लेखक परिचय

एम. अफसर खां सागर

एम. अफसर खां सागर

एम. अफसर खां सागर धानापुर-चन्दौली (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं। इन्होने समाजशास्त्र में परास्नातक के साथ पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। स्वतंत्र पत्रकार , स्तम्भकार व युवा साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं। पिछले पन्द्रह सालों से पत्रकारिता एवं रचना धर्मीता से जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न अखबारों , पत्रिकाओं और वेब पोर्टल के लिए नियमित रूप से लिखते रहते हैं। Mobile- 8081110808 email- mafsarpathan@gmail.com

भारतीय संस्कृति के उदार सामाजिक बुनावट की पहचान है होली

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होली

एम. अफसर खां सागर सदियों पूराना होली का त्यौहार तन और मन पर पड़े तमाम तरह के बैर, द्वेष और अहंकार को सतरंगी रंगों में सराबोर करके मानव जीवन में उल्लास और उमंग के संचार का प्रतीक है। होली रंगों, गीतों और वसंत के स्वागत का त्यौहार है। होली के दिनों में हुड़दंग, हुल्लड़, रंग… Read more »

गौरैया की चहक और फुदक की हिफाजत जरूरी

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एम. अफसर खां सागर अभी कुछ साल पहले ही अम्मी जब सुबह के वक्त सूप में चावल को पछोरती और बनाती थीं तब छोटी-छोटी चिडि़या झुण्ड में चावल के छोटे टुकड़ों जिसे गांव में खुद्दी के नाम से जाना जाता है उसे खाने के लिए नुमाया हो जाती थीं। फुदक-फुदक कर हल्के कोलाहल के साथ… Read more »



विलुप्ती के करीब प्राकृतिक सफाईकर्मी : गिद्ध

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एम. अफसर खां सागर अभी कुछ ज्यादा अरसा भी नहीं गुजरा है गिद्ध बड़ी आसानी से दिखाई देते थें मगर आज हालात काफी बदल गये हैं, अब ढ़ूढ़ने से भी नहीं दिखते। मेरे घर के पीछे ही खरगस्सी तालाब के पास ताड़ के दर्जन भर पेड़ कतारबद्ध खड़े हैं। गवाह हैं ताड़ के वे पेड़… Read more »

बाल श्रम की जंजीरों में सिसकता बचपन

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एम. अफसर खां सागर बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है। समाज व राष्ट्र के विकास को गति देने के लिए हमेशा से बच्चों को बेहतर शिक्षा व संस्कार देकर जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयत्न रहा है। मगर आर्थिक विसंगति व गरीबी की वजह से आज भी बहुत से बच्चे बाल श्रम की जंजीरों… Read more »

प्यार का ढाई आखर जो सनातन, अजर और अमर है

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एम. अफसर खां सागर किसी के लिए जिन्दगी जीने का सलीका तो किसी के लिए जीने की खुबशूरत वजह है। किसी को इसमें रब दिखता है तो किसी के लिए कम्बख्त इश्क है ये। प्यार शब्द तो एक है मगर इसके मायने अनेक हैं। इतिहास गवाह है कि इश्क के नाम पर न जाने कितनी… Read more »

मांग अलग पूर्वांचल राज्य की

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एम. अफसर खां सागर भारत को आजाद हुए 68 साल बीत चुके हैं। बदलते वक्त के साथ विकास के पैमाने बदले हैं। बैलगाड़ी से मोटर गाड़ी तक का सफर तय हुआ और पाती से मोबाइल की थाती तक। विकास की दौड़ में भारत हांफता हुआ चल रहा है। विकास की राह हमवार किये हिन्दुस्तान में… Read more »

दफ्न होती मासूम बच्चियां

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एम. अफसर खां सागर कन्या भ्रूण हत्या के लिए यूं तो मुल्क में बाजाब्ता कानून है फिर भी बच्चियों को पैदा होने से पहले ही दफ्न करने के मामले बदस्तूर जारी हैं। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान भी चल रहे हैं मगर उनका व्यापक असर आना बाकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने तो कन्या… Read more »

सोशल मीडिया में बदजुबान होती अभिव्यक्ति की आजादी

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 एम. अफसर खां सागर फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प सरीखे सोशल साइट्स ने वैश्विक स्तर पर लोगों को करीब आने का मौका दिया है तथा एक-दूसरे के विचारों और संस्कृति से परिचित भी कराया है। संचार का सदव्यवहार संवाद और संस्कृतियों के प्रसार का हमेशा से आधार रहा है। जिस तरह से सोशल मीडिया का विस्तार हुआ… Read more »

संगीत पर… हंगामा है क्यों बरपा?

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एम. अफसर खां सागर संगीत, साहित्य और कला ने समाज को हमेशा से दिशा देकर एकता और सौहार्द के मखमली डोर में पिरोने का काम किया है। संगीत को सरहदों में कैद नहीं किया जा सकता। आम जीवन में देखा जाए तो इंसान मानसिक सुकून के लिए संगीत का सहारा लेता है। जब हम अच्छा… Read more »

लोकतंत्र का पर्व बनाम लोक कल्याण की भावना

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एम. अफसर खां सागर हर साल की तरह इस साल भी हम स्वतंत्रता दिवस का जश्न बड़े धूम-धाम से मना रहे हैं और मनाना भी चाहिए क्योंकि बड़ी कुर्बानियों के बाद देश को आजादी मिली है। कहीं शहादतों के कशीदे पढ़े जा रहे हैं तो कहीं लोकतंत्र का बखान मगर इन सबके बीच भूखतंत्र पर… Read more »