लेखक परिचय

परमजीत कौर कलेर

परमजीत कौर कलेर

मैं प्रोडूयसर के तौर पर 4 रीयल न्यूज में काम कर रही हूं । फीचर लिखती हूं । प्रसार भारती दिल्ली के वूमेन सैक्शन के लिए भी लिखती हूं ।आकाशवाणी पटियाला में रिकार्ड हुए प्रोग्राम वेहड़ा शगना दा, तीआं तीज दीआं विभिन्न विषयों पर फीचर लिख सकती हूं। लिखने का है शौक पंजाब के मैगजीन समुदरों पार , चढ़दीकला पटियाला, पटियाला भास्कर, माईल स्टोन मैगजीन में प्रकाशित हुए हैं फीचर

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women day

परमजीत कौर कलेर

बेटी ,बहन, प्रेमिका, पत्नी मां न जाने कितने ही किरदार निभाती है नारी …कभी नन्ही सी होती है बेटी… तो कभी प्यारी बहना ..कभी प्रेमिका तो कभी पत्नी ,मां का हर फर्ज निभाती नारी ..वाह री नारी तेरे अनेक रूपों पर जाऊं बलिहारी…जी हां एक नारी के कई रूप है…न जाने कितने ही नामों से याद किया जाता है नारी को… यही नहीं राजे महाराजे और संत महात्मा भी इसी की कोख से जन्म लेते है…मगर आज औरत को वो सम्मान नहीं मिल रहा जिसकी वो हकदार है… वो बेटी , बहन , पत्नी ,मां , प्रेमिका का हर फर्ज बड़े ही बाखूबी निभाती है …मगर आज हालात ये हैं कि वो आज न तो वो घर की चारदीवारी और न ही घर के बाहर सुरक्षित हैं……. आज औरत का घर से निकलना ही दुषवार हो चुका है … एक खौफ , भय बैठ गया है उसके मन में …अगर बात करें देश की राजधानी दिल्ली की तो 16 दिसम्बर 2012 को हुई दामिनी के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने सारे देश को शर्मसार तो किया ही है…साथ ही आज भी कोई इस घटना को याद करता है तो सिहर उठता है…रूह कंपकपा उठती है और रोंगटे खड़े हो जाते हैं…नशे में धुत वहंशी दंरिदों ने बारी बारी से न सिर्फ उसे अपनी हवस का शिकार ही बनाया…इससे भी इन दरिंदो का मन नहीं भरा और लड़की और उसके साथी को चलती बस से पुल के नीचे फेंक दिया… और उसके बाद उसे बस से भी कुचला गया …चलती बस में हुई इस घटना ने सारे देश को झकझोर कर रख दिया … इससे साबित होता है कि आज औरत मर्द के साथ भी सुरक्षित नहीं है…

आज हालात ये हैं कि कोई भी महिलाओं या लड़कियों में एक अनजाना सा खौफ बैठ गया है और ये खौफ है भी सच…आज बेटियां सुरक्षित नहीं हैं….मानो वहंशी भेड़िए हर गली , कूचे में घात लगाए बैठे हो..आज कोई भी महिला सुरक्षित नहीं है… फिर चाहे वो कोई कामकाजी महिला हो… जो अपने दफ्तर से शाम को अपने घर लौटती हो… फिर चाहे वो सुबह पांच बजे उठकर किसी बस में जाती हो …एक अनजाना सा भय उसे सताने लगा है…सुबह छ बजे भी अगर वो अपने घर से बाहर निकलती है तो उसे पल – पल वहंशी भेडिओं का भय तो सताता ही है…अगर किसी बस या कार ने अचानक से उसके पास आकर ब्रेक ही क्यों न लगाई हो …वो डर जाती है ठिठक जाती है …यही नहीं बस से चढ़ने से पहले भी देखा जाता और सोचा जाता है कई बार …

बेशक हर क्षेत्र में छाई है नारी

घर की चारदीवारी भी नहीं आई आढे़

हर जिम्मेदारी को निभाया बाखूबी

तेरे जज्बे और जुनून से जाऊ बारी

तभी तो बन गई देश की आन शान और बान नारी

हर कोई तुझ पर जाए बलिहारी

पर तू डर न नारी

बन निर्भय और हौसले वाली

 

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