लेखक परिचय

गोपाल गोयल

गोपाल गोयल

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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-गोपाल गोयल-

1.उल्‍टे अक्षरों से लिख दी भागवत गीता(Pen)

आप इस भाषा को देखेंगे तो एकबारगी भौचक्‍क रह जायेंगे। आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण (शीशे‌) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। इस मिरर इमेज किताब को दादरी में रहने वाले पीयूष ने लिखा है। मिलनसार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।
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2.सुई से लिखी मधुशाला(Needle)

दादरी के पीयूष ने “एक ऐसा कारनामा” कर दिखाया है कि देखने वालों आंखें खुली रह जाएगी और न देखने वालों के लिए एक स्पर्श मात्र ही बहुत हैI
पीयूष ने पूछने पर बताया कि आपने सुई से पुस्तक लिखने का विचार क्यों आया ? तो पीयूष ने बताया कि अक्सर मेरे से ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत पड़ती है। पढ़ना उसके साथ शीशा, आखिर बहुत सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक “मधुशाला” को करीब 2 से 2.5 महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे जैसे मोतियों से पृष्ठों को गुंथा गया हो, उभरे हुए हैं जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी “मधुशाला” दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।
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3.मेंहदी से लिखी गीतांजलि(Mehndi Cone)

पीयूष ने एक ऑर नया कारनामा कर दिखाया उन्होंने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता “रविन्द्रनाथ टैगोर” की विश्व प्रसिद्ध कृति गीतांजलि को “मेंहदी कोन” से लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए। इसको लिखने में 17 कोन व् दो नोट बुक प्रयोग में आयीं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्तशती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेज़ी दोनों
भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैंI और “रामचरितमानस” (dohe, sorta and chopai) को भी लिख चुके हैं।
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4.कील से लिखी ‘पीयूष वाणी'(Iron Nail)

अब पीयूष ने अपनी ही लिखी पुस्तक “पीयूष वाणी” को कील से ए-4 साईज की एलुमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि आपने कील से क्यों लिखा है? तो उन्होंने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक मधुशाला” को लिख चुके हैं। तो विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्होंने ए-4 साइज के एलुमिनियम शीट पर लिख डाला।
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5.कार्बन पेपर की मदद से लिखी ‘पंचतंत्र'(Carbon Paper)

गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णु शर्मा द्वारा लिखी “पंचतंत्र” के सभी (पाँच तंत्र, 41 कथा) को लिखा है।
पीयूष ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे।
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