लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

Posted On by &filed under राजनीति.


जब मंगलेश डबराल प्रकरण सामने आया तब वामपंथ में खलबली मच गयी. वे आपस में आक्रमक हो गए. उन्हें संघ प्रेरित संस्था में जाना नागवार गुजरा. प्रो राकेश सिन्हा पर जमकर प्रहार हुआ. राकेश सिन्हा चुपचाप बहस देखते रहे. जब ओम थानवी ने बहस का अंत किया तब उन्होंने अपने फेसबुक पर जवाब लिखा, जिससे बहस आगे बढ़ा. उन्होंने वामपंथ की बौद्धिक परंपरा पर प्रमाणों के साथ वैचारिक प्रहार किया परन्तु वह प्रहार उन्हें उनकी नीयत और परिस्थिति का आभास कराने के लिए था. उन्होंने उभरती हुई चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए एवं संवाद की आवश्यकता बताते हुए उन वाम लेखकों को जवाब दिया कि संघ किसी से वैधानिकता का मोहताज नहीं है, हेडगेवार-गोलवलकर अधिष्ठान की जमीं मजबूत है. वामपंथी ब्लॉग जनपथ ने सिन्हा जी के जवाब को एक मील का पत्थर मानते हुए वामपंथियों से अपील की की इसका जवाब ढूढे परन्तु दो जवाब आये वे उस बहस के कमजोर कड़ी सिद्ध हुए.

राकेशजी की डॉ हेडगेवार की पुस्तक को मैंने पढ़ा है. यह एक प्रामाणिक शोध कार्य का प्रमाण है. इसे संघ के समर्थको एवं विरोधियों द्वारा खूब पढ़ा जाता है. आपको बता दूँ कि यू पी ए सरकार ने इसका दूसरा संस्करण छापा है और प्रकाशन विभाग की इस शृंखला में सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक है! इसका कारण है कि उन्होंने इसमें कहानी किस्से नहीं लिखे हैं बल्कि वैचारिक प्रश्नों को उठाया है. आज वे बौद्धिक जगत में अपनी साख के बदौलत ही भारत नीति प्रतिष्ठान को एक उंचाई प्रदान किया है.

भारत नीति प्रतिष्ठान का सबसे अच्छा उपक्रम दो दर्जनों उर्दू अखबारों का नियमित अनुवाद है और इसका पाक्षिक विश्लेषण मुझे नियमित मिल रहा है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इंडियन डिफेंस स्टडीज एंड अनालिसिस में इसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में संग्रह किया जाता है. ऐसे कई संस्‍थान हैं जहाँ यह संग्रह किया जा रहा है. आज देश भर में कौन संस्था है जिसने इस काम के महत्त्व को समझकर नियमित और लगातार काम किया हो ?

भारत थिंक टैंक किस स्थिति में है, इसे समझने के लिए जो कार्य इसने बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलोजी के साथ करना शुरू किया है वह अभिनंदनीय है. ४२२ थिंक टैंक का अध्ययन कोई आसान काम नहीं है. तभी तो विचारधारा से हटकर शैबाल गुप्ता , जनक पाण्डे, अबू सालेह शरीफ जैसे लोग इसके संगोष्ठी में आये।

पन्दहावी लोक सभा के सामाजिक आधार पर इसकी पुस्तक छपने जा रही है तो राज्य सभा में १२ नामांकित सदस्यों की भूमिका और उसकी प्रासंगिकता, मनोनयन के मापदंडो पर शोध कार्य इसके द्वारा किया जा रहा है.

शत्रु संपत्ति अधिनियम में संशोधन के खिलाफ इसके शोधपूर्ण दस्तावेज ने गृह मंत्रालय के स्‍थायी समिति को प्रभावित किया तो कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय को इसके निदेशक राकेश सिन्हा द्वारा समान अवसर आयोग पर लिखित पुस्तक ने झकझोरा. इसका समाचार राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित हुआ है. क्या इस उपलब्धि को असाधारण नहीं माने ?

जनगणना के ऊपर इसका महत्वपूर्ण कार्य हुआ. जब बाबा रामदेव पर घटक हमला हुआ तो इसने जो पुस्तिका निकाली उसे पढ़कर प्रतिष्ठान की चेतना के स्‍तर को समझा जा सकता है.

सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक २०११ पर राकेश सिन्हा के हस्तक्षेप पत्र पर जनसत्ता एवं अन्य अखबारों में समाचार आया कि गृह मंत्रालय ने इसके द्वारा उठाए गए objections को गंभीरता से लिया है. इसी विषय पर प्रतिष्ठान ने राष्ट्रीय एकता परिषद् की बहस और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के निहितार्थ का तुलनात्मक अध्ययन के साथ साथ राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के सदस्यों के बारे में जानकारियों को प्रकाशित किया है.

तीन वर्षो में इस संस्था ने जो काम किया वह इसके वेबसाइट पर उपलब्ध है और इसी कार्य ने इसे बौद्धिक जगत में मान्यता दी है. यह सब मैंने प्रतिष्ठान के बारे में इसलिए लिखा है जो बहस कर रहे हैं वे कम से कम थोड़ी जानकारी जरूर रखे. अनर्गल लिखना या काल्पनिक बातें करना या आलोचना करना आसन होता है, ठोस हस्तक्षेप करना कठिन होता है. इसी प्रतिष्ठान ने रंगनाथ मिश्र आयोग के सदस्य सचिव आशा दास को बुलाकर उनसे वे बाते कहवायी, जिससे आयोग कठघरे में खड़ा हो गया. वैचारिक बहस करने के लिए सिन्हा जी ने जो सतर्कता बरती और वैचारिक प्रश्नों को आगे बढाया, इसी ने हमारे जैसे लोगो को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया.

(लेखक ने जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय से उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त की है)

Leave a Reply

4 Comments on "वैचारिक बहस से परहेज क्यों / अनुरोध पासवान"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
Jeet Bhargava
Guest

इस कलम को नमन. बेहद ही निष्पक्ष विश्लेषण. काश ऐसे विद्वान बार-बार प्रकाशित हो.

Rajeev sinha
Guest

अनुरोध पासवान जी को द्केहने और उनके बारे में जानने की बड़ी इच्क्छा हो रही कृपया संपादक महोदय उनका परिचय कमेन्ट में डालें |

डॉ. मधुसूदन
Guest

बहुत बहुत धन्यवाद. ऐसी ही हमारी परंपरा है| जिस और सच्चाई हो, उधर ही पलड़ा झुकना चाहिए|
मैं पुष्टि करता हूँ, राजीव सिन्हा जी की|
मेरा अनुरोध: ==> अनुरोध पासवान का परिचय और छाया चित्र, दीजिए|<===

||वादे वादे जायते सत्यबोधः||
पर संवाद होना चाहिए, सच्चाई ढूँढने के लिए| पुरखे हमारे, संवाद करते थे| हम भी संवाद करें|

किसीका हीनता बोध, तमस, शत्रुता, जगाने वाला विधान ना करें| अपना मत बन पाए तब तक तटस्थ पैतरे से प्रस्थापित करें| और हिंदी और देवनागरी में लिखने का प्रयास करें|
धन्यवाद पासवान जी|

Rajeev sinha
Guest

ये अनुरोध पासवान कौन है ? इनका परिचय और फोटो दीजिए | बहुत बह्डिया लिखा है इन्होने |

wpDiscuz