लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

Posted On by &filed under शख्सियत, समाज.


बापूराव ताजणे

बापूराव ताजणे

डा. राधेश्याम द्विवेदी
अपनी पत्नी के पैर फिसलकर पहाड़ से गिर जाने के बाद दशरथ मांझी द्वारा वर्षों की मेहनत से पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना देने की कहानी तो आपने सुनी ही होगी. मांझी की कहानी भले ही कई साल पुरानी हो लेकिन पति द्वारा अपनी पत्नी को मुश्किलों से बचाने की कहानियां इस देश में और भी हैं. ऐसा ही कुछ नागपुर में हुआ, जहां अपनी पत्नी को पानी के लिए दुत्कारे जाने के बाद पति ने एक कुआं खोद डाला. नागपुर के इस शख्स की कोशिशें भले ही दशरथ मांझी जितनी मुश्किल और बड़ी न हों लेकिन अपनी पत्नी के लिए इस शख्स का प्रेम उतना ही गहरा जरूर है. आइए जानें इस शख्स की ये हैरान कर देने वाली कहानी.पानी भरने गई पत्नी के अपमान और अपने कुएं से पानी देने से मना कर देने पर पत्नी के लिए उसने अकेले कुआं खोद डाला। बिहार के दशरथ मांझी के बारे में कौन नहीं जानता है। जिसने पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीर कर सड़क बना दी थी। लेकिन वही दूरसी तरफ महाराष्ट्र के वाशिम जिले में एक और मांझी की कहानी देखने को मिली है। ये जिला भी पानी संकट से झूझ रहा है। बापूराव ताजने और उनकी पत्नी भी इनमें शामिल हैं। ताजने की पत्नी एक दिन सवर्णों के कुएं से पानी भरने गईं तो गांव के लोगों ने उन्हें अपमानित कर भगा दिया गया और तक बापूराव ने तय किया कि वह अपनी पत्नी के लिए कुआं खोदेंगे।
अपमान सहा नहीं गया:- बापूराव ने कहा, ‘मैं कुएं के मालिक का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि मैं गांव में किसी के साथ दुश्मनी नहीं चाहता. लेकिन उन्होंने हमारा अपमान किया क्योंकि हम गरीब और दलित हैं. मार्च में उस दिन मैं घर आकर रोया. मैंने सोच लिया कि पानी के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाऊंगा. मैं मालेगांव गया और वहां से औजार लेकर आया और एक घंटे के अंदर खुदाई शुरू कर दी.’ बापूराव ने बताया कि उसने खुदाई करने से पहले ये नहीं सोचा था कि यहां पानी मिलने की संभावना है या नहीं. उसने कहा, ‘मैंने खुदाई शुरू करने से पहले भगवान से प्रार्थना की. मैं खुश हूं कि मेरी मेहनत रंग लाई है.’ बापूराव को भी ठीक दशरथ मांझी की तरह उनके परिवार वालों ने भी इसे उनकी सनक समझा और वे भी गलत नहीं थे क्योंकि एक तो वहां जमीन पथरीली है और उसपर से सूखे के कारण आसपास के तीन कुएं पहले ही सूख चुके थे। ऐसे में किसी नए कुएं में पानी मिलना दूर की कौड़ी थी। मगर बापूराव ने हार नहीं मानी।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिम जिले के कालामबेश्वर गांव के गरीब श्रमिक बापूराव ताजणे दलित समुदाय के हैं. ऊंची जाति के लोगों ने उनकी पत्नी को अपने कुएं से पानी देने से मना कर दिया. बस फिर क्या था, पत्नी और दलितों के अपमान से तिलमिलाए बापूराव जुट गए उस काम को करने में जिसे लोग असंभव मानते थे. वाशिम के बापूराव तजने ने पानी निकालने के लिए रोजाना 6 घंटे खुदाई की। उसकी जिद थी, कि जब तक पानी नहीं निकाल लेता, खुदाई करता रहूंगा। इसके लिए घरवालों की भी मदद नहीं ली। बस एक उम्मीद थी कि एक दिन पानी जरूर निकलेगा। उसने ठाना कि प्यास बुझाने के लिए कोई बेइज्जत नहीं होगा। तो वही गांववालों ने कई बार बापूराव का मजाक उड़ाया, लेकिन वह काम में जुटे रहे। बापूराव ने 40 दिन तक हर दिन छह घंटे की खुदाई करते हुए एक कुआं खोद डाला. इस काम में गांव के तो छोड़िए खुद बापूराव के परिवार वालों ने भी उनका सहयोग नहीं किया क्योंकि उन्हें लगता था कि बापूराव पागल हो गया है. उन लोगों के ऐसा सोचने की वजह भी थी, जिस पथरीले इलाके में बापूराव कुआं खोदने की कोशिश कर रहा था उस जगह के पास ही स्थित तीन कुएं और एक बोरवेल पहले ही सूख चुके थे. लेकिन आमतौर पर जिस काम को 5-6 लोग मिलकर अंजाम देते हैं, उसे बापूराव ने अकेले ही करते हुए तब तक कुआं खोदना जारी रखा, जब तक कि पानी नजर नहीं आ गया. बापूराव की मेहनत आखिरकार रंग लाई और कुएं में पानी दिख गया. इस कुएं से बापूराव ने न सिर्फ अपनी पत्नी के लिए पानी उपलब्ध करवाया बल्कि अपने गांव के पूरे दलित समुदाय के लिए पानी का इंतजाम कर दिया. अपनी मेहनत से बापूराव ने दलितों की ऊंची जातियों के ऊपर पानी के लिए निर्भरता भी खत्म करने में मदद की. बीए फाइनल ईयर तक की पढ़ाई करने वाले बापूराव पेशे से मजदूर हैं. इसलिए हर दिन वह काम पर जाने से पहले 4 घंटे और फिर वापस आने के बाद 2 घंटे कुआं खोदने का काम करते थे. इस तरह लगातार 40 दिनों तक उन्होंने बिना ब्रेक लिए रोजाना 14 घंटे मेहनत की. उसने तय कर लिया कि जब तक पानी नहीं ढूंढ़ लेता, तब तक खुदाई करता रहेगा . यहां तक कि उसने अपने घरवालों तक की मदद नहीं ली.
परिवार भी खुदाई में मदद किया है::- बापूराव की पत्नी संगीता को भी अहसास हो गया है कि पति को न समझना उसकी गलती थी. संगीता ने कहा, ‘मैंने तब तक उनकी मदद नहीं की, जब तक उन्हें पानी नहीं मिल गया. अब घर के दो बच्चों को छोड़कर पूरा परिवार उनकी मदद कर रहा है क्योंकि वो कुएं को गहरा और चौड़ा कर रहे हैं. ये पहले ही 15 फुट गहरा है और बापूराव उसे 5 फुट और गहरा करना चाहते हैं. ऊपर से ये 6 फुट चौड़ा है, वो उसे 8 फुट चौड़ा करना चाहते हैं. मुझे उम्मीद है कि हमारे पड़ोसी भी इसमें साथ देंगे. उनकी पत्नी संगीता यह कुआं खोदे जाने से खुश तो हैं लेकिन उन्हें इस बात की निराशा है कि शुरुआत में उन्होंने इस काम में पति का साथ नहीं दिया. लेकिन अब वह और उनका पूरा परिवार बापूराव की मदद करने में जुट गए हैं. 6 फीट चौड़े और 15 फीट गहरे कुएं को बापूराव 5 फीट और गहरा और 2 फीट और चौड़ा करना चाहते हैं. बापूराव खराब व्यवहार करने वाले कुआं मालिकों को नाम नहीं लेना चाहते क्योंकि इससे गांव में खून-खराबा हो सकता है. उस दिन की घटना को याद करते हुए वह कहते हैं, मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता लेकिन उन्होंने हमारा अपमान किया क्योंकि हम गरीब और दलित हैं. उस दिन से मैंने किसी से कुछ भी न मांगने की कसम खाई और मालेगांव जाकर औजार लाया और खुदाई शुरू कर दी. कई दिनों की मेहनत के बाद जब बापूराव को पानी नजर आया तो लगा जैसे घोर तपस्या के बाद भगवान मिल गए हैं। बापूराव की एक अच्छी जिद का ही नतीजा है कि आज वाशिम जिले के कलाम्बेश्वर गांव के लोगों को पानी मिलने लगा है। अब गांव का पूरा दलित समाज उसके कुएं से पानी निकाल रहा है और उन्हें पानी के लिए दूसरी जाति के लोगों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है.
पड़ोसी ने भी तारीफ किया :-बापूराव के पड़ोसी भी इस बात से खुश हैं कि उसकी मेहनत के कारण पानी की दिक्कत खत्म होने जा रही है. पहले उन्हें मीलों चलकर पानी लेने जाना पड़ता था लेकिन अब पानी के लिए न ही लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और न ही दूसरों की जिल्लत सहनी पड़ेगी.
नाना पाटेकर ने भी फोन पर बात किया:-अपने काम के लिए बापूराव को धीरे-धीरे पहचान मिल रही है. एक मराठी चैनल ने उनकी मेहनत को टीवी पर भी दिखाया है. फिल्म एक्टर नाना पाटेकर ने उनसे फोन पर बात की और जल्द ही मिलने का वादा भी किया. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने उन्हें 5000 रुपये की मदद राशि दी है. इसके अलावा तहसीलदार ने भी बापूराव से मिलकर मदद की पेशकश की है. ये कहानी दिखाती है कि अगर इंसान में कुछ कर दिखाने का जज्बा और जुनून हो तो दुनिया में कोई भी काम असंभव नहीं है. बापूराव ने अपनी पत्नी के अपमान की तड़प से वो कर दिखाया जिससे कइयों की जिंदगी में खुशहाली आ गई. ऐसे जज्बे और प्रेम को सलाम.

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz