लेखक परिचय

राकेश कुमार आर्य

राकेश कुमार आर्य

'उगता भारत' साप्ताहिक अखबार के संपादक; बी.ए.एल.एल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता राकेश जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में 'मानवाधिकार दर्पण' पत्रिका के कार्यकारी संपादक व 'अखिल हिन्दू सभा वार्ता' के सह संपादक हैं। सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। दादरी, ऊ.प्र. के निवासी हैं।

प्रकृति और प्रकत्र्ता दोनों से मिलाता है योग

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शब्द प्रकृति दो शब्दों से बनता है-प्र+कृति। ‘प्र’ का अर्थ है-उत्तमता से, पूर्ण विवेक से और ‘कृति’ का अर्थ है-रचना। इस प्रकार प्रकृति का अर्थ है एक ऐसी रचना जिसे उत्तमता से, नियमों के अंतर्गत रहते हुए और विवेकपूर्वक बनाया गया है, रचा गया है। प्रकृति अपने नियमों से बंधी है, और वह उनके बाहर… Read more »

भज ‘कोविन्दम्’ हरे-हरे

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उधर संघ के लाखों कार्यकर्ता या स्वयंसेवक भी इस बार एक अपेक्षा लगाये बैठे थे कि जैसे भी हो इस बार देश का राष्ट्रपति संघ की पृष्ठभूमि का राजनीतिज्ञ बने। श्री कोविन्द संघ की पृष्ठभूमि के राजनीतिज्ञ हैं, जिनके नाम के आने से आरएसएस को भी राहत मिली है और उसके वे स्वयंसेवक भी प्रसन्न है- जिनसे कुछ समयोपरांत प्रधानमंत्री को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए काम लेना है। मोहन भागवत नहीं तो कोविन्द ही सही, अर्थात मोहन=’गोविन्द’ के स्थान पर कोविन्द भी चलेगा, बात तो कुल मिलाकर एक ही हुई। अब संघ भी कहने लगा है-‘भज कोविन्दम् हरे हरे।’



21 जून : भारत वंदन दिवस

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जब संसार एक मौन क्रांति से बाहर निकलकर अर्थात अपने ‘द्विज’ बनने की साधना को पूर्ण करके अपनी साधना (संसार में सात्विक लोगों के संगठनीकरण की प्रक्रिया) से बाहर आएगा तो उस सफलता में भारत की बड़ी भूमिका होगी। निश्चय ही उस समय भारत का अतीत वर्तमान विश्व के मंचों पर विराजमान होगा और सारा संसार उसकी आरती कर रहा होगा। उस भव्य और दिव्य दिवस की आहट 21 जून ने दे दी है। अभी तो शुरूआत है। आने वाला समय निश्चय ही अच्छा होगा।

आग लगाने में ‘प्रवीण’ तोगडिय़ा

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भारतीय राजनीति जिस समय राम मंदिर निर्माण पर मौन थी और मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते हिंदू विरोध की राजनीति को अपना मौलिक संस्कार माने बैठी थी -उस समय राम जन्मभूमि के मुददे को गर्माना और हिन्ंदू के भीतर आत्मस्वाभिमान पैदा करने के लिए उसे राजनीतिक रूप से चेतनित करना आवश्यक हो सकता है, परंतु हिन्दू को मुसलमान के विरूद्घ आक्रामक बनाकर वर्गीय संघर्ष को जन्म देना उचित नहीं हो सकता।

चौदहवें रतन को खोजता देश

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राकेश कुमार आर्य भारत के चौदहवें राष्ट्रपति का चुनाव निकट है। हमें भाजपा की ओर से शीघ्र ही नये राष्ट्रपति का नाम मिलने वाला है। इसके लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, वैंकैया नायडू को नियुक्त कर दिया है। विपक्षी दलों से समन्वय स्थापित कर ये तीनों… Read more »

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-18

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राकेश कुमार आर्य  वेद की बोलें ऋचाएं सत्य को धारण करें गतांक से आगे…. मंत्र का अगला शब्द है-‘इंद्र’। इंद्र को हमारे वीरता और ऐश्वर्य का अर्थात समृद्घि का प्रतीक माना गया है। राजा का कत्र्तव्य है कि वह देश की प्रजा को वीर तथा ऐश्वर्यशाली बनाये। वीर्य रक्षा से वीर संतति का निर्माण… Read more »

ड्रैगन चीन का मकडज़ाल

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राकेश कुमार आर्य  व्यक्ति का मौलिक चिंतन उसके व्यक्तित्व का निर्माण करता है। मौलिक चिंतन जितना ही पवित्र, निर्मल, छल-कपट रहित और सार्वजनीन होता है, उसमें उतना ही सर्व-समावेशी भाव अंतर्निहित होता है, और वह मानवता के लिए उतना ही उपयोगी होता है। ऐसा व्यक्ति संसार के लिए उपयोगी और बहुमूल्य होता है और… Read more »

बाबा साहेब और भीम सेना

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आज के परिप्रेक्ष्य में संदर्भ को समझने की आवश्यकता है। यदि अंग्रेज अपने कुशासन और गुण्डागर्दी के विरूद्घ और हमारे स्वतंत्रता प्रेमी पूर्वजों के विद्रोह को ‘राज्य के विरूद्घ अपराध’ मान सकते थे और उन्हें फांसी पर लटका सकते थे तो आज जब भारत एक संवैधानिक व्यवस्था से जन्मी शासन प्रणाली से आगे बढ़ रहा है तो उस संवैधानिक व्यवस्था के विरूद्घ हथियार उठाने वाले राष्ट्रद्रोही क्यों नहीं हो सकते? निश्चित ही राष्ट्रद्रोही हैं,

वैज्ञानिकों के चमत्कार को नमस्कार

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अब आज जब हम अपने आधुनिक विश्व के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष की खोज करते हुए देखते हैं, हम यह भी देखते हैं कि आज के वैज्ञानिक कैसे नये-नये अंतरिक्षीय रहस्यों से पर्दा उठाते जा रहे हैं, तो हमें उन पर आश्चर्य होता है। वास्तव में यह आश्चर्य करने की बात नहीं होनी चाहिए, अपितु हमें अपने आप पर गर्व होना चाहिए कि आज का विज्ञान जितना ही अंतरिक्षीय रहस्यों को उद्घाटित करता जा रहा है-वह उतना ही अधिक हमारे साक्षात्धर्मा ऋषियों के उत्कृष्टतम चिंतन को नमन करता जा रहा है।

खेल की राजनीति और राजनीति का खेल

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भारत ने पाकिस्तान के विरूद्घ दो ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ कर दी हैं, जिन्हें वह नकार रहा है, कि-‘मेरे साथ कुछ नही हुआ, भारत की सेना और सरकार झूठ बोल रही है कि उसने कोई सर्जिकल स्ट्राईक की है।’ पाकिस्तान की हां में हां मिलाकर भारत के कुछ ‘जयचंदों’ ने भी तुरंत भारत की सेना से ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ के प्रमाण मांग लिये। अब इंगलैंड की भूमि से भारत की क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान के विरूद्घ एक तीसरा ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ कर दिखाया है।