लेखक परिचय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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besan
बेसन की मिठाई है आई रे,
मोरे मम्मा ने भेजी|
मम्मा ने भेजी और माईं ने भेजी|
बेसन की मिठाई है आई रे,
मोरे मम्मा ने भेजी|

देखो मिठाई है कितनी गुरीरी|
घी की बनी है और रंग की है पीरी|
माईं ने ममता मिलाई रे,
मोरे मम्मा ने भेजी|

काजू डरे हैं और किसमिस डरी है|
पिस्ता की रंगत तो कैसी हरी है|
सिंदूरी केसर मिलाई रे|
मोरे मम्मा ने भेजी|

नाना ने मीठे के डिब्बा बनाये|
नानी ने रेशम के धागे बंधाये|
जी भरकें आशीष भिजवाई रे
मोरे मम्मा ने भेजी|

डिब्बा में निकरीं हैं सतरंगी चिठियां|
चिठियों में लिक्खी कैसी मीठी बतियां|
चांदी सी चमके लिखाई रे|
मोरे मम्मा ने भेजी|
बेसन की मिठाई है आई रे,
मोरे मम्मा ने भेजी|

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