लेखक परिचय

आनन्द स्वरूप द्विवेदी

आनन्द स्वरूप द्विवेदी

मो. ९३०७९१२८५२ इलाहाबाद

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आनन्द स्वरूप

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्वभवथि भारतह अभ्युथानम अधर्मस्य तदात्मानम स्रिजामि अहम।

भगवान नें अपने भक्तो को दिये गये इस वचन को समय समय पर सार्थक किया है। कभी स्वयं आकर के तो कभी अपने किसी परम भक्त को भेज करके।इस कल्युग मे स्वयं तो नहीं आये पर जब भी मानवता को आवश्यकता पडी तो Martin Luther King के रूप मे तो कभी गाँधी ओर सुभाष के रूप मे आये और आज अन्ना हजारे व बाबा राम देव के रूप अपने किसी भक्त को भ्रष्टाचार रूप दैत्य के संरक्षक नेताओं से हमे मुक्त कराने के लिये भेजा है तथा ईश्वर अपने होने का प्रमाण भी लोगो को दिया है

पर सायद राम के होने का प्रमाण मागने वाली सरकार ईश्वर के इस संकेत को नही समझ पा रही है। तभी तो सरकार ने ४-५ जून कि रात को जो कुछ किया वह हमारे धर्मग्रन्थो रावण कंस और जरा संध के जो कृत्य बाता ये गये है उससे भी भयानक है। जिस तरह से सोत हुये लोगो बर्बरता पूर्ण प्रहार किया बहुत ही खेद जनक और मानवता के विरूध है।इस तरह कि कार्यवाही तो केवल तनाशाही शासन मे ही होती है। चाहे वह अंग्रेज सरकार द्वारा जलियावाला कान्ड हो या आपात काल के समय जे.पी आन्दोलन कुचलने कार्य हो या ४जून१९८९ को थ्यान अनमान चौक पर चीन सरकार ने जिस तरह से शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रो पर तोप का प्रयोग किया हो,ये सब कार्य केवल एक तानाशाही शासन के दौरान ही होता है। एक लोकतान्त्रिक देश इस तरह का कार्य नही होता है।क्योकि लोकतान्त्रिक देश होने कि पहली सर्त है जनता को बोलने का अधिकार हो तथा नेता गण जो उनके सेवक है उनकि बात को सुने तथा उसका पालन करे।लोकतन्त्र मे जनता मालिक होती है नेता उनके सेवक होते है । यह बात शायद नेताओं कि भ्रष्टाचार पोषक चांडाल चौकडि नही जानती है इसी कारण वह अपने आप को मालिक और जानता को अपना गुलाम सझती है।इसी कारण जनता कि आवाज को कभी जलिवाबाग मे तो कभी थ्यान चौक में तो कभी दिल्ली में दबा दि जाती है।पर हमार प्यारे नेतागण यह जान ले कि जब ईश्वर जन विद्रोह का रूप धारण कर लेता है तो बडॆ से बडॆ सत्ताके तंत्र ध्वस्त हो जाते है।सरकारो का पतन हो जाता है।

आज भारत कि जनता कि एक मात्र आवाज है सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करे। यह बात सरकार में बैठे और कुछ सरकार के बाहर के नेताओं को यह बात हजम नही हो रही है।क्योकि आज तक भारत कि जनता को ये लोग जाति-धर्म और सम्प्रदाय के रूप हमे बाट कर आपना उल्लू सीधा कर रहे थे ।ये लोग जाति का कार्ड खेल कर,धर्म कि आड ले कर हम लोग को आपस मे लडवाते थेऔर देश को लूट कर विदेशो मे काला धन जमा कर ते थे ।ये लोग हमारा इस तरह का ब्रेन वास करते थे कि हम लोग केवल धर्म सम्प्रदाय और जाति के बारे मे सोचते थे ।उसकि सीमा को छोड कर हम लोग और कुछ सोचते ही नही थे।पर जब बाबा राम देव और अन्ना ने हमे धर्मऔर जाति कि सीमा से बाहर निकाला तो हमारे नेताओं को यह बात खलने लगी और ये लोग बाबा और अन्ना के दुश्मन हो गये।। क्योंकि भ्रष्टाचार पोषक चांडाल चौकडि के हमारे प्रिय नेता गणो को अपना धन्धा चोपट होने का खतरा नजर आने लगा । उन्होने सरकार पर दबाव डाल कर बाबा को मारने और आन्दोलन को कुचलने के लिये पूलिसिया तान्डव ४-५ जून कि रात को किया। हमारे देश कि सरकार भ्रष्टाचार पोषक चांडाल चौकडि के के दबाव मे कार्य कर रही है।इसी कारण उस के मन्त्री लोग अन्ना और बाबा पर अनर्गल आरोप लागा रहे है।सरकार बार बार गलत बयान दे रही है और लोक पाल कानून और काला धन पर कानून को एक दम दोयम दर्जे का बान कर भ्रष्टाचार रूप दैत्य का पोषण करना चाहती है जिससे उनका हित सधे।

पर सरकार की यह टाल मटोल उसके लिये भारी पड्ने वाली हैं क्योकि भारत की १२० करोड ९९ लाख जनता जान गयी है कि सरकार किस तरह से १लाख लोगो के पोषण के लिये उसे चूस रही है। अतः सरकार को जल्द ही चेतना चाहिये वरना हो सकता है उसे सभलने का मौका भी न मिले क्योकि शायद ईश्वर ने इस अभागे देश को उबारने के लिये स्वंय जन आन्दोलन के रूप मे अवतार ले और सरकार और उसके १लाख भ्रष्टाचार पोषक कि चांडाल चौकडि को नष्ट कर दे। अन्त में इतना ही कहना हैं- सिहांसन खाली कर दो जनता आती है।

 

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