लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, जिसमें जदयू और भाजपा शामिल है, ने बिहार विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीत का परचम लहरा दिया है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राजग को तीन चौथाई बहुमत मिला है। उसके 206 उम्मीदवार जीत गये हैं। चुनाव आयोग की ओर से घोषित नतीजों के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड 115 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को 91 सीटें मिली हैं। 2005 के विधानसभा चुनाव के हिसाब से सबसे ज्यादा फायदे में भारतीय जनता पार्टी रही। उसे पिछली विधानसभा के 55 सीटों के मुकाबले 36 अतिरिक्त सीटें मिली हैं। पिछली बार के मुकाबले नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने अपनी सीटों में 27 की बढ़ोतरी की। लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल की सीटें 54 से घटकर 22 हो गई हैं। राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को 7 सीटों का नुकसान हुआ और वह 10 से 3 पर आ गए। कांग्रेस 9 से 4 पर आ गई जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी अपने दो विधायकों से हाथ धो बैठी. उसे सिर्फ 1 सीट मिली है।

बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम की कुछ विशेष बातें-

-गुजरात के बाद दूसरी बार जनता ने विकास के लिए मतदान किया।

-बिहार चुनाव का संदेश-जो विकास करेगा, वही जीतेगा।

-बिहार के महारोग जातिवाद को ध्‍वस्‍त करते हुए जात-पांत से ऊपर उठकर मतदान किया।

-पिछले बार के चुनाव में ‘लालू हटाओ’ का नारा था यानी नकारात्‍क प्रचार अभियान, लेकिन इस बार सकारात्‍मक प्रचार अभियान था,’एनडीए ने विकास किया, इन्‍हें फिर से मौका दो।’

-मतदाताओं ने बाहुबलियों को नकार दिया।

-हिंसामुक्‍त चुनाव प्रक्रिया संपन्‍न हुए।

-राहुल गांधी का जादू नहीं चला। राहुल ने जिन 19 विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं कीं, वहां केवल 1 स्‍थान पर कांग्रेस की जीत हुई। कांग्रेस को पिछले चुनाव में आए 9 के मुकाबले में सिर्फ 4 सीटों से संतोष करना पड़ा।

-बिहार में वामपंथी ताकतें अच्‍छी स्थिति में रहती थी, लेकिन इस बार उसकी झोली में भी पिछले चुनाव में आए 9 के मुकाबले में सिर्फ 4 सीटें ही आईं।

क्‍या बिहार चुनाव ने भारतीय राजनीति की दिशा तय कर दी है। बिहार चुनाव को लेकर आप क्‍या सोचते हैं, कृपया अपने विचार से सबको अवश्‍य अवगत कराएं।

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43 Comments on "बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम पर परिचर्चा"

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SUNITA REJA
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सर, थिस टाइम पब्लिक ऑफ़ बिहार सेलेक्टेड राईट चीएफ़ मिनिस्टर एंड गुड गवर्मेन्ट, आल पब्लिक ऑफ़ बिहार पार्ट ऑफ़ बधाई और बिहार ने पूरे भारत वर्ष को एक मेसेज दिया की इलेक्शन मैं जीत उसकी होगी जो जनता के हित और इमानदारी से काम करेगा . चुनाव जाती, धरम और रेगिओनलिस्म से नहीं जीत सकते , जीतने के लिए जनता के लिए समर्पित पोलितिसिंस और इमानदार राजनेता की जरूरत है . विहार चुनाव पूरे भारत वर्ष के लिए एक उदहारण पेश करता है की जो काम करेगा वोही जीतेगा . धन्यवाद, सुनीता रेजा, मुंबई

shrikant upadhayay
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भारत में आजादी के छह दसक बाद तीन राज्य गुजरात , छत्तीसगढ़ , और अब बिहार के जनता ने अपना अभिमत वोट के माध्यम से रखा है की जो राजनैतिक पार्टी राज्य और रास्ट्र के विकाश के लिए अपना १००% देगा केवल उन्ही को राज करने का मोका जनता देगी ! लेकिन पुरे भारत को इस विषय को स्वीकारना होगा जैसे बिहार ने स्वीकार किया है बिहार चुनाव भारत को दो भारत १ गरीबो का भारत तो २ अमीरों का भारत कहने वालो के मुह पर करारा तमाचा है की भारत एक है वो है विकाश शील भारत न की… Read more »
नरेश भारतीय
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नरेश भारतीय
बिहार के चुनाव परिणाम देश के लिए दिशा निर्धारक प्रतीत होते हैं. लगता है जातीय समीकरणों की बरसों से चली आ रही चुनावी राजनीती के लिए यह एक चेतावनी भरी चुनौती है. यह चुनौती बिहार कि जनता ने दी है और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को अपनी अपनी अपनी रीति नीति पर अब नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता महसूस होनी चाहिए. इसे विकास की जीत बताया जा रहा है. कुशल प्रशासक-द्वय नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जीत. इसी दृष्टि से यदि गुजरात की संतुलित एवं जनहित परक नीतियों के निर्धारक नरेन्द्र मोदी की उपलब्धियों का बिना… Read more »
डॉ. सी. पी. राय
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बिहार चुनाव में नितीश को स्वीकारने वालो ने तों पूरे गठबंधन को समान वोट दिया लेकिन कट्टर भाजपाइयों ने केवल भा जा पा को वोट दिया | उनकी रणनीति थी नितीश को नीचे ले जाना | पर आंधी नितीश कि थी इसलिए वो बच गए | चुनाव परिणाम अपनी कहानी स्वयं बयान कर रहे है | नितीश को क्या इन फासिस्ट ताकतों से सावधान रहना होगा ? क्या नितीश को ये पता चल पायेगा कि भा जा पा ने उनको नीचे करने कि कोशिश कि | जो बिहार को à ��ानते है ,जो बिहार कि राजनीति को जानते है ,जो… Read more »
Rajesh
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आप का विचार साम्प्रदायक है और बिहार की जनता के खिलाफ है. आप फिर सम्प्रदायकता को बढ़ाने की कोशिश कर रहे है शायद आप लालू या कांग्रेस के समर्थक है.आप नहीं चाहते है की बिहार की जनता जागरूक हो

Santosh.K
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बिहार चुनाव राजनीती नहीं विकास का चुनाव था आज का मतदाता जाग चूका हैं एक और जहाँ जनता कोई भी व्यक्ति टीक नहीं इसलिए वोट नहीं करना चाहता हैं ऐसे समय केवल जो सरकार विकास करेगी उसे ही सत्ता मिलेगी

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