लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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biharमृत्युंजय दीक्षित
देश की राजनीति आजकल बहुत ही सुविधाजनक हो गयी है किसी भी दल को अब देश के विकास की नहीं अपितु महज अपने वोटबैंक को दुरूस्त रखने की हो गयी है। जब पूरे विश्व में भारत का मान ऊंचा हो रहा है तथा भारत संयुक्तराष्ट्र महासभा में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने की ओर बढ़ रहा है उस समय देश के अंदर कुछ हिस्सों में कुछ ऐसी साजिशें रची जा रही हैं। जिससे कि देश में सामाजिक समरसता का वातावरण खराब हो और विगत 60 वर्षो से अधिक समय से शासन करने वाले लोग जनता को यह बेवकूफ बना सकें कि सत्ता को चलाना केवल उन्हीं को आता है। आज देश में कुछ ऐसी सुनियोजित घटनाएं घट रही हैं कि देश के सभी तथाकथित सेकुलर नेता और मीडिया घटनाओं की तह तक जाये बगैर पीएम मोदी की सरकार केा बदनाम करने के लिए और अपनी फोटो खिंचवाने के लिए वहा पहुंचने लग जाते हैं। अभी हाल ही में दादरी कांड हुआ जिसमें सभी दलों ने अभी तक हंगामा बरपा रखा है। दादरी कांड को यह सभी दल अभी तक भुनाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन यह दल अपने तथाकथित प्रयासों में सफल नही हो सके।
जब दादरी कांड पर मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिशें विफल होने लग गयी तब अरहर की दाल का मुददा आ गया । अरहर की दाल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी राजनैकि दलों की ओर से गलत प्रचार किया गया और जिसका लाभ जमाखोरों ने जमकर उठाना प्रारम्भ कर दिया। जब अरहर की दाल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार व पीएम का कड़ा रूख सामने आया और छापामारी शुरू कर दी गयी तो इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि छापेमारी में सबसे अधिक अरहर की दाल नागपुर में जब्त की गयी है तब बिहार में नीतिश के नये दोस्त लालू प्रसाद यादव ने कहना चालू कर दिया कि सबसे अधिक जमाखोर भाजपा और संघ के लोग हैं। आजकल लालू प्रसाद यादव को हर चीज में मोदी संघ और भाजपा की साजिशें ही नजर में आ रही है। उनके मन में एक अजीब प्रकार से भय उत्पन्न हो गया है कि अगर कहीं विधानसभा चुनावों के बाद बिहार में भाजप की पूर्ण बहुमत की सरकार आ गयी तो स्वयं लालू यादव सहित उनके परिवार के कई सदस्यों सहित उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों को जेल की हवा आजीवन खानी पड़ सकती है और उनका राजनैतिक कैरियर पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा। वे कभी संसद का मुंह नहीं देख सकेंगे।
अभी दादरी कांड पर मुस्लिमों के समक्ष अपनी राजनीति को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं को अवसर प्राप्त हुआ ही था कि हरियाणा फरीदाबाद के निकट सुनपेड़ा गांव में दो परिवारों की आपसी रंजिश में दलित परिवार के घर में आग लगाकर दो मासूमों की हत्या कर दी गयी। यह घटना जिस प्रकार से घटित हुई व या फिर करवायी गयी उससे साफ पता चल रहा है कि यह एक आपराधिक वारदात है। लेकिन पता नहीं क्यों एक सुनियोजित चाल के तहत सभी दलों के नेता एक के बाद एक सुनपेड़ा गांव पहंुचने लग गये और दादरी के बाद एक और पर्यटक स्थल बन चुका है। सबसे पहले वामपंथी नेत्री वृंदा करात अपने घड़ियाली आसंू बहाने के लिए सुनपेड़ा गांव पहुच गयीं और फिर पीछे से राहुल गांधी भी पहुंच गये। यह सभी लोग केवल और केवल अपनी राजनीति को चमकाने के लिए सुनपेडा़ गंाव पहुंचे हैं ताकि किसी न किसी प्रकार से पीएम मोदी और भारतीय जनता पार्टी को जनता के बीच पहले मुस्लिम और अब फिर दलित विरोधी साबित किया जा सके। अब यह सभी दल बिहार में दलितों के बीच ऐसी हर घटना का बहुत ही गलत ढंग से पेशकरने जा रहे हैं। उधर विदेशराज्य मंत्री वी के सिंह के एक विवादित बयान के बाद सभी दल वी के सिंह को दलित विरोधी साबित करने पर तुल गये हैं तथा बिहार के सभी एनडीए सहयोगियों ने भी उनका इस्तीफा मांग कर भाजपा को परेशनी में डाल दिया है। वहीं दूसरी ओर इसमें सबसे तेजी आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय अनसूचित जाति- जनजाति आयोग भी गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। विदेशराज्य मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जा रही हैं।वहीं बिहार के सभी भाजपा विरोधी दलो का कहना है कि भाजपा शासित हरियााणा राज्य में जंगलराज कायम हो गया है तथा दलितों पर अत्याचार हो रहा है। इस प्रकर की घटनाओं पर भाजपा ने भी अपना आक्रामक बचाव किया है। भाजपा का जोरदार झंग से कहना है कि दलितो पर सर्वाधिक अत्याचार तो कांग्रेस के शासनकाल में हुआ था तब राहुल गांधी कहां चले गये थे। खबर है कि बसपा नेत्री मायावती,नीतिश- लालू का गठबंधन और राहुल गांधी अपने आप को बढ़ा पाक साफ घोषित करने के लिए जोरदार अभियान चलाने वाली हैं जिसमें यह सभी बातें जेार- शोर से उठायी जायंेगी और पीएम मोदी व केंद्र सरकार को मुस्लिम व दलित विरोधी सिद्ध किया जायेगा। यह सभी दल इन घटनाओं का जिस प्रकार से राजनैतिक दोहन करत हैं व कर रहे हैं उससे साफ पता चल रहा है कि इन दलों को पीड़ित परिवारों के साथ कोई विशेष सहानुभूति नहीं है। यह बात बिलकुल साफ हो गयी है कि हरियाणा सरकार ने दलित परिवार को जिंदा जलाने की घटना की सीबीआई जांच कराने का फैसला कर लिया है और जल्द ही सच्चाई सबके सामने आ जायेगी। इन घटनाओं व मोदी सरकार के खिलाफ अभियान का एक सच यह भी है कि यह सबकुछ एक सोची समझी साजिशों के तहत हो रहा है। भारत पहली बार संयुक्तराष्ट्र महासभा में पूरी ताकत के साथ स्थायी सदस्यता के लिए प्रयास कर रहा है जिसका उसे भारी समर्थन मिल रहा है तथा यह बात भारत विरोधी आंतरिक व वाहय ताकतों को पसंद नहीं आ रही हैं। कुछ ताकतें भारत को मजबूत देश के रूप में नहीं उभरने देना चाहती हैं। वहीं ताकतें कांगें्रस व सेकुलर दलों का सहारा लेकर इस प्रकार की साजिशें रच रही है। इसलिए बिहार की जनता को इस बार अब बचे हुए चरणों में बहूत ही अधिक सतर्क होकर मतदान करना है।यह सभी ताकतें यह प्रसास कर रही है कि भारत को सबसे अधिक असहिष्णुता वाला देश घोषित किया जा सके। वैसे भी इन घटनाओं को मीडिया के माध्यम से ऐसे पेश किया जा रहा है कि दलितों, मुस्लिमेंा, महिलाओं व किसानों पर अत्याचार आदि की घटनाएं अभी से घटनी शुरू हुई हैं जबकि इनसे भी खराब वातावरण तो इन्हीं दलों की सरकारों मे हो रहा था किसी को बदनाम करने वा साजिश करने से पहले इन सभी दलों को अपने गिरेबां में झांकना चाहिये।

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1 Comment on "बिहार चुनावों में साजिशों पर साजिशें"

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आर. सिंह
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पूर्ण रूप से एक पक्षीय नजरिया और कुछ हद तक बकवास. .

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