लेखक परिचय

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्‍म। बचपन से ही राष्ट्रहित से जुड़े क्रियाकलापों में सक्रिय भागेदारी। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और देश के वर्तमान राजनीतिक तथा सामाजिक हालात पर लेखन। वर्तमान में पैनासोनिक ग्रुप में कार्यरत। सम्पर्क: mukesh.cmishra@rediffmail.com http://www.facebook.com/mukesh.cm

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हमारे देश मे प्राचीन काल से ही शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाई ना करने या दिया हुआ कार्य पूरा ना करने पर सजा देने का प्रावधान था, पर आज देश मे कुकुरमुत्ते की तरह उग आए NGO, मानवाधिकार संगठन और कथित समाजसेवी संस्थाएं हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति को ध्वस्त करने पर आमादा हैं, जिसके तहत आज अगर किसी शिक्षक ने किसी बच्चे को पढ़ाई के दौरान उद्दंडता, अनुसाशनहीनता या पढ़ाई ना करने पर किसी भी तरह की सजा दी तो ये संस्थाएं उस शिक्षक पर भारतीय दंड संहिता के तहत केस कर दंडित करने के लिए हो हल्ला मचाती है, तथा हमारा बिकाऊ मीडिया इसमे उनको भरपूर सहयोग देता है।  जिसके तहत अभी तक बहुत से शिक्षक ऐसी कार्यवाहियों का शिकार भी हुये हैं, तथा इन सबसे से दुखी होकर अब ज़्यादातर शिक्षक बच्चों को उनकी मनमर्जी पर छोड़ देते हैं, क्योंकि कौन चाहेगा की वो किसी दूसरे के बच्चे के लिए अपना खुद का जीवन बर्बाद करे? वहीं आज के माता पिता भी खुद भले ही अपने बच्चे को घर मे दंडित करें पर शिक्षक के द्वारा दिये गए दंड का वो भी विरोध करते हैं, जिसका दुष्परिणाम आज के बच्चों मे देखा जा सकता है जो बचपन से ही अनुशासनहीन, पढ़ाई मे कमजोर तथा अपने से बड़ों का सम्मान नहीं करते।

हमारी प्राचीन पद्धतियों मे जो भी बाते या कार्य प्रचलित थे उन सबका अपना महत्व था पर आज अगर उसपर कोई अमल करता है तो उसे सांप्रदायिक या फिर रूढ़िवादी कहा जाता है बजाय इसके की उसपर खोज की जाय की वो ऐसा क्यों करते थे।

फिर भी राहत की बात यही है की हम जिस पाश्चात्य सभ्यता की नकल करते हैं वो खुद ना सिर्फ भारतीय सभ्यता की तरफ झुक रहे हैं बल्कि उसे विज्ञान के नजरिए से सत्यापित भी कर रहे हैं।

ऐसा ही एक वीडियो नीचे दिया गया है जिसमे कान पकड़कर उठक बैठक लगाने से मस्तिष्क विकास की पुष्टि की जा रही है, जो पश्चिमी लोगों द्वारा बनाया गया है, जाहिर है की जब हमारे देश का कोई व्यक्ति या देश मे प्रचलित कोई प्रथा पश्चिम से रिटर्न होकर आती है तो उसे बहुत आदर से देखा जाता है, हाँ अगर देश का ही कोई व्यक्ति उसकी बड़ाई करे तो वो मनुवादी, साम्प्रदायिक, रूढ़िवादी आदि ना जाने कितने संबोधनों से अलंकृत किया जाता है।

अगर किसी की बचपन मे कान खिंचाई हुयी है तो ये वीडियो जरूर देखें और अपने गुरु जी को सम्मान और श्र्द्धा भरी नजरों से मनन करें…..

http://www.youtube.com/watch?v=KSwhpF9iJSs&

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