यालय प्रकरण से एक बार फिर साबित हो गया कि हमारा तथाकथित बौद्धिक जगत और मीडिया का एक वर्ग भयंकर दोगला है। एक तरफ ये कथित धमकियों पर भी देश में ऐसी बहस खड़ी कर देते हैं, मानो आपातकाल ही आ गया है, जबकि दूसरी ओर बेरहमी से की जा रही… Read more »

अरुणाचल प्रदेश में घटती हिन्दू आबादी

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केन्द्रीय मंत्री ने जो कहा, सच कहा – लोकेन्द्र सिंह अरुणाचल प्रदेश में हिंदू जनसंख्या के सन्दर्भ में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के बयान पर कुछ लोग विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि उनका बयान एक कड़वी हकीकत को बयां कर रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि उनके बयान पर… Read more »

‘भगवान के घर’ में वामपंथ का आतंक

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केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं पर वामपंथियों के हमले बढ़े, अब तक 300से अधिक निर्दोष लोगों की हत्या   – लोकेन्द्र सिंह ‘ईश्वर का अपना घर’ कहा जाने वाला प्राकृतिक संपदा से सम्पन्न प्रदेश केरल लाल आतंक की चपेट में है। प्रदेश में लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी… Read more »

तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

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बहरहाल, हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है? जो लोग गांधीजी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर संदेह कर रहे हैं, उन्हें ध्यान करना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे अधिक प्रचारित ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को महात्मा गांधी को ही समर्पित किया है। इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए गांधीजी के चित्र और उसके प्रतीकों का ही उपयोग किया जाता है।

वेद, तंत्र एवं योग की त्रिवेणी है भारतीय संस्कृति

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भारतीय ज्ञान-परंपरा के वाहक हैं अभिनवगुप्त : जे. नंदकुमार आचार्य अभिनवगुप्त की सहस्त्राब्दी वर्ष के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय विद्वत संगम’ का आयोजन बेंगलूरु। पिछले वर्ष तक देश में आचार्य अभिनवगुप्त के बारे में शोधार्थियों को भी अधिक जानकारी नहीं थी। परंतु, जम्मू-कश्मीर अध्ययन केन्द्र के प्रयास से देश में एक वातावरण बन गया है। आचार्य अभिनवगुप्त… Read more »

हैप्पी न्यू ईयर या नववर्ष, तय कीजिए

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लोकेन्द्र सिंह दृश्य एक। सुबह के पांच बजे का समय है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी वर्ष प्रतिपदा का मौका है। ग्वालियर शहर के लोग शुभ्रवेश में जल विहार की ओर बढ़े जा रहे हैं। जल विहार के द्वार पर धवल वस्त्र पहने युवक-युवती खड़े हैं। उनके हाथ में एक कटोरी… Read more »

सांप्रदायिक निर्णय के बाद भी कांग्रेस सेक्युलर!

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लोकेन्द्र सिंह   जुमे की नमाज के लिए मुस्लिम कर्मचारियों को 90 मिनट का अवकाश देकर उत्तराखंड सरकार ने सिद्ध कर दिया है कि कांग्रेस ने सेक्युलरिज्म का लबादा भर ओढ़ रखा है, असल में उससे बढ़ा सांप्रदायिक दल कोई और नहीं है। कांग्रेस के साथ-साथ उन तमाम बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के सेक्युलरिज्म की… Read more »

हिंदी का स्वाभिमान बचाने समाचार-पत्रों का शुभ संकल्प

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ह सर्वविधित है कि हिंदी के समाचार माध्यमों में अंग्रेजी शब्दों का बढ़ता प्रयोग भारतीय मानस के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषकर, हिंदी समाचार पत्रों में अंग्रेजी के शब्दों का चलन अधिक गंभीर समस्या है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि हिंदी समाचार पत्रों की भाषा से नवयुवक अपनी भाषा सुधारते थे। समाचार पत्र सूचना और अध्ययन सामग्री देने के साथ-साथ समाज को भाषा का संस्कार भी देते थे।