लेखक परिचय

महेश तिवारी

महेश तिवारी

संपर्क न : 9457560896

आसमां में लिखा गया नया इतिहास

Posted On & filed under टेक्नोलॉजी, विविधा.

भारतीय वैज्ञानिकों ने अपने अद्भुत कलात्मक अभिव्यक्ति का लोहा पेश करते हुए एक कीर्तिमान स्थापित किया, जो विश्व इतिहास में शक्तिशाली होने वाले राष्ट्र ने नहीं किया था। अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एकसाथ 104 सैटेलाइट को सफलता पूर्वक लॉन्च करने के साथ… Read more »

राजनीतिक दल मुफ्तखोरी की संस्कृति की नीति अपनाने से बाज आएं

Posted On & filed under राजनीति.

वक्त का तकाजा है, लोकतांत्रिक व्यवस्था को राजनीतिज्ञों ने ताक पर रख रंगरलियाॅ मना रहें है, देश की आजादी के सात दशकों बाद भी चुनावी जुमले से सत्ता की शरणगाह में पनाह प्राप्त कर मलाईयाॅ चाट रहंे है, और जनता जुमले की पूर्ति की तरफ टकटकी लगा बैठी है। यह सत्ता की मदान्धता है, कि… Read more »



महिलाओं की हिस्सेदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अल्पमत में कब तक

Posted On & filed under राजनीति.

महिलाओं के  लिए अधिकारों और कत्र्तव्यों को लेकर हमारे देश में गर्मागर्म बहस होती है, महिलाओं को यह अधिकार प्राप्त होने चाहिए, उनकों अपना सामाजिक विकास करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन वास्ताविकता में सारी बातें समय से साथ कौरी कागज साबित होती है। देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सभी स्तर… Read more »

पुरातन परंपरा पर विवेकपूर्ण बहस हो

Posted On & filed under समाज.

तमिलनाडु में पोंगल के अवसर पर मनाया जल्लीकट्टू सांडों को काबू करने का प्राचीन खेल है। जो सर्वोच्च न्यायालय की ओर से लगाए गए प्रतिबंध का विरोध आंदोलन की शक्ल में तब्दील होता दिख है। राज्य की जनता इसे अपनी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान के साथ जोड़कर देख रही है, लेकिन एनजीओ की याचिका पर… Read more »

 क्षेत्रीयता की जकड़न को बेधने का माकूल अवसर

Posted On & filed under राजनीति.

सियासी गलियारों में उटा-पटक का दौर शुभारंभ हो चुका है। राजनीतिक पार्टियों में जुबानी जंग के माध्यम से ही शह और मात का राजनीतिक माहौल बुलंद हो चुका है। अब ऊंट पहाड़ के नीचे की कहावत को राजनीतिक दलों के माननीय चरित्रार्थ कर रहे है, यानि जनता के गांव-गलियारों की याद और मूलभूत सुविधाओं से… Read more »

दंगल गर्ल जायरा वसीम पर दंगल जायज नहीं

Posted On & filed under विविधा.

लोकतांत्रिक राष्ट्र में कट्टरता का कोई नामोनिशान नहीं होना चाहिए, फिर वह धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक किसी भी तरीके का हो। हमारे देश में फेसबुक, और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटस पर महिलाओं को ट्राॅल करने और परेशान करने की वारदातें काफी बढ़ रही है, जो सभ्य सामाजिक परिवेश के लिहाज से उचित नहीं है। देश में जब… Read more »

जजों की नियुक्ति का विकल्प तलाशना महत्वपूर्ण

Posted On & filed under विधि-कानून, विविधा.

संवैधानिक देश के लिए यह नितान्त महत्वपूर्ण तथ्य होता है कि वहां के नागरिकों को ऐसी सुविधाएं नसीब हो, जिससे उन्हें अपना सामाजिक और आर्थिक जीवन में रूकावट न हो. देश के लोगों को भारतीय संविधान के द्वारा कुछ अधिकार दिये गए है जिसकी रक्षा करना हमारे संवैधानिक तंत्र की जिम्मेदारी बनती है। आज देश… Read more »

युवा, रफ्तार और सड़क दुर्घटनाएं

Posted On & filed under समाज.

दीपक तले अंधेरे की तर्ज पर प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देष्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सम्पूर्ण भारत में  का बुलावा होता है, इस बार भी हो रहा है, लेकिन समझने योग्य और विमर्श का मुद्वा यह है, कि इन कोशिशों के बावजूद सड़क दुर्घटनाएं है, कि कम होने का… Read more »

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रगान गायन का फैसला

Posted On & filed under विविधा.

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका के अन्र्तगत सिनेमाघरों में राष्टगान गायन की बात कही है। जो कि एक देशभक्त और कत्र्तव्यपरायणता की दृष्टि से उचित फैसला माना जा सकता है। जनहित याचिका में उठाये गए सवाल के जवाब में देशभक्ति की जिस भावना को जागृति करने का काम सर्वोच्च न्यायालय को उठाना पड़ा, उससे कही… Read more »

हवा की शुद्वता के लिए प्रदूषण के खिलाफ जनान्दोलन छेड़ने की जरूरत

Posted On & filed under खेत-खलिहान, जन-जागरण, पर्यावरण, विविधा.

खेती और किसानों के लिए अहम पराली को संरक्षित करने के बाबत बनाई गई राष्ट्रीय पराली नीति भी राज्य सरकारों के ठेंगा पर दिख रही है। गेहूं, धान और गन्ने की पत्तियां सबसे ज्यादा जलाई जाती है। अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार देश के सभी राज्यों को मिलाकर सालाना 50 करोड़ टन से अधिक पराली निकलती है उम्मीदों से भरे प्रदेश उत्तर प्रदेश मे छह करोड़ टन पराली में से 2.2 करोड़ टन पराली जलाई जाती है।