लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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rssखबर है कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच इस साल दो जुलाई को एक बड़ी इफ्तार पार्टी आयोजित करने वाला है। इस पार्टी में देश के प्रमुख मुसलमान नेताओं के अलावा सभी मुस्लिम देशों के राजदूतों को भी दावत दी जा रही है, पाकिस्तानी राजदूत को भी। यह छोटी-मोटी खबर नहीं है। बड़ी खबर है। यह बड़ी खबर इसलिए है कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रमुख शाखा है। इस मंच की स्थापना तत्कालीन सर संघ-चालक कुप्प सी. सुदर्शन ने की थी। वे यह महसूस करते थे कि संघ और मुसलमानों के बीच जो बड़ी दीवार खड़ी हो गई है, उसे किसी तरह तोड़ना चाहिए।

कु सी सुदर्शन को इस्लाम के बारे में जितना ज्ञान था, उतना आमतौर से मुस्लिम नेताओं को भी नहीं था। उन्होंने इस्लाम पर लगभग हर किताब पढ़ डाली थी। सर संघचालक बनने के बाद भी वे मेरे संन्यासी पिता से किताबें मंगवाते रहते थे। संघ-प्रमुख के तौर पर यह उनका अनुपम योगदान माना जाएगा कि उन्होंने मुसलमानों को संघ से जोड़ा और संघ को मुसलमानों से! आपात्काल के दिनों में जो मुसलमान नेता उनके साथ जेल में रहे, उन्होंने इस प्रक्रिया को मजबूत बनाया।

इस मुस्लिम मंच का काम स्वयंसेवक इंद्रेशकुमार ने संभाला और उन्होंने इसमें चार चांद लगा दिए। उनके सहज और आकर्षक व्यक्तित्व ने हजारों मुसलमान भाई-बहनों को इस मंच के साथ सक्रिय कर दिया। उन्होंने गोवध का खुला विरोध किया और वंदेमातरम का डटकर समर्थन किया। उनकी महिला शाखा आजकल ‘तिहरे तलाक’ के विरोध में आवाज बुलंद कर रही है। यह मंच मुसलमानों को इस्लाम का दृढ़तापूर्वक पालन करने को कहता है लेकिन उन्हें यह सांप्रदायिक और अराष्ट्रीय तत्वों से बचने की प्रेरणा देता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि देश की जिन दो शक्तियों के बीच 36 का आंकड़ा था, अब 63 का हो रहा है। दोनों एक-दूसरे के लिए धीरे-धीरे नरम पड़ेंगे। कोई आश्चर्य नहीं कि किसी दिन संघ के दरवाजे भी हर भारतीय के लिए खुल जाएं। इस्लाम का भी जो गौरवशाली भारतीय रुप है, वह सारे विश्व के इस्लाम का मार्गदर्शन करेगा। कु सी सुदर्शन के द्वारा लगाई गई यह सद्भाव की बेल यदि फलती-फूलती रही तो मानकर चलिए कि कुछ ही दशकों में भारत के इतिहास का एक नया अध्याय शुरु होगा।

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4 Comments on "इफ्तार पर बड़ी खबर"

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डॉ. मधुसूदन
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डॉ.मधुसूदन

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच बिलकुल सही राह पर है। संघ भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही है। राष्ट्रीयता ही उसका वास्तविक निकष है।
आगे बढो, अवसर आ गया है।आज का विवेक यही कहता है।पूरे विश्व में, इस्लाम को भी इस ज़रुरत को समझ कर लाभ लेनेका समय है।
वैदिक जी ने सही आकलन प्रस्तुत किया है। और इन्द्रेश जी ने सही अभियान चलाया है। धन्यवाद।

आर. सिंह
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डाक्टर वैदिक, आपने भविष्य का बड़ा सुनहरा ताना बाना बुना है. आपने लिखा है,”कोई आश्चर्य नहीं कि भविष्य में संघ के दरवाजे हर भारतीय के लिए खुल जाए.”पर आज की जमीनी हकीकत क्या है?जो संघी आये दिन मुसलमानों को पाकिस्तान खदेड़ने के लिए तैयार रहते हैं,वे कभी भी अंतर मन से इसका समर्थन नहीं करेंगे.जो अवसर ढूंढते रहते हैं कि कब हिन्दू और मुसलमानों को आपस में लड़ा दिया जाये,वे कैसे इसको स्वीकारेंगे?उनकी निगाह में तो हिन्दू और मुस्लिम दो राष्ट्र हैं.इनको आप कैसे समझाएंगे?

mahendra gupta
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यह भी सम्भव है कि कुछ राष्ट्र इसमें शामिल ही न हो , क्योंकि वे guilty conscious होने की वजह से साहस न जुटा सके , यह भी सम्भव है कि कुछ हमारे ही मुस्लिम नेता व मौलवी न आएं

Anil Gupta
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पिछले वर्ष भी मुस्लिम राष्टीय मंच ने लगभग दो दर्ज़न मुस्लिम देशों के राजदूतों के साठ एक कार्यक्रम रख था जिसमे अनेकों बिंदुओं पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई थी! हाल में ही श्री इंद्रेश जी ने मेरठ में बताया था कि उस कार्यक्रम में मुस्लिम देशों के राजदूतों ने स्वीकार या था कि कुरान में या हदीस में कहीं भी गोमांस भक्षण का समर्थन नहीं किया गया है! उन्होंने यह भी बताया था कि कुरान का सबसे बड़ा अध्याय “सुरा अल बकर” है!और बकर का अर्थ अरबी भाषा में ‘गाय’ होता है! जब इस बारे में मुस्लिम देशों के राजदूतों का… Read more »
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