लेखक परिचय

बालमुकुन्द द्विवेदी

बालमुकुन्द द्विवेदी

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर [मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्‍म] की उपाधि प्राप्‍त करने वाले बालमुकुन्‍द जी २००६ से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं. शुरूआत आपने नवभारत समाचार पत्र सतना म.प्र. से की इसके बाद दो अन्य संस्थानों मेंकम किया। वर्तमान में आप हिदुस्थान समाचार बहुभाषी समाचार समिति की भोपाल शाखा मे बतौर संवाददाता कार्यरत हैं।

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– बालमुकुन्द द्विवेदी

दुनिया में इंरटनेट के उपयोग में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसके चलते साइबर अपराध में भी वृद्धि हो रही है। भारत में भी इंटरनेट क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, मध्यप्रदेश भी अब इससे अछूता नहीं रहा। पहले जहाँ देश में साइबर अपराध का मुख्य केन्द्र दिल्ली, मुम्बई, बैंगलौर और पूना जैसी मेट्रो सिटी थीं वहीं आज मध्यप्रदेश का कोई शहर अब ऐसा नहीं बचा जो इसकी गिरफ्त में न हो। अमेरिकी कंपनी सिमैन्टेक की एक रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराध के मामले में भारत जहां विश्व में पाँचवें पयदान पर है, वहीं इस देश में साइबर क्राइम तेजी से पांव पसार रहा है। भारत में तीन चौथाई इंटरनेट उपभोक्ता किसी न किसी तरह साइबर क्राइम का शिकार होते हैं और इस लिहाज से इसे सबसे बुरी तरह प्रभावित देश माना जा सकता है।सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली फर्म सिमैन्टक ने अपने एक अध्ययन में निष्कर्ष निकालते हुए बताया है, कि वैश्विक स्तर पर लगभग 65 फीसदी इंटरनेट उपयोक्ता साइबर क्राइम के शिकार होते है। जबकि भारत में यह संख्या 76 प्रतिशत है। इनमें कंप्यूटर वायरस, ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी अौर आइडेंटी चोरी जैसे अपराध शामिल हैं। देश में साइबर संबंधी अपराधों की घटनाओं में करीब 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हर साल हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी रिपोर्ट में इस संबंध में जानकारी दी गई है। इसके अनुसार सबसे अधिक साइबर अपराध ‘पोर्नोग्राफी’ से संबंधित हैं। इनमें सबसे खास बात यह है कि इन वारदातों को अंजाम देने वाले अपारधियों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच है। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर शहरों में अनेक बार ऐसी वारदातों को अन्जाम देने वाले अपराधी पकड़े जा चुके हैं।

मध्यप्रदेश उद्योग प्रौद्योगिकी एवं इंटरनेट के क्षेत्र में हुए विकास का लाभ भले ही उठा रहा हो, लेकिन हकीकत यह भी है कि साइबर अपराध में वृद्धि से निगमित क्षेत्र की आय पर्याप्त मात्रा में प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों की माने तो साइबर अपराधों के कारण बहुत सी कंपनियों को अपनी आय में 8 से 10 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ता है।

वस्तुत: हिन्दुस्थान के सूचना भंड़ार पर बाहरी देशों की लगातार नजर बनी रहती है। जबकि देश के सभी राज्यों का एक पक्ष यह भी है कि साइबर अपराध की तेजी से बढ़ती घटनाओं के मुकाबले पुलिस और इनफोर्समेंट एजेसियां कंप्यूटर तकनीक के मायाजाल से पूरी तरह वाकिफ नहीं है। हैकिंग, डाटा चोरी, डिजिटल हस्ताक्षर, सर्विलेंस और गोपनीय दस्तावेजों को खुफिया हमले से बचाने के लिए राज्यों में अपनाई जा रही कंप्यूटर इमर्जेन्सी रिस्पांस टीम (सर्ट-इन) तकनीक भी पूरी तरह से सफल साबित नहीं हो पारही है। ऐसा माना जा रहा है कि आईटी दक्षता के मद्देनजर आने वाले समय में सभी प्रदेशों में साइबर अपराध आंतकवाद को पीछे छोड़ देगा वस्तुत: यह साइबर आतंकवादी ऐसे लोग हैं जो किसी सामाजिक, धार्मिक, सैद्धांतिक, राजनीतिक या अन्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कंप्यूटर या कंप्यूटर तंत्र को बाधित कर लोगों को डरा-धमकाकर अपने हितों की पूर्ति करते हैं।

आतंकवादी और जेहादी संगठनों की तरह साइबर अपराधी राज्यों में विशेषकर सॉफ्ट टारगेट के तौर पर देश के छोटे शहरों को निशाना बना रहे हैं। इनमें पुणे, नोएडा, गुड़गांव और भोपाल के अलावा दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु और पंजाब शामिल हैं। देश में साइबर अपराध में गुजरात पहला ऐसा राज्य है जहां बीते कुछ सालों में डाटा चोरी और हैकिंग, इलेक्ट्रानिक रूप से अश्लील प्रकाशन और ट्रांसमिशन के सर्वाधिक ममले दर्ज किए गए। आज तेजी से विकसित हो रही सूचना तकनीक ने साइबर अपरधियों की मुश्किलों को आसान बना दिया है। आईटी विशेषज्ञों के अनुसार मध्यप्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में मुख्य रूप से वित्तीय संस्थान, बैकिंग, कॉर्परट, वाणिज्य और औद्योगिक क्षेत्र साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। सूचना तकनीक के इस दौर में आतंकियों ने हथियारों के साथ तकनीक को जोड़ने की कला में महारत हासिल कर ली है। यदि समय रहते इस पर लगाम न लगाई गई तो आगे चलकर यह और भी खतरनाक रूप अख्तियार कर सकता है।

वस्तुत: निष्पक्ष कानून की अवधारणा पर आधारित हमारी सामाजिक व्यवस्था में आतंकवाद के इस नए रूप से निपटने के लिए स्पष्ट वैधानिक दिशा-निर्देश पहली जरूरत है। मौजूदा परिस्थितियों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे पास साइबर आतंकवाद की सही और स्पष्ट व्याख्या ही मौजूद नहीं है, जिसके चलते न्याय की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। मीडिया, व्यक्तिगत अनुभव या अन्य उपलब्ध स्रोतों से साइबर क्राइम के बारे में कुछ समझदारी विकसित जरूर हुई है, लेकिन असल समस्या यह है कि विशेषज्ञों की जमात इसे अपने-अपने नजरिए से परिभाषित करती है।

ब्लॉग, इंटरनेट जालस्थलों, ई-मेल के जरिए देश और प्रजातांत्रिक व्यवस्था विरोधी गतिविधियों को भी आतंकवाद मानते हुए साइबर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसके लिए विधिवत रूप से भारतीय साइबर कानून या सूचना प्रौद्योगिकी कानून-2000 में संशोधन किया जा चुका है। लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह है कि केन्द्र और राज्य सरकारों ने अभी तक न तो कोई ऐसा साझा प्रयास किया और न ही एकल कोशिश की है, जिससे कि आम जनता को साइबर क्राइम के प्रति जागृत किया किया जा सकता। इस कानून के अनुसार साइबर अपराधियों को अब आंतकवादी मानकर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी और जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान भी किया गया है। इसके पहले भी जान-बूझकर इंटरनेट के माध्यम से समाज, धर्म, देश या किसी संगठन के खिलाफ अपमानजनक संदेश प्रसारित करने, ई-मेल से धमकी भरे संदेश भेजने, ई-मेल द्वारा अपमानसूचक संदेश भेजने, इलेक्ट्रानिक अभिलेखों की जालसाजी, जाली वेबसाइट, साइबर धोखाधड़ी, ई-मेल स्पूफिंग, वेब अपहरण, ई-मेल दुरुपयोग, दवाओं की ऑनलाइन बिक्री सहित हथियारों की ऑनलाइन बिक्री को भारतीय दंड़ संहिता और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध की श्रेणी में रखा गया था।

हालांकि लगातार बढ़ते साइबर अपराध को नियंत्रित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण के दिया जा रहा है। साथ ही आम लोगों को भी साइबर क्राइम और इससे संबंधित कानून की बुनियादी जानकारियों से अवगत कराने के लिए गृह विभाग द्वारा एक पुस्तिका का प्रकाशन तथा वितरण किया जाता है।एक अच्छी पहल जरूर इस मामले में हो रही है कि देश के सॉफ्टवेयर उद्योग की प्रमुख संस्था नेसकॉम अपने सामाजिक सरोकार के तहत पुलिस को साइबर अपराध से निपटने में निपुण बना रही है। यह संस्था पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध के विभिन्न रूपों से अवगत कराने के साथ उन्हें कंप्यूटर आधारित विभिन्न तरह के अपराधों की जांच तथा गड़बड़ी तक पहुंचने की कला से परिचित कराती है। अब देखना यह है कि शासन द्वारा साइबर क्राइम को कन्ट्रोल करने के लिए किए जा रहे प्रयास कहां तक सफल होते हैं।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार के संवाददाता हैं)

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