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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-यति नरसिंहानन्द सरस्वती-   azam khan
उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां ने मदरसों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों के सम्मेलन में मुस्लिमों को एक बार फिर भड़काते हुए कहा कि हम देश की आबादी का पांचवां हिस्सा हैं, उन्होंने मदरसा संचालकों से कहा कि हम दुश्मन (गैर मुसलमान यानि काफिर) का मुकाबला तालीम की धार से कर सकते हैं। उन्होंने मुसलमानों को आगाह किया कि यदि वे टुकड़ों में बंटे तो ‘हत्यारा’ नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन जाएंगे। वह आगे कहते हैं यदि एक बार दिल्ली का खजाना हाथ लग जाए तो उत्तर प्रदेश में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रह जाएगी, सपा सरकार ने ही मुस्लिमों को सबसे ज्यादा दिया है। हमारी हुकूमत आतंकवाद के आरोपों में बंद मुस्लिम युवकों पर से मुकदमे वापस लेना चाहती थी, लेकिन मीडिया ने ऐसा माहौल बना दिया कि हमें भी अपने कदम पीछे खींचने पड़े। कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक जो देश के संघीय ढांचे को तोड़ने वाला तथा देश में एक धर्म विशेष की कट्टर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला हिन्दू विरोधी बिल है के बारे बोलते हुए आजम खां ने मुसलमानों को कहा कि यदि मुलायम सिंह को आप प्रधानमंत्री बनाते हो तो वह इस बिल को तुरंत लागू कर देगें।
यदि प्रदेश का एक वरिष्ठ मंत्री इस प्रकार से एक आम सभा में मुसलमानों को भडकाने वाला भाषण देता है तो उससे उसकी घोर जिहादी मानसिकता का पता चलता है। आजम खां पहले भी कई बार हिन्दुओं के विरुद्ध मुसलमानों को भड़का चुके है। फरवरी 2012 में प्रदेश चुनाव के समय उन्होंने एक चुनावी सभा में मुसलमानों से कहा था ‘‘याद करो सपा का पिछला कार्यकाल जब खाकी वर्दी (पुलिस) वाले दाढ़ी वाले (मुसलमान) पर हाथ धरने से डरते थे।’’ यह वही आजम खां है जिसने एक बार भारत माता को डायन कहा था। ऐसे लोग धर्मनिरपेक्षता का तो ढि़ढोरा पीटते है परन्तु वास्तविकता में कट्टर मुस्लिम साम्प्रदायिकता को ही बढ़ावा देते है। साम्प्रदायिकता से लड़ने वाले मुलायम सिंह को क्या अपने मंत्री की साम्प्रदायिकता नहीं दिखाई देती? इस प्रकार की साम्प्रदायिक सोच का नतीजा है कि पिछले डेढ़ वर्ष में जबसे उत्तर प्रदेश में सपा सरकार का गठन हुआ है, अब तक 100 से ज्यादा साम्प्रदायिक दंगे हो चुके हैं। परन्तु इन दंगों में किसी दंगा भड़काने वाले असली अपराधी यानि मुस्लिम समाज के किसी दोषी को सजा नहीं हुई बल्कि उल्टे दंगा पीडि़त हिन्दू को ही दोषी बनाकर जेल में डाल दिया गया।
आज प्रदेश में धर्मनिरपेक्षता पूरी तरह खंडित हो चुकी है, उसका स्थान एक धर्म विशेष की कट्टर साम्प्रदायिकता ने ले लिया है। जिसके कारण प्रदेश में हिन्दुओं का जीना दूभर हो रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार लगातार हिन्दुओं के अधिकारों को कुचलते हुए अनावश्यक रुप से मुस्लिमो पर प्रदेश का खजाना लुटा रही है। प्रदेश सरकार हिन्दुओं के साथ दोयम दर्ज के नागरिकों जैसा व्यवहार कर रही है। प्रदेश सरकार की मुस्लिम परस्त नीतियों के कारण हिन्दू समाज असुरक्षित व तिरष्कृत होते हुए जीने को विवश है।

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