लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

Posted On by &filed under लेख.


शादाब जफर ”शादाब”

एक बहुत पुराना और बहुत ही मशहूर है शेर ”ना खुदा ही मिला ना विसाल-ए-सनम,ना इधर के रहे न उधर के रहे। आज ये शेर बाबा रामदेव के जीवन पर कितना सटीक बैठ रहा है। स्वदेशी के मुद्दे को लेकर चले बाबा रामदेव ने गंगा, काले धन और फिर भ्रष्टाचार पर जिस प्रकार आन्दोलन चलाने का ढोंग कर देश की जनता और अपने भक्तो को गुमराह किया उस का नतीजा ये है कि आज बाबा की अपनी, पंतजलि पीठ और योगी बालकृष्ण की छवि पूरे देश में धूमिल हो गर्इ है। केवल सत्रह साल में 1177 करोड रूपये का एक बडा साम्राज्य खडा करने वाला एक बाबा सरकार से आखिर किस मुह से काले धन और भ्रष्टचार का सवाल कर सकता है। जिस प्रकार आज बाबा और आचार्य बालकृष्ण उल्टे लपेटे में आये है ये कह सकते है कि ”जिन के घर शीशे के होते है वो दूसरो पर पत्थर नही फेका करते। आचार्य बाल कृष्ण का पासपोर्ट, स्कूल की मार्कशीट डिगि्रया और यहा तक कि उन का अपना नाम भी फर्जी है। वही बाबा पर प्रर्वतन निर्देषालय को बाबा द्वारा स्थापित पतंजलि पीठ के रिकार्ड खगालने के बाद ये जानकारी हासिल हुर्इ है कि बाबा ने हिन्दुस्तान से तीन लाख डालर विदेश भेजे थे। इस के आलावा र्इडी ने बि्रटेन के अधिकारियो से भी सम्पर्क किया है। इन अधिकारियो से स्कार्टलैण्ड के एक द्वीप से जुडी जानकारी मांगी गर्इ है। जो योग गुरू रामदेव के अनुसार उन्हे उपहार में मिला है। वास्तव में बाबा रामदेव से जुडी ये बाते एकदम चौकाने वाली है आष्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरी घटना ने केवल बाबा रामदेव को ही नही बलिक देश के सभी संत-महात्माओ को शंका के दायरे में लाकर खडा कर दिया। यदि प्रर्वतन निर्देषालय का शंका और जाच सही सही हो गर्इ तो बाबा अपने इस पाप का प्रायश्रित किस प्रकार करेगे कहा नही जा सकता। सचमुच बाबा योग की आड में अतिमहत्वाकांषा के जाल में फंसते चले गये। में यहा ये बात सोच रहा हू कि अगर बाबा खुद भ्रष्टचार में गले गले तक डूबे थे तो फिर उन्होने विदेशों में जमा भारतीय लोगो के काले धन का मुद्दा क्यो उठाया। बाबा रामदेव ने शायद प्रधानमंत्री बनने का खवाब देख लिया था पर इस ख्वाब के चक्कर में वो अपनी योग गुरू की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगा बैठे।

दूसरा सब से बडा सवाल ये उठता है कि इस बात को अगर दूसरी निगाह से देखा जाये तो यू भी कह सकते है कि कुछ सियासी लोगो ने बाबा के करीब पहुच कर उन की सारी कमजोरिया जानकर उन्हे देश की जनता के सामने इस प्रकार लाकर खडा कर दिया कि आज बाबा रामदेव न तो संत ही रह गये और न लीडर बन पायें। बाबा का अन्जाम वो ही हुआ जो इन सियासी लोगो ने सोचा था। कांग्रेस की भ्रष्ट यूपीए और दिल्ली सरकार ने चाणक्य नीति साम, दाम, दण्ड, भेद अपनाते हुए बाबा रामदेव को रामलीला मैदान में भेद ही दिया होता यदि समय रहते बाबा रामदेव मंच से कूदकर न भागते। बाबा रामदेव ने जिस जोश के साथ भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में आन्दोलन शुरू किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ तैयार किये गये अनशन स्थल के पंडाल को पूरी तरह एक फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाए प्रदान की गर्इ थी। मिसाल के तौर पर पंडाल में सैकडो एसी लगाये गये थें। अनशनकारियो के बैठने के लिये गद्दे डाले गये थे, बाबा ने अपने लिये खुद वातानुकूलित स्टेज बनावाया था। पंडाल में स्टेज तक पहुचने के लिये बीच में एक गाडी के गुजरने की जगह छोडी गर्इ थी। आन्दोलन शुरू करने के पहले उनकी सोच क्या थी ? क्या वो इस आन्दोलन की आड़ में किसी राजनीतिक दल की घोशणा करना चाहते थे। क्यो की तमाम मांगो के बीच सरकार से बाबा की एक मांग और थी जो काफी चौकाने वाली है बाबा चाहते थे कि देश में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जायें। इस से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबा अनशन के बहाने जनता कि नब्ज टटोलकर देखना चाहते थे कि क्या उन्हे राजनीति में आना चाहिये या नही। जिस कारण बाबा का ये आन्दोलन पूरी तरह से सियासी हो गया और अन्दरखाने आरएसएस और उस के सहयोगी दलो ने जिस प्रकार बाबा की हा मैं हा मिलार्इ लोगो को लगने लगा कि बाबा भाजपा और आरएसएस के इशारो पर नाच रहे है। जब कि बाबा के इस अनशन से न तो भाजपा को कोर्इ फायदा हुआ और न ही आरएसएस को उल्टे बाबा खुद ही पूरी तरह से राजनीति का शिकार हो गये। और अन्त में बाबा के काम बाबा ही आये। श्री श्री रवि शंकार और मुरारी बापू ने बाबा को अगर समय रहते अनशन न तुडवाया होता तो बाबा आज कहा होते भगवान ही जाने।

बाबा पर खार खार्इ केंन्द्र सरकार इस वक्त बाबा पर पूरा शिकजा कसना चाहती है। वित्त मंत्रालय को बाबा के खिलाफ शिकायत की आड़ लेकर सरकार द्वारा बाबा के खिलाफ कर्इ प्रकार की जाच शुरू की जा चुकी है। इस वक्त र्इडी और सरकार के निषाने पर बाबा की दिव्य फार्मोसी है। जो सालाना करोडो रूपये की आयुर्वेदिक दवार्इया विदेशो को निर्यात करती है। बाबा पर सरकार ये आरोप लगा रही है कि दिव्य फार्मेसी द्वारा विदेशों में निर्यात की गर्इ दवाओ की कीमत जानबूझ कर काफी अधिक दिखार्इ जाती है। जिस की आड़ में बाबा विदेश में जमा अपने काले धन को वापस सफेद कर लेते है। र्इडी अब तक दिव्य फार्मेसी द्वारा विदेशो में भेजी दवाओ का विस्तृत ब्योरा और आय की जानकारी भी बाबा से मांगने की तैयारी कर रही है। यही नही र्इडी बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ द्वारा कितने शिविर विदेशों में लगाये गये व इन से कितनी आमदनी हुर्इ इस भी जाच करने में जुट गर्इ है।

उधर राखी सावंत ने बाबा से शादी का प्रस्ताव रख एक नया मुद्दा छेड दिया है। राखी सावंत ने ये धमकी तक दे डाली है कि अगर बाबा रामदेव ने उन की शादी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो वो इस मुद्दे पर अनशन भी कर सकती है। राखी सावंत का कहना है कि बाबा ने पिछले दिनो एक टीवी शो में आर्इटम गल्र्स के बारे में एक अपमानजनक वक्तव्य दिया था। वो बाबा की पत्नी बन कर ये साबित कर देगी की आर्इटम गल्र्स होते हुए भी वो पति की सेवा करने वाली एक आदर्श पत्नी हो सकती है। अब देखना ये है कि ऊठ किस करवट बैठता है। बाबा राखी के स्वामी बनते है या नही ये तो बक्त बतायेगा पर राखी को उन का इस तरह का आचरण हमेषा सुर्खियो में जरूर रखता है जिस से उन्हे नाम भी मिलता है और दाम भी।

 

Leave a Reply

32 Comments on "बाबा रामदेव न संत बन पाये न लीडर"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
pawan
Guest
बाबा ने इस बटे हुये देश मे हिंदू और मुस्लिम को एक करने का सफल प्रयास किया है , पुरानी बातो को छोड़कर नई सुरुआत की , सभी को एक मंच पर ला दिया ,यह बात कांग्रेसियो को नही पची ,क्योकि अँग्रेज़ की जो औलाद ठहरी, फुट डालो और राज करो की नीति को अपनाते है ये कलंकी, भारत का दुर्भाग्य है येसे पापीयो का समूल अंत नही हो रहा है ,इनके जैसी गंदी नीति अपनाना पड़ेगा. 121 करोड़ भारतीयो की हाए इन कांग्रेसियो को लगी है इसलिय अब इनका पागलपन चालू हो गया है मतलब अंत नज़दीक है. बाबा… Read more »
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
Guest
—–‘‘श्री कौशलेन्द्र जी यदि आपकी आत्मा जिन्दा हो तो अपनी अंतरात्मा से पूछिए कि आप कितने न्याय प्रिय हैं?’’—— श्री कौशलेन्द्र जी आपकी अनेक टिप्पणियों को पढने के बाद लगता है कि………आप भारत के जिम्मेदार नागरिक हैं| हालांकि पहले-पहले मुझे कुछ और लोगों के बारे में भी प्रवक्ता पर यही लगता था, लेकिन बाद में पता लगा कि उनके मुखौटों की अनगिनत संख्या है| इस सबके उपरान्त भी आपकी एक पक्षीय और पूर्वाग्रही टिप्पणी दि. २०.०८.११ को पढकर मैं लिखने को विवश हूँ कि-‘‘यदि आपकी आत्मा जिन्दा हो तो अपनी अंतरात्मा से पूछिए कि आप कितने न्याय प्रिय हैं?’’ १-क्या… Read more »
अजित भोसले
Guest

लेखक का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, इन्हें आइन्दा से ना पढ़े इनका लिखा हुआ जहां भी देखे नज़रें फेर ले जैसा की आप लोग “मीणा” और “श्रीराम तिवारी” को देख कर करते हैं,यकीन करिए मैंने इस लेख को सरसरी निगाह से भी नहीं देखा है विद्वान् भाइयों की टिप्पणियाँ देखकर ही समझ गया था की मजमून क्या है,

इंसान
Guest
संजीव कुमार सिन्हा जी और डा: पुरुषोतम मीणा “निरंकुश” जी के बीच स्वस्थ “बहस” और “चर्चा” पर मत भेद में इन पन्नों से मेरी निम्नलिखित टिप्पणी लुप्त हो गई है| मैंने अपनी टिप्पणी catche में देखी है तो सोचता हूं कि अवश्य ही इसे पाठकों से छुपाने का कोई कारण होगा| देश की हालत देखते हुए मैं भारत में अब दो ही पक्ष देखता हूं, कांग्रेस के विरोधी और कांग्रेस के सहयोगी जो तदनुसार राष्ट्रवादी और राष्ट्रद्रोही होने के प्रतीक हैं| जब राष्ट्रवादी पक्ष अंगद के पग के समान अपनी धुन में दृढ है तो राष्ट्रद्रोही पक्ष तरह तरह के… Read more »
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
Guest

मेरी टिप्पणी के पैरा ४ में लिंक छूट गया जो नीचे प्रस्तुत है :-
http://baasvoice.blogspot.com/2011/08/11.html

wpDiscuz