लेखक परिचय

अनिल सैनी ‘अनि’

अनिल सैनी ‘अनि’

व्‍याख्‍याता समाजशास्‍ञ शिक्षा – एम.ए समाजशास्‍ञ, राजनीति विज्ञान , एम.कॉम (बीएडीएम), बी,एड., नेट व एम.फिल. समाजशास्‍ञ, पीजीडीसीए, पीजीडीआरडी, जन्‍म स्‍थान – सीकर राजस्‍थान गत दो तीन वर्षो से शिक्षा के क्षेञ में अध्‍यापन कार्य तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की कक्षाओं में अध्‍यापन कार्य

Posted On by &filed under कविता.


KASHMIRभारती के भाल को लज्‍जा रहा है देश क्‍यों ?
बेटों के शिश मुण्‍ड को देख कर भी चुप है क्‍यों ?
क्‍यों मुख अब रक्‍तलाल नहीं, क्‍या वीरों के रक्‍त में उबाल नहीं ?
क्‍यों बार-बार विवश है हम, क्‍या हम में स्‍वाभिमान नहीं ?

अब छोड दो खुला इन रणबाकुरों कों,
इन्‍हे मदमस्‍त हाथी की तरह रण में विचरने दो !
एक दिन ही इनके लिए काफी है,
इन्‍हे काश्‍मीर से चलने दो……
देखो फिर इनके हौंसले काश्‍मीर तो है ही क्‍या
नाप देगें लाहौर, रावलपिण्‍डी, कराची तक के फासलें!!

ये वीर है, जवान है
देश की आन,बान,शान है !
ये प्रचण्‍ड है, तूफान है
सीनों में इनके हिन्‍दुस्‍तान है !!

इनके हौसलें है अडिग हिमालय से ,
इनमें वीरता है समुद्र सी ….
ये शांत है थार से ,
इनमें तेजी है गंगा की धार सी

भारती के भाल को लज्‍जा रहा है देश क्‍यों
छोड दो इसके बेटों को…. चलने दो काश्‍मीर से …..

अनिल सैनी (अनि)

Leave a Reply

3 Comments on "भारती का भाल"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
sujeet dwivedi
Guest

ये एक सुंदर और देश प्रेम भाव प्रधान रचना है | कवी महोदय एक सार्थक बधाई के पात्र हैं और भविष्य में भी इस प्रकार की रचनाओं से अभिभूत करने के लिए निवेदित हैं.

अनिल सैनी ‘अनि’
Guest

उत्‍साहवर्धन के लिए धन्‍यवाद सुजीत जी …………

अनिल सैनी ‘अनि’
Guest
अनिल . अनि

धन्‍यवाद सुजीत जी ……………

wpDiscuz