लेखक परिचय

मनोज यादव

मनोज यादव

१२ जुलाई १९८९, गांव-नया पुरवा,राय बरेली, उत्तर प्रदेश चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से एम.कॉम. पी. सी. जेवेलर्स में लेखाकार पद पर कार्यरत मंच से कविताओं का मंचन, ग्रामीण अंचल से बेहद लगाव I हृदय की गहराईओं में जो भाव उतरकर मन को जकझोर देते है, वही भाव मेरी कलम से कागज पर उतरकर कविता का रूप लेते हैं I

छत्तीसगढ़ में स्त्री सशक्तिकरण की नई इबारत

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अनामिका मनुष्य ने समय-समय पर अपने साहस का परिचय दिया है. आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह हमारे साहस का ही परिणाम है. आदिमानव के रूप में हम कभी इस बात का यकिन ही नहीं कर सकते थे कि आसमान में हवाई जहाज उड़ा करेंगे लेकिन आज मनुष्य अपने सांसों से अधिक… Read more »

शहादत का गीत

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सत्ता ये खामोश रहे, खामोश नहीं हो सकता मैं, बलिदानों पर वीरों के, मौन नहीं हो सकता मैं, कैसे देखूँ, माता को अपनी आँखों का तारा खोते, बूढे बाप को बेटे की मैं, अर्थी का बोझा ढोते, कैसे देखूँ, बहना के आँसू को रक्षाबंधन में, विधवा को पल-पल मरते, मैं उसके सूने जीवन में, क्या… Read more »



हमको सपने सजाना जरुरी लगा

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तुम मिली जब मुझे दुनिया की भीड़ में, अपनी सुध-बुध गवाना जरुरी लगा, आस जागने लगी प्रीत की शब तले, हमको सपने सजाना जरुरी लगा,   नींद छिनी रात की दिन का चैन लूटा, हाल तुमको बताना जरुरी लगा, चाहत की गलियों में हाँ संग तेरे, प्रेम दीपक जलाना जरुरी लगा,   तेरे पहलू में… Read more »

हसना झूठी बातों पर

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नयनों में छायी तृष्णा, सूनापन मन के जज्बातों पर, धीरे-धीरे सीख गये हम, हसना झूठी बातों पर,   कपट भरी इस दुनिया में, रिश्तों को बटते देखा हमने, प्रेम की माला का मोती, एक-एक कर झरते देखा हमने, कल तक जो सब अपने थे, वो आज बेगाने लगते हैं, प्यार भी बंटकर रह गया, बस अवसर… Read more »