लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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अनिल अनूप
राजपाल यादव हिन्दी फिल्मों के हास्य अभिनेता हैं जो कि हिन्दी सिनेमा में अपने काॅमिक रोल्स केे कारण जाने जाते हैं। वे अपनी काॅमिक टाइमिंग की वजह से बाॅलीवुड में खासे मशहूर हैं। वे हिन्दी फिल्मों के बेहतरीन हास्य कलाकारों में से एक हैंl
तकरीबन पौने दौ सौ फिल्मों में काम कर चुके जाने-माने अभिनेता राजपाल यादव रविवार को रील लाइफ से हटकर रीयल लाइफ में सियासी पारी में जोरआजमाइश करते नजर आए। उन्होंने मौजूदा राजनीति की दशा-दिशा पर सवाल उठाए तो उसे दुरुस्त करने का दावा भी किया। बतौर स्टार प्रचारक अपनी सर्व समभाव पार्टी की नीतियां बताईं। साथ ही ‘सबको मौका बार-बार, हमको मौका एक बार’ की अपील भी की।
कहा, राजनीति में सेवा के संकल्प से आया हूं। अब तक पार्टियां अपने फायदे के लिए जनता को चुनती रही हैं, अब जनता को मौका है कि वह उस पार्टी को चुने जो उसके हित के लिए काम करे। मेरी पार्टी के लिए फिलहाल उत्तर प्रदेश पहली पारी है। यहां केकिसान परिवार से जुड़ा हूं। यह मेरा प्रदेश है, इसलिए यहीं से शुरुआत करना हमारा हक है। पार्टी स्वाभिमान के लिए प्रदेश में 390 सीटों पर लड़ेगी। मौका मिला तो प्रदेश की दूसरी तस्वीर होगी।
फिल्म और राजनीति में किसको तरजीह के सवाल पर कहा, फिल्मों से अलग होने का सवाल ही नहीं लेकिन व्यस्त शिड्यूल के बावजूद शूटिंग आमतौर पर 150 से 200 दिनों तक ही होती है। बाकी वक्त में से हर माह कम से कम आठ दिन के मुताबिक सौ दिन राजनीति की सेवा में रहूंगा। अगले तीन वर्षो में ऐसी कई फिल्में आने को हैं, जिसे आप देखना और अपनी लाइब्रेरी में रखना चाहेंगे। नोटबंदी के सवाल पर कहा, यह जनता की चुनी हुई सरकार का फैसला है लेकिन सरकार को इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि जनता को कोई परेशानी न हो।
प्रेस क्लब में बातचीत के दौरान राजपाल ने स्पष्ट किया कि किसी पार्टी को कमतर करना नहीं बल्कि बड़ी लकीर खींचना ही मकसद है। पांच सितंबर 2015 को वृंदावन में पार्टी का गठन हुआ था। अभी अपनी जमीन मजबूत करनी है, ऐसे में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन का सवाल ही नहीं होता। यह भी कि खुद चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं बल्कि पार्टी के लिए प्रचार करेंगे। बड़े भइया और पार्टी के अध्यक्ष श्रीपाल यादव ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे, अब सेनापतियों की तलाश है। इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीपाल यादव ने कहा, चुनाव आयोग की ओर से चुनाव चिन्ह मिलने के बाद प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की जाएगी।
अभिनेता राजपाल यादव ने स्पष्ट किया कि किन्नरों से पार्टी को कोई परहेज नहीं है।
इंसान से इंसान का अपना परिचय धीरे-धीरे ही होता है, अपनी कमियों और अपने गुण मालुम होने लगते हैं, और फिर हम चयन करते हैं की हमें किस और पाँव बढ़ाना है. ये परिचय स्कूल से कॉलेज तक की सफ़र में होजाता है. राजपाल जी का परिचय अपने भीतर निहत्य कलाकार या उस अभिनेता से कब हुआ आईये चलिए कुछ रोचक बातें जानते हैं जो राजपाल जी ने एक बार खुद एक इंटरव्यू में बताया था.
उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर से 40 किलोमीटर दूर कुंद्रा गाँव में 16 मार्च 1971 जन्मे और फिर आठवी कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की शाहजहांपुर से ही, और उसके पश्चात शाहजहांपुर से स्नातिक की डिग्री प्राप्त की और लखनऊ की ओर बढ़ चले. लखनऊ से बी.एन.ए. तक की पढाई और फिर दिल्ली से एनएसडी और यहाँ से मुंबई तक की यात्रा यानी बचपन से जवानी तक का सफ़र ये था पर क्या बचपन की बीतीं बातें कोई भुला पाता है?
राजपाल बचपन में कई बार स्कूलों में भी नाटक में हिस्सा लेते रहेते थे, जैसे जैसे बड़े होते गए अखबारों में पढ़ते रहेते थे, सच मायेने में इनको कभी लगा नहीं था की ये आगे चलकर एक्टिंग करेंगे क़्योंकि इनकी जो पढाई थी वो बायोलॉजी फिल्ड से थी और इनके जो मास्टर थे वो इनको डॉक्टर बनाना चाहेते थे, लेकिन राजपाल जी का रुझान अन्दर से था की वो ऐसी क्षेत्र में जाना चाहते थे कि जिसमे उन्हें नौकरी न करनी पड़े.
जब राजपाल इंटरमीडिएट में थे तो वो अपने मुहल्लों में जब कभी चुनाव होता था तो उसमें भी हिस्सा लेते थे वो मुहल्लों में जिस उम्मीदवार को जिताना चाहते हैं उसके लिए प्रचार करना रैली निकालना उसमें हिस्सा लेना ये सब कर चुके हैं बचपन में काफी शरारती भी थे राजपाल जीl
खुद बताते हैं की मैं एक ऐसी दिशा की तलाश में था कि कोन से क्षेत्र हैं जिसमे मुझे रोटी, कपडा, और मकान, जो अभी तक माँ-बाप ने जिम्मेदारियां मुझे लेकर उठाई हैं. में अपने पेरों पर कब खड़ा हो पाऊंगा, किस क्षेत्र में जाऊँगा जो मैं खुद अपनी जिम्मेदारी से अपना जीवन जी पाऊंगा.
धीरे-धीरे जैसे समय आगे बढ़ रहा था उसी प्रकार राजपाल की सोच भी आगे बढ़ रही थी, इन्होने एक ऑडियंस क्लोजिंग फैक्ट्री है शाहजहांपुर में है वहां इन्होने एडमिशन लिया और वहां से इन्होने डाई साल ट्रेनिंग प्राप्त की. फिर उसके बाद क्रियेशन आर्ट थियेटर है शाहजहांपुर में जो बहुत ही स्थापित संस्था है, इस संस्था में इन्होने आने के बाद जरीफ मालिक आनदं जी जो इस संस्था के संस्थापक थे उनसे कला की शिक्षी प्राप्त की, और उसमे छोटे-छोटे रोल निभाने लगे इस भूमिका को निभाने में उनको काफी लुत्फ़ मिलने लगा, दूसरा काम करने के मुकाबले इस काम में इनको जियादा जोश होता था, अन्दर से एक ज्यादा खुशी होती थी इस काम में. सोचने लगे कि यही वो काम तो नहीं है जिसे मुझे करना है, जिसमे मैं आगे बढ़ सकता हूँ, लेकिन अन्दर ही अन्दर डर भी था की इस क्षेत्र में इतना बड़ा कम्पटीशन है कैसे क्या होगा, होना क्या था जिनके इरादे मजबूत होते हैं भगवान् भी उनके साथ होता है,
राजपाल जी की लगन और महेनत ने उनके होसले को कम होने नहीं दिया, एक दफा भिवा मिश्रा जी के निर्देशन में एक रोल प्ले किया अंधेर नगरी चोपट राजा में और जब वो प्ले हुआ और शो होने के बाद में शायद वह निर्णय था जो इन्होने सोच लिया था की अब जीवन में जो भी करूँगा इस क्षेत्र में करूँगा,आटे (भोजन) का इन्तिजाम हो तो सोने पे सुहागा होने वाली बात है लेकिन कला को अब नहीं छोडूंगा लेकिन इश्वर की कृपा से आटे और कला में दोनों संतुलन बरक़रार रहा.
गुरुओं को सम्मान देने वाले शिष्य गुरु तथा अग्रज दोनों ही स्नेह व अशिष्य लेते रहते हैं अपने गुरुओं की कथनी को जीवन का मार्ग समझने वाले राजपाल यादव जी ने पीछे मुड कर कभी नहीं देखाl लखनऊ से निकल कर इन्होने दिल्ली में जो काफी मशहूर संस्था हैं NSD में दाखिला लिया और यहाँ पर ढाई साल ट्रेनिंग ली, अपने पुरे जोश और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने लगे NSD में इन्होने अपनी कला को और निखारा और 1997 में अपना भविष्य बनाने के लिए वो मुंबई आ गये, मुंबई आने के बाद प्रकाश झा के हित में इन्हें एक सीरियल में काम करने का मौका मिला जो डीडी दूरदर्शन पे आता थाl इस सीरियल का नाम था मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल जो इसी चैनल पे आने वाले एक सीरियल मुंगेरीलाल के हसीन सपने का ही सिक्वल था. अब राजपाल पीछे मुड़ने वालों में से कहां थे वे आगे बढ़ते गए और 1999 में दिल क्या करे से हिंदी फिल्मो में अपना कदम रखा lअपनी पहली फिल्म में इन्होने एक स्कूल वाचमैन की भूमिका निभाई, आगे चलकर हास्य कलाकारी में अपनी धाक जमाई, फिल्म हलचल, गरम मसाला, चुप-चुपके, हेरा-फेरी जैसी अनेक फिल्मों में दर्शकों को काफी लौट पोट भी किया, सिर्फ हास्य कलाकारी में ही नहीं इन्होने मेन लीड रोल में भी कई भूमिकाएं निभायीं जो काफी पसंद की गयी फिल्म कुश्ती, मेरी पत्नी और वो, चांदनी बार, हेल्लो हम लल्लन बोल रहे हैं, में माधुरी दिक्षित बनना चाहती हूँ, जैसी कई फिल्मो में और सफल भी हुए अपने इसकी भूमिका में.
सनसुई स्क्रीन बेस्ट एक्टर अवार्ड्स से भी राजपाल नवाजे जा चुके हैं निगेटिव रोल निभाने के लिए हिंदी फिल्म जंगल में,यस भारती आवर्ड और जनपद रत्न अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं, 2006 में आई फिल्म वक्त, द रेस अगेन्स्ट …की श्रृंखला में भी नामित हो चुके हैं .
किसी का हम सफ़र बनना और किसी को हम सफ़र बनाना ये नियती (भगवान्) के हाथ में होता है तभी तो शायद ये कहा जाता है की जोड़ियाँ हैप्पी न्यू ईयर के सामने थे ये रिकॉर्ड सलमान खान की इस साल ईद पर रिलीज हुई किक और आमिर खान की पिछले साल रिलीज हुई धूम 3 ने बॉक्स ऑफिस पर 200 से ज्यादा की कमाई करके शाहरुख खान के सामने एक बड़ा रिकॉर्ड रखा था।
बॉक्स ऑफिस पर पहला दिन
हैप्पी न्यू ईयर ने रिलीज के दिन ही 44.97 करोड़ की कमाई करके एक नया रिकॉर्ड बनाया।
बॉक्स ऑफिस पर दूसरा दिन
रिलीज के दूसरे दिन यानि शनिवार के दिन हैप्पी न्यू ईयर ने करीब 39 करोड़ की कमाई की।
बॉक्स ऑफिस पर तीसरा दिन
रविवार के दिन की कमाई का पूरा ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है लेकिन फिल्म के तीसरे दिन के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने करीब 35 से ज्यादा की कमाई की है। कुल मिलाकर फिल्म तीन दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर गयी है। वाला तय करता है और विवाह जमीन पर तय होती है, और यही बात राजपाल यादव जी की Life में फिट बैठती है, राजपाल यादव बताते हैं की वो फिल्म द हीरो की शूटिंग के लिए कनाडा गए हुए थे, वहां एक ऐसी लड़की से मुलाकात हुयी जिसने न कभी शाहजहांपुर सुना था और न ही राजपाल यादव जी ने कभी केलगिरी सुना था, वहां इनदोनो जोड़ी राजपाल यादव और राधा यादव की मुलाकात हुयी और इन दोनों जोड़ी ने 10 जून 2003 में शादी कर ली.
राजपाल यादव अपनी सफलता का श्रेय किसे देते हैं आईये जानते हैं:
1999 में दिल किया करे से सफ़र करने वाले राजपाल यादव जी ने मस्त, शूल, जंगल, प्यार तूने किया किया, चांदनी, अनवर,
अनवर, से लेकर मैं माधुरी बनना चाहती हूँ जैसी अनेक फिल्मो में अपनी अभिनय से नवाजा है, सिर्फ नवाजा ही नहीं बल्कि उसमे धाग भी जमाई है, इस पूरी सफलता का श्रेय वो अपनी माता-पिता, शाहजहांपुर, मुंबई, अपने गुरु, और अपने ऑडियंस को देते हैं.
“जिस तरह फलों से लदा हुआ व्रृक्ष तनता नहीं है, झुकता है उसी तरह सफलता के प्रति उनके विचार बेहद स्पष्ट हैं, शायद यही वजह है की अहेंकार की बयार भी राजपाल यादव जी को छुकर नहीं गुजरी”
सफलता के बारे में राजपाल यादव जी का किया ख्याल है आईये जानते हैं:
अभिनय की गलियारों में अपनी पहचान बनाते हुए गुजरना सरल नहीं है पर जिन्होंने अपनी गुरुओं का आशीष पाया हो भला उनके पाँव क्यों रुके. राजपाल यादव जी कहते हैं महेनत ही जिंदगी का आभार है, सफलता के बारे में राजपाल यादव कहते हैं कि सफलता एक चिंगम की तरह है सफलता (चिंगम) को अगर मुंह में चबाते रहिये उसका हल्का हल्का रस लेते रहिये तो वो आपको बहुत मजे देगी, अगर वो चिंगम को आप निगल लेते हैं तो आपकी शायद आतें भी फाढ़ देगी और आपको Operation भी करना पड़ सकता है, तो चिंगम और सफलता में कोई विशेष अंतर नहीं है सफलता का मजा हमें उतना ही लेना है. जितना हम जैसी चिंगम का मजा लेते हैं और जब चिंगम आपको बौर करने लगे तो उसको थूंक दें और आप नयी चिंगम की तलाश में आपका जो भूक है वो बढ़ने लगेगी. सफलता मिलने पर सफलता का एक सिमित वक़्त तक आनदं लें और फिर वापस एक नयी उर्जा के साथ फिर से लग जाएँ. कियूं की वही इंसान जीवन में सफल होता है जो सफलता को पचा सके.
कुछ रोचक जानकारियां राजपाल यादव जी के बारे में
राजपाल यादव बॉलीवुड हिंदी फिल्मों में काफी मशहूर हैं, जो एक फेमस हास्य अभिनेता के तौर पर जाने जाते हैं. काफी मशहूर और फेमस हैं अपने कॉमिक रोल के कारण हिंदी फिल्मों में.
उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर से 40 किलोमीटर दूर कुंद्रा गाँव में 16 मार्च 1971 में जन्मे हैं, इन्होने अपनी पढाई लिखाई शाहजहांपुर और लखनऊ स्थित जगह में पूरी की. राजपाल ने अपनी पढाई बायोलॉजी से पूरी की.
राजपाल ने 1992-1994 में भार तेंदू नाट्य अकैडमी थियेटर में कला की ट्रेनिंग ली जो लखनऊ के पास स्थित है, यहाँ पर इन्होने 2 साल ट्रेनिंग ली.
भारतेंदू नाट्य अकैडमी से ट्रेनिंग लेने के बाद वो दिल्ली में (NSD) में 1994-1997 की ट्रेनिंग ली और अपनी कला को निखारा. और बॉलीवुड हिंदी फिल्मों में अपना कैरियर बनाने के लिए 1997 में वो मुंबई आ गये.
राजपाल यादव जी की शादी 10 जून 2003 में राधा यादव से हुयी, इन दोनों जोड़ी की मुलाकात पहेली बार कनाडा में हुयी थी फिल्म The Hero:Love Story Of Spy के दौरान जब राज पाल कनाडा गए हुए थे.
राजपाल यादव ने अपनी शुरुआत एक सीरियल से की थी जो दूरदर्शन (DD) पे आता था, इस सीरियल का नाम था मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल जो मुंगेरीलाल के हसीन सपने का ही सिक्वल था.
हिंदी फिल्मों में इन्होने दिल किया करे से अपनी शुरुआत की जिसमे इन्होने एक स्कूल के वाचमैन की भूमिका निभाई. और धीरे-धीरे हिंदी फिल्मों में अपनी धाग जमाते चले आये, काफी सफल भूमिका निभाई और कामयाब भी हुए, काफी सफल भूमिका निभाई और कामयाब भी हुए, फिल्म जंगल में इनको Best Performer Actor Negative Role Play करने के लिए अर्वार्ड्स भी सम्मानित किया जा चूका है.
अपनी इस मुख्य हास्य कलाकारी से सबका दिल जीता और सबको काफी लौट-पॉट भी किया फिल्म: हेराफेरी, हलचल, गरम मशाला छुप छुपके जैसी अनेक फिल्मो में. सिर्फ हास्य कलाकारी में ही नहीं बल्कि मुख्य अभिनेता के तौर पर भी अपना जलवा दिखाया है, फिल्म :- कुश्ती, मेरी पत्नी और वो, हेल्लो हम लल्लन बोल रहें हैं, मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं, जैसी कई फिल्मो में और दर्शकों को पसंद भी आये मैन लीड रोल में.
राजपाल को डांसिंग में भी काफी रूचि है, वो जो भी काम उसमे पुरे मन से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, यही कारण है आज एक सफल मुकाम पर हैं, राजपाल जी एक बहुत सिंपल सवभाव के हैं, अपने से छोटे बड़े सबकी आदर करते हैं यही कारण है लोग इन्हें भी उतने प्यार से ही सम्मान और इज्जत देते हैं. अभिनय को माता का दर्जा देने वाले राजपाल यादव जी की एक खवाहिश है की वो अपनी माता (अभिनय) को कभी छोड़ना नहीं चाहते हैं .

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