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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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राष्‍ट्रवादी चिंतक व भाजपा के पूर्व राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष श्री बलवंत परशुराम आपटे (बाळ आपटे) का आज मुंबई में निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। मूलत: महाराष्‍ट्र के रहने वाले आपटे जी का जन्‍म 18 जनवरी 1939 को हुआ था।

भाजपा की सर्वोच्‍च समिति 12 सदस्‍यीय पार्टी संसदीय दल के सदस्‍य आपटे जी 2000 से लेकर 2012 तक दो बार राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे। वे आपातकाल के दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष थे। आपातकाल का विरोध करने को लेकर उनकी गिरफ्तारी हुई। मीसा के तहत दो वर्ष  (दिसम्‍बर 1975 से फरवरी 1977) तक जेल में रहे। महाराष्‍ट्र के अतिरिक्‍त एडवोकेट जेनरल रह चुके आपटे जी कानून के प्रोफेसर भी रहे थे।

उनके निधन से देश ने एक सैद्धांतिक राजनेता खो दिया। संघ परिवार ने एक मजबूत आधारस्‍तंभ खोया। राजनीतिक कीचड़ में उन्‍होंने सदैव कमलवत् जीवन जीया।

मूल्‍य आधारित जीवन जीने वाले ऐसे प्रेरक व्‍यक्तित्‍व को प्रवक्‍ता डॉट कॉम की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

ऐसे थे बाळ आपटे 

आरटीआई एक्टिविस्‍ट हर कुछ महीनों बाद यह जानने के लिए आवेदन करते हैं कि नई दिल्‍ली के कितने भवनों पर अवैध कब्‍जा है, कितने सांसदों ने अपने आवास पर चुनाव हारने के बाद भी कब्‍जा कर रखा है, अथवा कितने सांसदों पर कितनी देनदारी बकाया है। संसद से कार्यकाल पूरा होने के बाद आवास खाली करने के लिए सांसदों को एक माह का समय दिया जाता है लेकिन अधिकांश सांसद लम्‍बे समय तक उस पर कब्‍जा किए रहते हैं। 

इनमें ही अपवाद के रूप में उदाहरण है राज्‍यसभा सांसद श्री बलवंत परशुराम आपटे (बाळ आपटे) का जिनका कार्यकाल गत 2 अप्रैल को पूरा हुआ था। 3 अप्रैल को उनके कुछ इष्‍ट-मित्रों ने उनके सम्‍मान में शुभेच्‍छा कार्यक्रम आयोजित किया। 4 अप्रैल को वे सरकारी आवास खाली कर अपने सभी देय निपटा कर अपने गृहनगर मुंबई के लिए रवाना हो गए। 

कबीर की पंक्ति स्‍मरण आती है : दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्‍यों की त्‍यों धर दीन्‍ही चदरिया। 

-आशुतोष, संपादक, राष्‍ट्रीय छात्रशक्ति

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2 Comments on "भाजपा नेता बाळ आपटे नहीं रहे"

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dr dhanakar thakur
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मेरा बल अप्तेजी से परिचय और एकाध पत्र व्यवहार १९७७-७८ के बीच नेशनल मेदिकोस आर्गेनैजेसन के विषय में हुआ था वे एक शालीन व्यक्ति थे अच्छा बोलते थे वैसे उनके राज्नीतिमे जाने को मैंने अच्छा नहीं समझा उससे एक गलत सन्देश गया की विद्यार्थी परिषद् जनसंघ वा BHAJPAA में जाने kaa सहज माध्यम है

संजय बेंगाणी
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ऐसे लोगों के बल पर ही भारत है. श्रद्धांजलि.

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