लेखक परिचय

श्रीराम तिवारी

श्रीराम तिवारी

लेखक जनवादी साहित्यकार, ट्रेड यूनियन संगठक एवं वामपंथी कार्यकर्ता हैं। पता: १४- डी /एस-४, स्कीम -७८, {अरण्य} विजयनगर, इंदौर, एम. पी.

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-श्रीराम तिवारी-

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हिंदूवादी होने का स्वांग भरने वाली राजनैतिक पार्टियां और उनके हमदर्द उत्तर प्रदेश के रामपुर धर्मांतरण-काण्ड पर लाख रोना रोएं, किन्तु इस घटना से यह तो पूर्णरूपेण सिद्ध हो गया कि भाजपा हिन्दुओं की रक्षा नहीं कर सकती। आजम खान या किसी और नेता को कोसने के बजाय ‘संघ परिवार’ और भाजपा अपने गरेवान में झांककर देखे कि उसके ढ़पोरशंखियों के बयानों से प्रभावित होकर देश के किसी एक भी अल्पसंख्यक ने अपना धर्मांतरण नहीं किया, जबकि हिन्दू बहुसंख्यक वर्ग की कट्टर छवि की बदनामी के झंडे अंतराष्ट्रीय स्तर पर गाड़े जा चुके हैं। भाजपा ने यूपी में सदस्य्ता अभियान  के तहत जिन बाल्मीकियों को अपनी पार्टी का सदस्य बनाया, वे सभी रातों-रात धर्मपरिवर्तन कर गए। वे न केवल हिंदुत्व छोड़ गये बल्कि  ‘सपा’ में  भी चले  गये। अब यदि भाजपा दुनिया की नंबर वन पार्टी किसी  तरह से बन भी गयी तो उसका मतलब क्या रह जाएगा ?  इस तरह से तो उसके दोनों ही मंसूबे  पूरे होने से रहे ! न तो हिंदुत्व कायम हो पायेगा और न ही वह तथाकथित बेहतर सुशासन या सरकार दे पाएगी। सदस्य्ता के हो हल्ले से किसानों और मजदूरों को ज्यादा दिनों तक भरमाया नहीं जा सकता। मोदी जी की कार्पोरेट निर्मित छवि भी ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगी। भाजपा रुपी चौबे कहीं छब्बे बनने के चक्कर में  दुब्बे  ही न रह जाएं!

भाजपा के  सदस्यता अभियान को मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में वांछित प्रतिषाद नहीं मिल रहा  है। हिन्दू समाज के और सवर्ण जनता के ठंडे रिस्पांस ने  भाजपाई दिग्गजों की चिंता बढ़ा दी है। सवा दो करोड़ के लक्ष्य को देखते हुए प्रदेश संगठन फिसड्डी साबित हुआ है। नवंबर से अब तक 67 लाख सदस्यों का रजिस्ट्रेशन होना बताया जा रहा है। इसमें ५ लाख के लगभग  बोगस होने की सम्भावना से उनके नेता भी  इंकार नहीं  नहीं कर रहे हैं। मोदी जी और शाह की जोड़ी ने वैसे भी एमपी छग को निशाने पर ले रखा है। वे इन सरकारों को फूटी कौड़ी नहीं दे रहे हैं। किसान आत्महत्याओं और ओवर ड्राफ्ट से शिवराज एवं रमन सिंह की बेचैनी  तो बढ़ ही रही है ,साथ ही पार्टी को जनता का समर्थन तेजी से घाट रहा है। इन हालात में भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी तो बोगस सदस्यों से भी नहीं बांया जा सकता।

यह बहुप्रचारित है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी सदस्य संख्या बढ़ाकर इतिहास रचने की मुहिम में जुटी है, इस आपाधापी में वह कहीं-कहीं हास्यापद स्थिति में आ चुकी है। मध्य प्रदेश में कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। यहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की प्रदेश इकाई के सचिव बादल सरोज को भी भाजपा का सदस्य बना दिया गया है। खास बात यह कि उन्हें एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार सदस्य बनाया गया है। माकपा के बादल सरोज ने भाजपा के सदस्यता अभियान पर सवाल  भी उठाए हैं। उनका तीखा आरोप तो जन-चर्चा का विषय बन चुका है कि भाजपा फर्जी सदस्य बनाए जा रही है। उनका कहना है कि इस  भाजपा ने उन्हें भी अपना सदस्य बना लिया है। उन्होंने बताया कि उनके दो मोबाइल नंबर हैं, दोनों ही मोबाइल पर उनके पास संदेश आया है कि आपने भाजपा की सदस्यता ली है, इसके लिए आपको धन्यवाद। बीजेपी के अनुसार इस समय पार्टी के सदस्यों की संख्या नौ करोड़ के आसपास पहुंच गई है। जबकि सदस्यता के लिए आए मिस्ड कॉल की संख्या 15 करोड़ से ज्यादा है। इनके सदस्य तो हर क्षेत्र में अधिक होते हैं किन्तु ग्रामीण और निकायों के चुनावों में बाज दफा उनके कुल प्राप्त  वोट पार्टी सदस्य संख्या से कम ही होते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक दिल्ली स्थित देश के एक नामी स्कूल रेयान इंटरनेशनल स्कूल में बीजेपी की सदस्यता अभियान की खूब खिल्ली उड़ाई जा रही  है। कैसे टीचर और छात्रों को बीजेपी ज्वाइन करने के लिए मजबूर किया गया । हालाँकि  बाद में स्कूल की मैनेजिंग डायरेक्टर ग्रेस पिंटो ने इस बात की पुष्टि की कि स्कूल में सदस्यता अभियान चलाया तो  गया लेकिन यह पूरी तरह स्वैच्छिक ही था। किसी पर ‌इसके लिए कोई दबाव नहीं है। यद्दपि स्कूल प्रशासन कह रहा है कि यह अभियान स्वैच्छिक है लेकिन शिक्षकों और बच्चों का कहना है कि ये सच नहीं है। कुछ शिक्षकों ने तो दावा किया है कि उनकी सैलरी भी रोक ली गई, जब तक वो बीजेपी में सदस्यता न ले लें। शिक्षकों, बच्चों और उनके अभिभावकों ने भी ये बात कही है कि उन्हें वॉट्सऐप मैसेज मिले हैं जिनमें बीजेपी की सदस्यता लेने के लिए एक टोल फ्री नंबर 18002662020 दिया गया है। इस नंबर पर कॉल करने पर उसके रिप्लाई में एक मैसेज आता है, जिसमें बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता का नंबर आता है। इसका मतलब कि आप बीजेपी के सदस्य हो गए।

बीजेपी का मानना है कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है लेकिन कांग्रेस की गोवा इकाई ने भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान के विश्व रिकार्ड बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा राज्य में अपने चार लाख पंजीकृत सदस्य होने का दावा करती है, इसके बावजूद इसे जिला पंचायत चुनाव में इससे भी कम वोट मिले हैं। कांग्रेस सचिव दुर्गादास कामत ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि भाजपा ने इस साल जनवरी में चार लाख लोगों के पार्टी से जुड़ने का दावा किया है, जबकि मार्च में हुए जिला पंचायत चुनाव में इसे जो वोट मिले हैं, वह इसकी तुलना में बहुत कम है। कामत ने कहा, “गोवा में जिला पंचायत चुनाव ने भाजपा के राष्ट्रव्यापी सदस्यता अभियान के दावों की पोल खोल दी है। भाजपा को सिर्फ 1,50,674 वोट ही मिले हैं, जबकि जनवरी में इसने अपने सदस्यों की संख्या चार लाख पहुंच जाने की बात कही थी। तो क्या इसका मतलब यह है कि भाजपा के दो लाख से अधिक सदस्यों ने अपनी ही पार्टी के लिए मतदान नहीं किया, जिसकी सदस्यता के लिए उन्होंने हस्ताक्षर किए।”

हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसके सदस्यों की संख्या 8.8 करोड़ हो जाने और इसके विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन जाने का दावा किया था। जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के 8.6 करोड़ सदस्यों को पार कर गई है। कामत ने कहा कि गोवा में इसके सदस्यता अभियान की धोखाधड़ी ने देशव्यापी स्तर पर बनाए जा रहे सदस्यों की संख्या को लेकर इसके झूठ का छोटा सा नमूना पेश किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने यह जरूर स्वीकारा की चुनाव में कम वोट मिले, लेकिन यह दावा भी किया कि राज्य में भाजपा के सदस्यों की संख्या चार लाख हो गई है। पारसेकर ने कहा, “जिला पंचायत चुनाव के अंतर्गत सभी नगरनिगम नहीं आते। इसका मतलब है कि सभी सदस्यों ने वोट नहीं किया।” वहीँ दूसरी और गुजरात बीजेपी का दावा है कि गुजरात में बीजेपी की सदस्यों की संख्या एक करोड़ हो गई है।

पार्टी की गुजरात इकाई के अनुसार राज्य में उनकी सदस्यता मुहिम सफल हुई और गुजरात में सदस्यों की संख्या एक करोड़ हो गई। चुनाव में जनता से पार्टियाँ वादा करती है कि ग़रीबी ख़त्म होगी, भ्रष्टाचारियों को जेल में डाला जायेगा, महंगाई ख़त्म होगी, सुशासन का राज होगा, बेघरों को घरों को घर मिलेगा, लेकिन गद्दी पर बैठते ही वह अमीरों की सेवा में लग जाती हैं। बीजेपी ने अपना रंग दिखा दिया है। चुनाव में फ़ायदा पहुँचाने वाले अडानी को उसने 390 एकड़ ज़मीन दे दी। एसबीआई की एक विदेशी शाखा से एक प्रतिशत ब्याज पर छह हजार करोड़ का लोन दिला दिया गया। कच्चे तेल का दाम बढ़ाकर अंबानी को उसने करोड़ों करोड़ का लाभ पहुँचाया। कैग समिति की रिपोर्ट है कि गुजरात सरकार ने 15,000 हज़ार करोड़ का लाभ अडानी, रिलांयस और एस्सार ग्रुप को पहुँचाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने चुनावी वादे से पीछे हट चुके हैं। उन्होंने 15-15 लाख काला धन नागरिकों को देने का वादा किया था, अब वे कह रहे हैं कि मुझे मालूम ही नहीं है कि विदेशी बैंकों में काला धन कितना है? मंहगाई बढ़ती जा रही है, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा पर नीतियां हो विफल हो रही हैं। प्रभु जी के लम्बे चौड़े दावों  बावजूद रेलों के एक्सिडेंट हो रहे हैं, सांसद तक लुट रहे हैं। स्मार्ट सिटीज बयानों तक सीमित हो गयी हैं। बहुचर्चित स्वच्छता अभियान विद्या बालन के शौचालय विज्ञापन पर अटका हुआ है। कानून व्यवस्था में कोई सुधार न होकर अपराधों में बढ़ोत्तरी हो रही है। भ्रष्टाचार पर किसी क्षेत्र में काबू नहीं पाया जा सका है। मोदी जी चौड़ा सीना कर दावा कर रहे हैं कि उनके शासन में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। श्रम क़ानून को पूंजीपतियों के हित में बदल दिया गया है। मोदी सरकार दावा कर रही है कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के तहत किसानों को चार गुना मुआवजा मिलेगा, लेकिन बीजेपी शासित राज्यों में हकीकत कुछ और ही है। हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को बाजार भाव का सिर्फ दो गुना मुआवजा ही मिलेगा। किसानों पर मौसम की मार पड़ी है उसपर मोदी जी सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं। मन की बात कर अपने बिल को जायज ठहरा रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा पिछले दस महीनों में सिर्फ कुछ टोटके भर करती रही है। जमीन पर कोई ठोस काम वह नहीं कर सकी है। इसलिए जनता का ध्यान भावनात्मक मुद्दों पर डाइवर्ट करना भाजपा की मज़बूरी है।

भाजपा का सदस्य बनने के लिए सिर्फ एक मिस्ड कॉल की दरकार होती है। जबकि सीपीएम का मेंबर बनने के लिए -एक सर्वगुण-सम्पन्न, ईमानदार और मेहनतकश इंसान के लिए जिंदगी भर अन्याय के खिलाफ लड़ना पड़ता है। तब भी जरूरी नहीं कि  मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य्ता मिल ही जाए। यदि भाजपा की तरह मेम्बरशिप बढ़ने का फार्मूला वामपंथी पार्टियां अपनाती तो वे भी ब्रिटेन की लेबर पार्टी जैसी कभी की सत्ता में आ जाती। भाजपा का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना  है। वामपंथ का  उद्देश्य  इस शोषण उत्पीड़न की पूंजीवादी -सामंती व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करना है ।

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