लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

Posted On by &filed under विश्ववार्ता.


-जगदीश्वर चतुर्वेदी

भारत की यात्रा पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा आ रहे हैं, वे यहां क्यों आ रहे हे हैं, इस बात को आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत अच्छी तरह जानते हैं। यदि नहीं जानते तो उन्हें लालकृष्ण आडवाणी को बुलाकर पूछना चाहिए कि ओबामा भारत क्यों आ रहे हैं? इसके बावजूद भी पता न चले तो आज के अखबारों में ओबामा का साक्षात्कार छपा है उसे पढ़कर समझ सकते हैं कि ओबामा के भारत आने का मकसद क्या है?

राष्ट्रपति ओबामा खुलेआम कह रहे हैं वे भारत को एशिया में रणनीतिक पार्टनर बनाने आ रहे हैं। अब मोहन भागवत आप ही सोचें कि अमेरिका और भारत में कैसी पार्टनरशिप? वे एशिया में व्यापार करने लिए भारत को साझीदार बनाने नहीं आ रहे, वे एशिया में अमेरिका का रणनीतिक पार्टनर बनाने आ रहे हैं।

यानी एशिया में अमेरिका की उस्तादी में भारत ताल ठोकेगा। इसको ही राजनीतिक भाषा में कहते हैं गुलामी। यह बड़ी मीठी गुलामी है। साफ-सुथरी गुलामी है। मोहन भागवतजी आप और आपका संगठन आरएसएस देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन आपने अभी तक भारत सरकार के ओबामा प्रेम और रणनीतिक पार्टनर बनाए जाने पर प्रतिवाद का एक वाक्य नहीं कहा है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आपकी देशभक्ति और राष्ट्रवाद सोई क्यों हैं? आपकी भाषा में ही कहूँ ‘उत्तिष्ठ कौन्तेय।’

आपको इस बात पर गुस्सा आया कि कांग्रेस संघ को आतंकी संगठन घोषित करने के लिए झूठा प्रचार कर रही है और आने वाले दिनों में उसके खिलाफ संघ परिवार प्रतिवाद करने जा रहा है। लेकिन ओबामा और उनका अमेरिकी प्रशासन खुलेआम आतंकियों और अलकायदा की मदद करता रहा है। आपको नहीं लगता कि आपको विश्व के सबसे बड़े आतंकी देश अमेरिका का प्रतिवाद करना चाहिए?

मैं जहां तक आपको और आपके संगठन को जानता हूँ उसकी देशभक्ति पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाया जा सकता। आपके संगठन का देश में सबसे विशाल नेटवर्क है। आपको दूसरों की तकलीफें देखकर कष्ट भी होता है। लेकिन मेरी अभी तक यह बात समझ में नहीं आई कि आपने अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं के द्वारा ढ़ाए जा रहे जुल्मोसितम पर कुछ भी नहीं कहा है।

क्या हम पूछ सकते हैं कि आपकी आत्मा को अफगानिस्तान -इराक की निरीह जनता पर अमेरिकी सेनाओं के जुल्म देखकर कष्ट होता है या नहीं? अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक की संप्रभुता पर जिस तरह हमला किया है और इन दोनों देशों पर अवैध कब्जा किया है क्या उसके खिलाफ आवाज उठाने की आपकी कभी इच्छा नहीं करती? क्या आपको कभी फिलीस्तीनियों के आंसू परेशान नहीं करते?

आप जानते हैं वामदलों ने यथाशक्ति ओबामा का प्रतिवाद करने का फैसला किया है। यदि आपका जैसा विशाल संगठन भी ओबामा का प्रतिवाद करता तो अच्छा होता। वैसे आप जानते हैं कि मुंबई बमकांड छब्बीस इलेवन के आतंकी हिंसाचार में अमेरिकी जासूस भी सक्रिय थे उनमें से एक को उन्होंने बंद करके रखा हुआ है, वह बार-बार बता रहा है मुंबई के छब्बीस इलेवन के हमले की साजिश को आईएसआई ने अंजाम दिया था, कम से कम आप आईएसआई के खिलाफ अमेरिका सख्ती से पेश आए इस मांग को लेकर ओबामा के लिए सार्वजनिक बयान तो दे सकते हैं?

मोहन भागवतजी आप ओबामा के खिलाफ प्रतिवाद न भी करें। संभवतःआपको डर है कि आपके परिवार के संगठनों को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निगमों को द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद इससे प्रभावित हो जाएगी। इस मदद को अमेरिका स्थित आपके भक्त जुटाते रहे हैं। लेकिन आपको नहीं लगता कि आपको मिलने वाली मदद से ज्यादा कीमत अफगानिस्तान-इराक और फिलीस्तीन के करोड़ों लोगों की है। हमें विश्व मानवता की रक्षा के नाते कम से कम इन लोगों की रक्षा के लिए ओबामा के खिलाफ प्रतिवाद जरूर करना चाहिए। मैं जहां तक समझता हूँ कि भारत के हिन्दू अभी इतने संवेदनहीन नहीं हुए है कि पड़ोस में कोई जुल्म करता रहे और वे चुप रहें।

आदरणीय मोहन भागवत जी आप जानते हैं कि एक जमाने में अफगानिस्तान को अखंड भारत का हिस्सा कहते थे। कम से कम उसी नाते आप ओबामा से मांग करें कि वह अफगानिस्तान छोड़ दे। ईरान को सताना बंद कर दे। इराक से सेनाएं वापस बुला ले। इस्राइल से आपकी गहरी दोस्ती है उससे कहें कि वह फिलीस्तीनियों को उनका देश वापस कर दे। यदि और कोई बात आपको कहनी हो तो वह भी कह सकते हैं ।

लेकिन भोपाल की यूनियन कारबाइड त्रासदी के लिए जिम्मेदार एंडरसन को भारत को सौंपे जाने की मांग आपको जरूर करनी चाहिए। आप कम से कम भोपास त्रासदी के लोगों के दुख और प्रतिवाद में तो इस मोके पर शामिल हो सकते हैं। आप अपने राजनेताओं से कह सकते हैं कि वे ओबामा के भारत आगमन पर कम से कम भोपाल गैसकांड के प्रधान अपराधी एंडरसन को भारत को सौंपे जाने की मांग करें। ओबामा के आने पर आपकी चुप्पी भारत के लिए शुभलक्षण नहीं है। आपकी एक आवाज से भारत की जनता में बड़ा जागरण होता है। आप कम से कम देशभक्ति की खातिर राष्ट्रपति बराक ओबामा से कुछ तो बोलें। हमें इंतजार रहेगा।

Leave a Reply

20 Comments on "बराक ओबामा से कुछ तो बोलो आदरणीय मोहन भागवत!"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
Himwant
Guest
भाई चतुर्वेदी जी, विदेश निति कोई घोडे की चाल नही है जो एक दिशा मे बिना दाएं बाएं देखे चल्ती जाए। सोनिया की सत्ता द्वारा अपनाई गई विदेश निति ने भारत को अमेरिकी खेमे मे ला खडा किया है। भारत की मिडिया जिस प्रकार बाराक हुसैन ओबामा से चीन एवम पाकिस्तान के विरुद्ध अमेरिकी सहयोग के लिए आग्रह करती दिख रही है उसे देख मुझे हिनता-बोध हो रहा था। ईतिहास से हमे यह सिखना चाहिए की वह ब्रिटेन/अमेरिका ही है जो दक्षिण एसिया तथा हिमालय आर-पार दुश्मनी कराता आया है। भारत को यह कोशीश करनी चाहिए खुद को मजबुत करे,… Read more »
मिहिरभोज
Guest
मिहिरभोज

ये गाली गलौच के बीच बीच मैं थोङा पानी भी पी लिया करो चतुर्वेदी जी….खैर वामपंथियों की तरह इनके पास भी इतना पैसा होता तो भागबत जी ट्रैन की द्वीतिय श्रैणी की जगह चार्टर्ड प्लैन मैं यात्रा करते…..खैल आपके मुंह मैं घी शक्कर आपने संघ को देश भक्त तो माना

BAAS VOICE
Guest
मेरी राय में प्रवक्ता के संपादक के लिए ये तो व्यावहारिक नहीं होगा की किसी आलेख को प्रदर्शित करने से पहले सभी सम्बद्ध पक्षकारों का विचार भी जाना जाये, लेकिन रचनात्मक एवं समाज को जोड़ने वाले विचारों को जरूर प्राथमिकता दी जा सकती और वैमनस्यता, अंध विश्वास, समप्रदायिकता फ़ैलाने वाले, संविधान विरोधी आलेखों के प्रकाशन पर नीति तय की जा सकती है, लेकिन ऐसा होने पर पाठकों की संख्या घटने का खतरा जरूर है. प्रवक्ता पर उन्हीं आलेखों पर अधिक चर्चा होती है, जिनमें आपसी वैमनस्यता, अंध विश्वास, समप्रदायिकता फ़ैलाने वाले, संविधान विरोधी विचार हों. मुझे याद नहीं कि देश… Read more »
Ravindra Nath
Guest

Anil Sehgal – संघ को मिलने वाले विदेशी मदद के बारे मे तो हमारे सामने सिर्फ चतुर्वेदी का लेख है, पर वामपंथियों को KGB के द्वारा दिया जाने वाली मदद तो KGB के दस्तावेजों के साथ ही जग जाहिर हो गई है, और मेरा पूर्ण विश्वास है कि यह मदद अब चीन से आती है, इस पर चतुर्वेदी से प्रश्न पूछिए।

vikram kewlani
Guest

हमारा सबसे बड़ा दुश्मन इस समय चीन और पाकिस्तान हे . और दुश्मन से लड़ने के लिए किसी ताकतवर दुश्मन को दोस्त बनाना पड़ता हे , इस पर भागवत जी आपने विचार रखेंगे पर कुछ समय बाद बराक ओबामा भारत से क्या क्या समझोते हे करते इनका कुछ खुलासा होने पर ही संघ आगे की रन निति तय करेगा ऐसा लगता हे .

wpDiscuz