लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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pyarelalरोज इस दुनिया में अनेक लोग जन्म लेते हैं लेकिन उनमें से कुछ बिरले ही होते हैं जो अपने आस-पास के वातावरण समाज और राष्ट्र के लिए स्वयं का समर्पण कर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इतिहास में अमर हो जाते हैं। चैत्र कृष्ण द्वादशी संवत् 1985, 6अप्रैल1929 को मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के एक छोटे से ग्राम चारमंडली के किसान परिवार में जन्में प्यारेलाल खण्डेलवाल ऐसे ही शक्स थे। जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र आराधना में लगा दिया।

कहते हैं पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं, परतंत्र भारत में जन्में प्यारेलाल जी जब बाल्यावस्था में सोचने समझने लायक हो गये और उन्हें पता चला कि हम अंग्रेजों के गुलाम हैं तो वे भारत की आजादी के लिए प्रयत्नशील हो उठे। ग्यारह वर्ष की अवस्था में सन् 1940 में राष्टन्वादी ध्येयनिष्ट संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संपर्क में आ जाने के बाद जैसे उन्हें अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया हो। भारत माता के लिए तन समर्पित, धन समर्पित और यह जीवन समर्पित की भावना रखकर जब इन्होंने अपने छात्र जीवन में सक्रीयता दिखाई तब इन्दौर में क्रांतिकारियों और देशभक्तों के समूह, प्रजामंडल द्वारा प्रकाशित गुप्त पर्चों का वितरण एवं माहेश्वरी विद्यालय में विद्यार्थी आन्दोलन को अपना प्रखर नेतृत्व प्रदान करते हुए इन्होंने यह बता दिया कि अब भारत की युवा शक्ति जाग उठी है। वन्देमातरम् का नारा लगाने पर कठोर यातना और बेतों की सजा मिलने के बावजूद यह युवा भारत माता की आराधना में निरंतर डटा रहा। इसी का परिणाम था जो आगे चलकर स्वतंत्र भारत की राजनीति को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य इंटर पास इस युवा के हाथों हुआ।

श्री प्यारेलाल जी ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विस्तार से लेकर भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में परस्पर पूरक की भूमिका का रचनाधर्मिता के साथ निर्वहन किया। सन् 1948 में संघ के प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी लेने के बाद कभी पीछे मुडकर इस शक्स ने नहीं देखा – फिर तो इनके जीवन का एक ही ध्येय वाक्य रहा – चरैवेति-चरैवेति-चरैवेति निरंतरम्। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्य करते हुए एक वर्ष में ही दो बार शासन की नीतियों के खिलाफ सत्याग्रह करते हुए दो रतलाम और इन्दौर जेल में बंदी रहे। जहाँ स्व. एकनाथ रनाडे जैसे देशभक्त मनीषी का सानिध्य मिलने से राष्ट्र जीवन की धारा को प्रखरता से समझने का अवसर इन्हें सुलभ हो सका। संघ कार्य में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए उन्होंने अनेक स्वयं सेवकों को ध्येय पथ पर अपने देश के लिए पूर्ण समर्पण कर आगे बढते रहने की न केवल प्रेरणा दी बल्कि स्वस्फुरित कार्यों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह भी बताया कि स्वयं सेवक का अर्थ क्या होता है।

सन् 1965 में संघ की मंशानुसार आपने सक्रीय राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया। जहाँ जनसंघ के साक्षी भाजपा के पितृपुरूष कुशाभाऊ ठाकरे का सानिध्य सहजता से सुलभ हुआ। वे स्व. ठाकरे के दाहिने हाथ रहे। मध्यप्रदेश में अनेक आन्दोलनों-कार्यकर्ता निर्माण और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साक्षी प्यारेलाल जी कब अनेक दिलों की धडकन और लोगों के प्रेरणास्रोत बन गये। स्वयं उन्हें भी नहीं मालूम पडा। यह तो तब ध्यान में आया जब उनसे प्रेरणा लेकर संगठन विस्तार के लिए अनेक युवा पूरे प्रदेशभर में कांग्रेस सरकार से प्रदेश मुक्त करने के लिए उठ खडे हुए।

जब कश्मीर को लेकर तात्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की नीति स्पष्ट नहीं थी तथा कश्मीर को भारत से जाता देश जनसंघ ने डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में सत्याग्रह का उद्धोष किया, जिसका नारा था ‘एक देश दो विधान’, दो निशान दो प्रधान नहीं चाहिए-नहीं चलेंगे।’ केन्द्र की कांग्रेस सरकार के विरोध में कश्मीर के पक्ष में जो यह जन आन्दोलन प्रारंभ हुआ उसमें श्री खण्डेलवाल म.प्र. में इस आन्दोलन के अगुआ बनकर उभरे। उन्हें मालूम पडा कि उनके जत्थे को रावी के तट पर ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा तो वे अपने साथियों के साथ पानी में उतर गए और नदी पार कर सत्याग्रह में शामिल हुए।

वे 1953 में कश्मीर की कठुवा तथा जम्मू जेल में 6 माह तक राजनैतिक बंदी के रूप में रहे। अभी पार करने हैं अगम पथ इन पगों से ही इसी ध्येय वाक्य का स्मरण कर प्यारेलाल जी आगे बढते रहे परम वैभवन्य तु मे तत्व राष्टन्म् ”हे भारत माता एक स्वयं सेवक ने नाते तुझे परम वैभव के सिंहासन पर आरूढ करना ही मेरे जीवन का हेतु है” इसलिए जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी में आपातकाल लागू कर तानाशाही का दमन चक्र चलाया जिसमें देशभक्त स्वयं सेवकों और जनसंघ के सदस्यों को बलात जेलों में बंद किया जा रहा था ऐसे में एकबार फिर प्यारेलाल जी इंदिरा की तानाशाही के विरोध में ह्ढता से खडे दिखाई दिए। आपने आपातकाल में 1975 से 1977 तक पूरे 19 माह तक भूमिगत आन्दोलन किया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित लोकसंघर्ष समिति मध्यप्रदेश के संचालक के रूप में परिस्थितियों को भांपते हुए ठीक उसी प्रकार वेश बदलकर धोती-कुर्ता त्याग पेंट-शर्ट पहनकर इस दमन चक्र के खिलाफ जन आन्दोलन खडा किया जिस प्रकार क्रांतिकारी भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरू आदि क्रांतिकारी अंग्रेजों को प्रताडित करने के लिए वेश बदलकर देशभक्ति पूर्ण कार्य किया करते थे। सच पुराने लोग सही कहते हैं कि आपातकाल के भय मुक्त वातावरण में सत्याग्रह के लिए लोगों को प्रेरित करने का कार्य तो कुशाभाऊ ठाकरे और प्यारेलाल खण्डेलवाल जैसे ध्येय निष्ठ समर्पित लोग ही कर सकते थे।

निश्चित ही आज मध्यप्रदेश में जो भारतीय जनता पार्टी का विशाल वट वृक्ष खडा है। उसको सींचने और उसकी देखभाल करने का महत्वपूर्ण कार्य स्व. ठाकरे जी तथा प्यारेलाल खंडेलवाल द्वारा किया गया है। इनके त्याग तपस्या और समर्पण का ही परिणाम है जो आज मध्यप्रदेश में स्थान-स्थान पर भाजपा जैसी राजनीतिक पार्टी के पास समर्पित कार्यकर्ताओं की एक-दो टोली नहीं वरन् पूरी फौज मौजूद है। प्यारेलाल जी न केवल कुशल संगठनकर्ता थे बल्कि राजनीति युध्दा रचना किस प्रकार की जाती है उसमें भी आप सिध्दाहस्त थे। श्री खंडेलवाल जी ने राजनीति में प्रवेश संभागीय संगठन मंत्री के रूप में किया 1972 में अविभाजित मध्य्रपदेश में जनसंघ के प्रदेश संगठन मंत्री बने। इसके बाद वे वर्ष 1980 में राज्यसभा सदस्य चुने गए।

1988 में मध्यप्रदेश में भाजपा के ग्राम राज अभियान नाम से जो सुदीर्घ आंदोलन शुरू किया गया उसमें हजारों कार्यकर्ताओं ने श्री खंडेलवाल के नेतृत्व में भाग लिया। यही अभियान 1990 में मध्यप्रदेश में भाजपा की भारी बहुमत से विजय का आधार बना। उन्होंने वर्ष 1989 में प्रदेश के राजगढ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव जीता था। इसके बाद वे भाजपा के मंत्री, उपाध्यक्ष और महामंत्री रहने के साथ कई प्रदेशों के प्रभारी भी रहे। श्री खंडेलवाल वर्ष 2004 में फिर से राज्यसभा सदस्य चुने गए और वर्तमान में राज्यसभा सदस्य थे।

भारतीय जनसंघ और उसके बाद भाजपा विशेषकर मध्यप्रदेश में पार्टी संगठन खडा करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष दिवंगत कुशाभाऊ ठाकरे के बाद खंडेलवाल ऐसे व्यक्ति थे जिनका समूचे अविभाजित मध्यप्रदेश में गहन संपर्क था। प्यारेलाल जी को न केवल शहरी लोगों के दु:ख-दर्द की चिंता रही बल्कि वे मध्यप्रदेश के वनवासी क्षेत्रों एवं हरिजनों को भाजपा से जोडने के लिए लगातार विशेष प्रयास करते रहे। साथ ही उन्होंने इन लोगों की समस्याओं को दूर करने लिए समय-समय पर अनेक आंदोलन भी किए थे।

स्व. पंडित दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में पं. दीनदयाल विचार प्रकाशन की स्थापना का श्रेय आपको जाता है। भाजपा की नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में किसी राजनीतिक पार्टी की पत्रिका जिसका पाठक वर्ग किसी भी अन्य पत्रिका की तुलना में हजारों की संख्या में है ऐसी चरैवेति मासिक हिन्दी पत्रिका की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका भी आपने निभाई।

रूस, ब्रिटेन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ताईवान आदि देशों की यात्रा करने वाले श्री खंडेलवाल भारतीय जनता पार्टी में 1993 में हरियाणा प्रदेश की प्रभारी बनाए गए, 1996 में उडीसा तथा असम के प्रभारी बने, सन् 1999 में भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री, वर्ष 2000 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तरप्रदेश के प्रभारी, 2002 में राष्ट्रीय महामंत्री-उडीसा, असम, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर पूर्वी राज्यों के प्रभारी एवं 2003 में पुन: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुने गए । अभी वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य थे।

मध्यप्रदेश के कई चुनावों की सफलता के पीछे प्यारेलाल खण्डेलवाल जी रहे हैं। प्रदेशभर के कार्यकर्ता अपने नेता को कितना प्यार करते है यह आज एक बार फिर देखने को मिला जब हजारों की संख्या में प्रदेशभर के लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए भोपाल-भाजपा कार्यालय में उमड पडे। ऐसा ही एक ह्श्य पहले उपस्थित हुआ था, जब उनका भोपाल में अमृत महोत्सव मनाया गया था।

प्यारेलाल जी एक दशक से कैंसर जैसे असाध्य रोग से पीडित थेकिन्तु इसके बावजूद भी उनमें देश सेवा का जज्बा यथावत था तभी तो कार्यकर्ताओं से उनका सतत् सम्पर्क बना हुआ था।

भाजपा के आधार स्तम्भों में शामिल वरिष्ठ नेता प्यारेलाल खंडेलवाल जीवनभर सादगी, संस्कार और साफ गोई के लिए जाने जाते रहे। वे अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में न कभी फिसले न डगमगाए। सतत् ध्येय पथ पर अडिग हो आगे बढते रहे। आज इनका लौकिक शरीर वेशक हमारे बीच न रहा हो, लेकिन इनके आदर्श, त्याग- तपस्या से पूर्ण इनका संपूर्ण जीवन सदैव भारतीय जनता पार्टी को सींचता रहेगा। राष्ट्र जीवन के लिए हमेशा ऐसी महान् हुतात्माओं की आवश्यकता बनी रहेगी।

प्यारेलाल जी के जीवन का सार उन्हीं के शब्दों में कहा जाए तो वह दो पंक्तियों में सब कुछ समेट लेता है।

तेरा वैभव अमर रहेगा माँ।

हम दिन चार रहे न रहे॥

राष्टन्सेवकों और राजनेताओं ने दी अपने नेता को श्रृद्धांजलि

आचरण का आदर्श प्रस्तुत कियाप्यारेलाल जी ने : कुप.सी. सुदर्शन एवं मोहन भागवत जी का संयुक्त वक्तव्य

सन् 1948 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर लगे प्रथम प्रतिबंध के समय संघ कार्य पर आए संकट को दूर करने और आगे उसकी अभिवृध्दिा के लिए जिन प्रचारकों ने अपना जीवन लगाने का संकल्प लिया उनमें श्री प्यारेलाल जी भी एक थे। इंदौर नगर के प्रचारक के रूप में कार्यप्रारंभ कर उन्होंने जिला, विभाग सहित अनेक दायित्व सम्हाले और सन् 1964 में जनसंघ की मध्यप्रदेश इकाई में उनकी योजना हुई। तब से कुछ वर्षों पूर्व तक उन्होंने राजनैतिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं समर्पित दीं ।

पहले जनसंघ और बाद में आपातकाल के पश्चात् भारतीय जनता पार्टी में वे एक ध्येय निष्ठ, कुशल संगठक के रूप में विख्यात रहे। आज की शून्य विहीन राजनीति में जिन कुछ लोगों ने आचरण का आदर्श प्रस्तुत किया उनमें श्री प्यारेलाल जी भी एक रहे। मूल्यों से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। वे ह्ढ इच्छा शक्ति के बूते पर ही रोगों से जूझे और अंतिम समय तक सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।

दिनांक 7 अक्टूबर से राजगीर में प्रारंभ हो रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के पूर्व संघ के केन्द्रीय पदाधिकारियों की यह बैठक श्री प्यारेलाल जी के बडे भाई श्री गुलाबचन्द खंडेलवाल, उनके परिवारजनों तथा स्नेहीजनों एवं सहयोगियों के शोक में सहभागी होते हुए स्व. श्री खंडेलवाल जी को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

जीवन को मिशन बनाया : अटल विहारी वाजपेयी

वे जनसंघ व भाजपा के कार्य की नींव डालने व उसे बढाने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में से थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संपर्क के बाद उन्होंने अपने जीवन को ही मिशन बना लिया। जीवनभर ध्येय के प्रति समर्पित होकर कार्य कैसे किया जाता है, वे इसके उदाहरण थे। ऐसे समर्पित, कर्मठ और निष्ठावान सहयोगी के निधन पर लगा आघात शब्दों में व्यक्त करना असंभव है।

लालकृष्ण आडवाणी : श्री खंडेलवाल के निधन ने एक निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता को खो दिया है। श्री कुशाभाऊ ठाकरे के बाद श्री खंडेलवाल ने महत्वपूर्ण योगदान करके राज्य में पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया।

कार्यकर्ताओं के लिए देवदूत और समस्या समाधान के लिए वे हनुमान थे : पटवा (पूर्व मुख्यमंत्री मप्र)

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुंदरलाल पटवा ने कहा कि प्यारेलाल खण्डेलवाल ने भारतीय जनसंघ से भाजपा के विस्तार में दुर्लभ प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यकर्ताओं के लिये वे देवदूत रहे। जब-जब कठिर्नाईं और समस्या आयी समाधान के लिये वे हनुमान सिध्दा हुए। उनका निधन अपूरणीय क्षति है।

दुर्लभ प्रतिभा के धनी संगठक को खो दिया : जोशी (पूर्व मुख्यमंत्री मप्र)

पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा के वरिष्ठ नेता, सांसद कैलाश जोशी ने कहा कि प्यारेलाल खण्डेलवाल भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी के विस्तार के साक्षी रहे है और उन्होंने इसका आधार दृढ करने में अभूतपूर्व योगदान दिया। खंडेलवाल एक दुर्लभ संगठक थे। उनके निधन से पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई है जिसे पूरा करना असंभव होगा। प्यारेलाल खण्डेलवाल सादा जीवन और उच्च विचार के दुर्लभ व्यक्ति थे। उनके आदर्श लंबे समय तक आने वाली पीढी को अनुप्राणित करते रहेंगे।

श्री खंडेलवाल का निधन अपूरणीय क्षति : श्री चौहान (मुख्यमंत्री मप्र)

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य श्री प्यारेलाल खंडेलवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री चौहान ने कहा कि श्री खंडेलवाल ने आजीवन मूल्यों की राजनीति की। वे उन चंद राजनेताओं में से थे जिनका जीवन आइने की तरह साफ रहा। वे जनसंघ के समय से आज तक संगठन की मजबूती के लिये पूरे समर्पण से कार्यरत रहे। श्री खंडेलवाल के सान्निध्य में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की पूरी एक पीढी दीक्षित और संस्कारित हुई जिसमें वे स्वयं भी शमिल है। उन्होंने श्री खंडेलवाल के निधन को पार्टी, मध्यप्रदेश और देश के लिये अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक, राजनैतिक सेवाओं को हमेशा याद रखा जावेगा।

संगठन का विस्तार और कार्यकर्ताओं का हित प्यारेलालजी का मिशन था : तोमर (प्रदेश अध्यक्ष भाजपा एवं सांसद)

भाजपा के वरिष्ठ एवं वयोवृध्दा नेता प्यारेलाल जी खंडेलवाल का हमारे बीच से जाना पार्टी की बहुत बडी क्षति है। जिसकी किसी भी प्रकार भरपाई होना संभव नहीं । सदैव संगठन का विस्तार और कार्यकर्ताओं का हित प्यारेलाल जी मिशन रहा। आज प्रदेशभर में भाजपा के अनेक कर्मठ कार्यकर्ता श्री प्योरलाल जी की प्रेरणा प्राप्त कर पार्टी में अपना अभूतपूर्व योगदान दे रहे हैं। उनका हमारे बीच से जाना संगठन विस्तार की ह्ष्टि से ही नहीं बल्कि आदर्श राजनेता को खोने की ह्ष्टि से भी भाजपा के लिए एक बडी क्षति है। उन्हें उनकी सेवाओं के लिए सदैव याद किया जाएगा।

अनिल दवे, सांसद राज्यसभा -श्री खंडेलवाल ने अपना सारा जीवन पार्टी और समाज के लिए समर्पित कर दिया। इनका प्रदेश भाजपा के विकास में योगदान अविस्मरणीय है।

प्यारेलाल खण्डेलवाल विलक्षण जीवट के व्यक्ति थे : गिरिराज किशोर

भारतीय जनता पार्टी के नेता गिरिराज किशोर ने कहा कि प्यारेलाल खण्डेलवाल की जीवटता का इससे बडा प्रमाण क्या होगा कि उन्होंने पूर्वोत्तार जैसे राज्यों में पार्टी का गठन किया। उडीसा में भाजपा का विस्तार कर सत्ताा सोपान पर पहुँचाया। पश्चिम बंगाल, असम जैसे राजनैतिक दृष्टि से दुर्गम स्थानों पर पार्टी का परचम फहराने में उन्होंने रचनात्मक उर्जा लगायी। उनकी रचनात्मक दृष्टि हमेशा याद की जायेगी।

पार्टी का विस्तार उनकी दिवस की चिंता, रात्रि का स्वप्न था : माया सिंह (राज्यसभा सांसद)

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष और सांसद माया सिंह ने प्योलाल खण्डेलवाल के निधन पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी के विस्तार के लिये खंडेलवालजी समर्पित रहे। पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ता का हित चिंतन ही उनकी दिवस की चिंता और रात्रि का स्वपन् था। उन्होंने लाखों कार्यकर्ता गढे और संस्कारित किये। कुशल संगठक और राजनेता के रूप में उन्हें हमेशा याद किया जायेगा।

संगठन और पार्टी का आधार स्तंभ ढह गया : कैलाश सारंग

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग ने कहा कि प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन के बाद संगठन और पार्टी का एक स्तंभ ढह गया है। वे जीवन पर्यन्त देश, समाज और पार्टी के लिये समर्पित रहे। जीवन के 65 वर्षो तक अहर्निश उन्होंने समाज की सेवा की ओर राष्टभक्ति का परिचय दिया। सारंग ने कहा कि वे मित्र, सखा और सहयोगी थे। उनके निधन से अपूर्णनीय क्षति हुई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के कार्य को विस्तार देने के के लिये उन्होंने अनवरत कार्य किया और अविवाहित रहे। उनके आदर्शो पर चलना ही उस महान व्यक्ति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन से एक मार्गदर्शक चला गया : सोलंकी (राज्यसभा सांसद)

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद और महाराष्ट- के संगठन प्रभारी प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को महाराष्ट्र में जैसे ही वरिष्ठ नेता प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन का दुखद समाचार मिला, उन्होंने खंडेलवाल जी के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनके निधन से पार्टी ने एक विलक्षण मार्गदर्शक खो दिया है। प्रो.सोलंकी ने कहा कि प्रचारक के रूप में उनका जीवन हमारे लिए अनुकरणीय है। जीवन पर्यन्त संगठन उनके लिए सर्वोपरि रहा। उन्होंने जब प्रचारक के दायित्व से हटकर राजनीति में प्रवेश किया तो उन्होंने पितृ पुरुष ठाकरे जी के साथ प्रदेश भर में संगठन की जडें गहरी करने में सारी शक्ति होम कर दी। राजनीतिक क्षेत्र में उन्होंने नयी-नयी प्रतिभाएं गढीं और उनका मार्गदर्शन किया। प्रो.सोलंकी ने कहा कि प्यारेलाल खण्डेलवाल अंतिम सांस तक कार्यकर्ताओं के लिए सहज सुलभ रहे। रूङ्गण शैया पर भी उन्हें हमेशा संगठन और कार्यकर्ताओं की चिंता सताती रही। सोलंकी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना की है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल तथा मंत्री मंडल सदस्य द्वारा अपने वरिष्ठ नेता को दी गई श्रद्धांजलि

राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने राज्यसभा सदस्य श्री प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन पर गहन दुख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवगंत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है और शोक संतप्त स्वजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

संस्कृति मंत्री श्री शर्मा द्वारा खंडेलवाल के निधन पर शोक

संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सदस्य श्री प्यारेलाल खंडेलवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्माण में श्री खंडेलवाल का योगदान उल्लेखनीय है। कृषि, ग्रामीण विकास और खाद्य मंत्रालयों की सलाहकार समितियों के सक्रिय सदस्य के रूप में उन्होंने ग्रामीण भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से पार्टी ने एक प्रतिबध्दा, दूरदृष्टि और अनुभवों से समृध्दा नेता खो दिया है। मध्यप्रदेश के विकास के लिए श्री खण्डेलवाल की सेवाओं को हमेशा याद रखा जायेगा। श्री शर्मा ने शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

श्री अनूप मिश्रा द्वारा शोक व्यक्त

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुष तथा उर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता श्री प्यारेलाल खंडेलवाल का निधन एक ऐसे समर्पित व्यक्तित्व का हमारे बीच से चले जाना है जिन्होंने अपना व्यक्तित्व और कृतित्व से सदैव हम जैसे कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने सारा जीवन सादे तरीके से जिया और प्रेरणास्पद बने।

श्री मिश्रा ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने एवं शोक संतप्त परिवार को यह दुऱ्ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

श्री गोपाल भार्गव द्वारा शोक व्यक्त

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता श्री प्यारेलाल खंडेलवाल के निधन से हमने सिध्दाान्तों और कार्यों के प्रति प्रतिबध्दा रहे ऐसी शख्सियत को खो दिया जिसने सदैव समाज और देश के हित में काम किया। अपने सादे जीवन और उच्च विचार से उन्होंने हमेशा पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं को प्रेरणा प्रदान की।

श्री भार्गव ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने एवं शोक संतप्त परिवार को यह दुऱ्ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

डॉ. कुसमरिया द्वारा शोक व्यक्त

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। श्री कुसमरिया ने अपने शोक संदेश में कहा है कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत किये जाने में उनके द्वारा दिये गये योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जायेगा। डॉ. कुसमरिया ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिये ईश्वर से प्रार्थना की है।

गौरीशंकर बिसेन द्वारा शोक व्यक्त

लोक स्वास्थ्य यांत्रिक एवं सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि भाजपा ने एक अच्छा सांसद और पार्टी के प्रति निष्ठावान व्यक्ति को खो दिया। स्व. खंडेलवाल सदैव हमारे प्रेरणापुंज रहे है। उन्होंने हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति की चिन्ता की और उनके लिए संघर्ष करते रहे। श्री बिसेन ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने एवं शोक संतप्त परिवार को यह दुऱ्ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

गृह राज्यमंत्री कुशवाह द्वारा श्री खण्डेलवाल को श्रद्धांजलि

गृह राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य श्री प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। श्री कुशवाह ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री खण्डेलवाल सिद्धांतों के प्रति समर्पित और निष्ठावान जननेता थे। उनका निधन मूल्यों के लिये समर्पित व्यक्तित्व का अवसान है।

श्री कुशवाह ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति देने और शोक संतप्त परिवार को यह गहरा दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

श्रम एवं राजस्व राज्यमंत्री श्री वर्मा द्वारा शोक व्यक्त

श्रम एवं राजस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री करण सिंह वर्मा ने वरिष्ठ नेता श्री प्यारेलाल खण्डेलवाल के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। श्री वर्मा ने स्व. श्री खण्डेलवाल के निधन को राजनीति के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने और शोक संतप्त परिवार को दुऱ्ख सहन करने की क्षमता प्रदान करने की प्रार्थना की है।

मंत्रीद्वय द्वारा श्री खंडेलवाल को श्रद्धांजलि

शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद श्री प्यारेलाल खंडेलवाल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपनी श्रद्धांजलि दी है। श्रीमती अर्चना चिटनीस ने श्री खंडेलवाल को मूल्यों के प्रति समर्पित, कर्मठ एवं निष्ठावान नेता बताया है। वे एक ऐसे जननेता थे, जिनके अपने आदर्श और सिद्धांत थे और उनसे उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया। श्रीमती रंजना बघेल ने कहा कि श्री खंडेलवाल ने अपना पूरा जीवन संगठन की सेवा में बिताया। वे राजनीति के ऐसे केन्द्र बिंदु बन गये थे, जिनसे सभी वर्ग के लोग जुडे हुए थे। उनका सरल, सौम्य एवं मिलनसार व्यक्तित्व कई पीढी के लिए अनुकरणीय है। उनके निधन से मध्यप्रदेश ने एक सेवाभावी नेता खो दिया है।

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