लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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तुम चलत सहमित संस्फुरत !

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उड़िकें गगन आए धरणि,
बहु वेग कौ करिकें शमन;
वरिकें नमन भास्वर नयन,
ज्यों यान उतरत पट्टियन !

बचिकें विमानन जिमि विचरि,
गतिरोध कौ अवरोध तरि;
आत्मा चलत झाँकत जगत,
मन सहज करि लखि क्षुद्र गति !

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार या अवहेलना न्यायालय की ??

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ऐसा नहीं है कि न्यायपालिका के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप पहली बार लगे हैं | इसके पहले भी कई जजों को स्टिंग ऑपरेशन में रंगे हाथों पकड़ा गया है | सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश तथा प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कई बार सार्वजनिक रूप से न्यायपालिका में हो रहे भ्रष्टाचार पर चिंता जताई है | कितनी ही बार पूर्व न्यायाधीशों ने कोर्ट में हो रहे भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त की है | न्यायपालिका में चल रहे भ्रष्टाचार पर जस्टिस काटजू ने भी कहा था कि “मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर मुख्य न्यायाधीश न्यायपालिका के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने से परहेज करते रहे हैं, शायद इसलिए कि इससे न्यायपालिका की बदनामी होगी |”



मोदी के दौर की फिल्म है बाहुबली

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अगर सत्यजीत रे का सिनेमा नेहरु के दौर का प्रतिनिधित्व करता है तो बाहुबली मोदी के दौर का सिनेमा है जिसमें साहस है, शौर्य है, वैभवशाली और समर्थ भारत की एक कल्पना है। जहां नायक शपथ लेता है – मैं… महेंद्र बाहुबली माहिषमति की असंख्य प्रजा और उनके मान और प्राण की रक्षा करूंगा, इसके लिए यदि मुझे अपने प्राणों की आहुति भी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगा।

मनोहर सिंह बने डीजेए के नए अध्यक्ष

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चुनाव अधिकारी, दधिबल यादव ने आज यहां नए पदाधिकारियों और नई कार्यकारिणी के निर्वाचन की घोषणा की। नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रासबिहारी और राष्ट्रीय महासचिव रतन दीक्षित ने नई टीम को शुभकामना देते हुए कहा है कि यह टीम दिल्ली में पत्रकारों के हितों की दिशा में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देगी। डीजेए के नए पदाधिकारियों के अनौपचारिक बैठक के दौरान करीब 200 पत्रकार मौजूद रहे। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार और आॅर्गेनाइजर के पूर्व संपादक डॉ. आर. बालाशंकर भी मौजूद रहे और नई टीम को बधाई दी।

सतत विकास के लिये नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा  : प्रकाश जावेडकर

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मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि सरकार ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सबसे अच्छी शोध प्रयोगशालाएँ स्थापित करने का निर्णय लिया है| आई.आई.टी (IITs) भी संयुक्त रूप से विदेशों में रह रहे भारतीय विद्यार्थियों का साक्षात्कार लेंगे ताकि वे उनकी नियुक्ति अपने संस्थानों में अध्यापकों के तौर पर कर सकें | इन विद्यार्थियों को अनुसंधान और परामर्श की स्वतंत्रता होगी

वालंटियर्स में दोबारा ‘विश्वास’ जगाएंगे ‘आप’ के कुमार

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आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने आख़िर आम आदमी पार्टी से सम्बंधित हाल के मुद्दों पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। शुक्रवार को उन्होंने कई टेलीविज़न चैनल्स को इंटरव्यू दिए और कई लंबित सवालों के जवाब भी दिए। जिस बात पर कुमार ने सबसे प्रमुखता से ज़ोर डाला, वो था वोटर्स और वालंटियर्स… Read more »

ख़ालसा पंथ का उदय तथा श्री गुरु गोबिन्द सिंघ जी के दिशा-निर्देश

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30 मार्च सन् 1699 को वैषाखी के दिन श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी ने आन्नदुपर (पंजाब) में, सभी सिक्खों को एकत्र कर एक विशाल सम्मेलन का आयोजन किया। प्रातः भजन-कीर्तन के पश्चात् उस ऐतिहासिक दिवस पर, श्रद्धालुओं के अपार जन-समूह के सम्मुख हाथ में नग्न तलवार लिए श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी ने उच्च स्वर… Read more »

चीन की बेचैनी

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दीगर मुल्कों में भारतीय प्रोडक्ट क्वालिटी और साख में चीन के माल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जिससे चीन बुरी तरह चिढ़ा हुआ है। चीन की चीप-टाइप बिजनेस ट्रिक्स के कारण कई मुल्कों के साथ तो उसके कारोबार और मुनाफे में गिरावट भी आई है। कुछ माह पहले, चीन ने कुछ अफ्रीकी देशों में अपने कारोबार को भारत से कड़ी चुनौती मिलने के बाद वहां भारतीय प्रोडक्ट्स को बदनाम करने की मुहिम छेड़ दी थी, और ‘मेड इन इंडिया’ के नकली ठप्पे लगाकर बड़े पैमाने पर अपना घटिया माल बाज़ार में उतार दिया था। ज़ाहिर है बिजनेस में सीधे ढंग से भारत का मुकाबला न कर पाने के कारण चीन खामख्वाह अरुणाचल जैसे मुद्दे उठाकर इसकी बांहें मरोड़ने की चाल चल रहा है।

श्री दुर्गाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र

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नवदुर्गा पर्व पर विशेष: हिंदी काव्यानुवाद * शिव बोलेः ‘हे पद्ममुखी! मैं कहता नाम एक सौ आठ। दुर्गा देवी हों प्रसन्न नित सुनकर जिनका सुमधुर पाठ।१। ओम सती साघ्वी भवप्रीता भवमोचनी भवानी धन्य। आर्या दुर्गा विजया आद्या शूलवती तीनाक्ष अनन्य।२। पिनाकिनी चित्रा चंद्रघंटा, महातपा शुभरूपा आप्त। अहं बुद्धि मन चित्त चेतना, चिता चिन्मया दर्शन प्राप्त।३।… Read more »

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बनाम राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयं सेवक संघ

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संघ के स्वयंसेवक समाज – सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण के लिये कठोर जीवन जीते हैं। उनका लक्ष्य राजनींति एवं सत्ता के माध्यम से सुविधायें न जुटाकर, पूरे देष मे सुदूर वनवासी क्षेत्रों तक में- पैदल तक चलकर, अनवरत काम करते हैं। हिन्दू समाज मे सामाजिक समरसता का भाव भरते हुये उसे एकता के सूत्र में पिरोते हैं। संघ मे लाखों-लाख ऐसे स्वयं सेवक हैं, जो आजीवन अविवाहित रहकर एकाकी जीवन जीकर अपने रक्त की एक-एक बूंद राष्ट्र के लिये समर्पित कर देते हैं। राष्ट्र-जीवन की भयावह समस्याओं के समक्ष अपने परिजनो के दुःख-दैन्य उनके लिये गौण हो जाते हैं।