लेखक परिचय

डॉ. मुनीश रायजादा

डॉ. मुनीश रायजादा

लेखक शिकागो स्थित शिशुरोग विशेषज्ञ हैं और एक सामाजिक-राजनीति विश्लेषक हैं।

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christmasडॉ. मुनीश रायजादा

तो आखिरकार सांता क्लाज़ के आगमन का दिन नजदीक आ ही गया है। सांता ने अपने सारे उपहार अपने साथ रख लिये हैं, व वह अपनी स्लेज़ गाड़ी (बर्फ़ में चलने वाली गाड़ी जिसे रेन्डियर खींचता है) में बैठकर विश्व भर में खुशी व उल्लास बांटने निकल पड़े है। यह दिन है 25 दिसम्बर का दिन, जिसे आधे से अधिक विश्व जीसस क्राइस्ट के जन्म दिवस के रूप में पूरे हर्षोउल्लास से मनायेगा।

अमेरिका में क्रिसमस पर्व के उत्साह व उल्लास की तुलना भारत के दीपावली त्योहार से की जा सकती है। दीपावली के पर्व की शुरूआत एक तरह से नवरात्रि स्थापना के साथ ही हो जाती है, व दशहरे के बाद यह उल्लास अपने चरम पर पहुंच जाता है। दीपावली पर लोगों का भारी मात्रा में खरीददारी करना, व सभी मुख्य ब्रांडो द्वारा अपनें ग्राहकों को डिस्काउंट (छूट) देना एक प्रकार की परंपरा बन गयी है। बड़ी मात्रा में बिक्री व भारी डिस्काउंट के कारण दीपावली की खरीददारी उपभोक्ताओं व बाज़ार, दोनों के लिये ही फ़ायदे का सौदा है। अमेरिका में क्रिसमस के पर्व के दौरान आपको कुछ कुछ इसी प्रकार का माहौल देखने को मिलेगा। छुट्टी के इस मौसम की उल्टी गिनती होलोवीन के समय से शुरू हो जाती है व थैंक्सगिविंग डे आते आते अपने चरम पर पहुंच जाती है। लोग अपनी खरीददारी की लिस्ट तैयार रखते हैं व क्रिसमस आने का इंतजार करतें हैं। दिसम्बर का महीना अमेरिका में बसे यहूदी समुदाय के लिये भी उत्सव का महीना रहता है। अमेरिका की कुल जनसंख्या का 2.6% हिस्सा बनाने वाला यहूदी समुदाय इस समय अपना अपना 8 दिवसीय पारंपरिक ‘हनुका’ उत्सव मनाता हैं। रोशनी के पर्व के रूप में जाने जाने वाले इस त्योहार पर ये लोग लाटका से बना स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं, व चार-कोणीय ड्रिडेल वाले खेल का आनंद लेते हैं।

सांताक्लाज की कहानियां शायद दुनिया की सबसे अधिक कही सुनी जाने वाली लोककथाओं में शुमार हैं। एक लम्बी सफ़ेद दाढी वाला हंसमुख व बूढा आदमी, जो लाल कोट व पैंट पहने आता है, व ‘हो हो’ की आवाज निकालता है, सांता क्लाज की यही पहचान है। लोककथाओं के अनुसार उत्तरी ध्रुव का निवासी सांता क्रिसमस की पूर्वसंध्या पर दुनियां भर के अच्छे बच्चों के लिये उपहार लाता है। कुछ पाश्चात्य लेखकों ने इससे भी आगे बढते हुए सांता की पत्नी मिसेज क्लाज का किरदार भी गढ दिया है। सांता पर लिखी गयी कई कविताओं के अनुसार यह घर की चिमनी के माध्यम से घरों मे प्रवेश करता है, व क्रिसमस ट्री के नीचे उपहार छोड़ जाता है। अत: क्रिसमस के अवसर पर अभिभावक अपने बच्चों के चेहरे पर खुशी देखनें के लिये देवदार के पेड़ को लाइटों व कैंडी केन से क्रिसमस ट्री के रूप में सजाते हैं व घर के अन्दर रख देते हैं।

दिवाली के विपरीत, अमेरिका में क्रिसमस के ठीक पहले का दिन लोगों के लिये सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। अमेरिका में नौकरीपेशा लोग क्रिसमस की पूर्वसंध्या पर अवकाश का शिद्धत से इंतजार करते हैं। क्रिसमस एक दिन का पर्व नहीं है, इसे 25 दिसम्बर से लेकर 5-6 जनवरी तक पूरे 12 दिनों तक मनाया जाता है। इस पूरे समय को ‘क्रिसमस-टाईड’ (क्रिसमस का मौसम) के नाम से जाना जाता है। इस अवधि में परिवार के सभी लोग एक जगह एकत्र होते हैं, व हंसी ठिठोली करते हैं। पारंपरिक क्रिसमस का उत्सव आसमान से हो रही बर्फ़बारी व घरों के बाहर इस बर्फ़ से बने हिममानव (स्नोमैन) के बिना अधूरा है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह हिमपात क्रिसमस के उत्सव में चार चांद लगा देता है।

भारत की बात करें तो यहां एक आम धारणा है कि ‘दीवाली का पर्व मात्र उपभोक्ताओं के लिये होता है, दुकानदारों को तो इस दिन अपनी दुकानें खोलनी होती हैं, व ग्राहकों की सेवा करनी होती हैं।‘ क्रिसमस के मामले में ऐसा नहीं है। लोग खरीदी का काम क्रिसमस की पूर्वसंध्या पर ही निपटा लेते हैं, व क्रिसमस के दिन सभी दुकानें बंद रहती हैं। क्रिसमस पूरे विश्व में मनाया जानें वाला उत्सव हैI भारत के बाहर विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय की वृद्धि से दीपवाली भी एक वैश्विक पहचान बनाती जा रही है। अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रभाव व सम्मान में उस वक्त अचानक बढोतरी हुई थी जब सन 2003 में पहली बार तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश नें व्हाइट हाउस में दिवाली मनानें का निर्णय लिया था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है व और अधिक मजबूत हुई है, पिछले कुछ वर्षों से ओबामा इसे निभा रहें है।

क्रिसमस से एक लम्बी छुट्टियों का दौर शुरू होता है, साथ ही इसमें आने वाले नववर्ष समारोह का खुशनुमा एहसास भी छुपा होता है। जो लोग इसाईयत के अलावा अन्य धर्मों अथवा आस्थाओं को मानतें है, उनके लिये भी छुट्टियों के मौसम की शुरूआत इस उत्सव में शामिल होनें का कारण बन जाता है। अमेरिका में लोग इसी कारण से ‘मैरी क्रिसमस’ की जगह अभिवादन के लिये ‘हैप्पी होलीडे’ का प्रयोग कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि इस महान सभ्यता वाले देश ने किस प्रकार विभिन्न धर्म व संस्कृतियों के लोगों को उदारतापूर्वक अपने में समाहित कर लिया है।

तो अब जब यह सफ़ेद दाढी वाला बूढा आदमी अपनी स्लेज़ गाड़ी पर सवार होकर विश्व भ्रमण के लिये निकलने की तैयारी में है, आप भी तैयार हो जाइएI अपना क्रिसमस कैरोल पुन: दोहरा लीजिये, घरों की चिमनियां साफ़ कर लीजिये और दिल थाम कर ‘हो हो’ की आवाज़ का इन्तज़ार कीजिये।

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