लेखक परिचय

कुमार विमल

कुमार विमल

पीएचडी छात्र ( भारतीय प्रोद्योगकी संस्थान दिल्ली ) अनुसन्धान प्रशिक्षु ( रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन )

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           नीम बहुत ही गुणकारी वृक्ष है , गाँव  देहात के लोग काफी समय से व्यापक रूप से      इसका  इस्तमाल करते रहे है । नीम की पत्तियां, छाल, नीम के फल सभी बहुत ही लाभकारी है   हमारे पुर्वज  इसके गुणों से अच्छी तरह परचित थे,  वो यह जानते थे कि  नीम के वृक्ष में अन्य पेड़  की अपेक्षा अधिक ओक्सिजन होती है | इसी कारण हमारे बुजुर्ग सदियों से घरो के समीप नीम   के पेड़ लगाते रहें  हैं | आयुर्वेद में तो इसे  “सर्वरोग निवारण ” कहा गया है 


नीम में कीटाणु नाश करने की अदभुत क्षमता है। नीम की दातुन करने से दातं स्वस्थ और  मजबूत होते है । गाँव देहात के तथाकाहित नॉन इलीट लोग सदियों से दातुन इत्यादी में इसका
उपयोग करते रहे है । दातुन करने से न केवल कीटाणुओ का नाश होता है बल्कि इसे चवाने से लार भी जादा बनता है जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है ।

लेकिन आजकल पड़े लिखे इलीट लोग इसका इस्तमाल नहीं करते इसका उपयोग करना  गँवारता की निशानी समझते हैं  इसके विपरीत,विज्ञापनों के मायाजाल में पर  कर हम कोलगेट ,क्लोज अप, पेप्सोडेंट,सिबाका  इत्यादी का उपयोग करना आधुनिकता की निशानी  मान बैठे हैं । neemविज्ञापन के मकरजाल में हम कुछ यूँ बंध जाते है की पढे लिखे होकर भी सामान्य बुद्धि का उपयोग न कर दिखावे की दुनिया को यथार्थ मान लेते हैं ।उदाहरनार्थ कोलगेट एक प्रचलित टूथपेस्ट हैं जिसका बड़े स्तर पर विज्ञापन किया जाता रहा हैं । लेकिन किसी भी विज्ञापन में यह नहीं बताया जाता की यह बनता कैसे हैं  इसमे कौन-कौनसे रसायन मिले हैं,  इन रसायनों का हम पर क्या प्रभाव होगा क्या ये रसायन बच्चो के लिये सही हैं या नहीं .

अतः हम कोलगेट में पाये जाने वाले कुछ  प्रमुख रसायन पर विचार करेंगे ।ज्यादातर टूथपेस्ट में झाग उत्पन करने के लिए सोडियम लौरेट सलफेट का उपयोग किया जाता है। यह बता देना आवश्यक होगा कि इसी रसायन का उपयोग डिटर्जेंट में भी झाग उथापन के लिए किया जाता हैं ।यह बहुत ही खतरनाक रसायन हैं यह एक विषैला रसायन है इसकी पुष्टि आप गूगल में सर्च कर कर सकते हैं । इस  रसायन को  0.5 मिलीग्राम से जादा लेना स्वास्थ्य के लिये काफ़ी नुकसानदायक हैं , लेकिन क्या किसी विज्ञापन ने या कोइ दन्त चिकितसक ने इससे हमे अवगत किया ? नहीं ।इसमे एक दूसरा प्रमुख रसायन फ़्लोराएड हैं ,यह भी एक खतरनाक रसायन  हैं । अगर किसी टूथपेस्ट में 1000 पीपीएम से ज्यादा फ्लोरिड  है तो वह टूथपेस्ट नहीं है बल्कि जहर हैं ।लेकिन हम मॉडर्न लोग न तो कभी ये जानने की कोशिश की न किसी विज्ञापन ने हमें यह बतलाया ।
आपको जानकर यह आश्चर्य होगा की कोलगेट अमेरिका की कम्पनी है लेकिन जब यह वहाँ बेचा  जाता है तो ये स्पष्ट बताया जाता है कि “यह स्वस्थ्य के लिये हानिकारक हैं ।इसे बच्चो की पहुच से दूर रखे ।यदि आप एडल्ट है तो बिलकुल थोड़ी मत्रा में (मटर के दाने के आकर तक) उपयोग करे ”  लेकिन क्या हमारे यहाँ के विज्ञापनों में यह बताया जाता है ? कभी नहीं उल्टा यह दिखलाया जाता है की ब्रश भर कर उपयोग करे ।

अमेरिका आदी देशो में तो नीम रूपी वरदान तो नहीं है इस कारण वो इसके लिए तरसते हैं, वो भी इसका महत्व समझते हैं तभी तो कुछ वर्षो पहले नीम पर पेटेंट की बात चली थी, लकिन हम इससे अनभिग्य हैं इसकी महता को नकार कोलगेट सिबाका के चक्कर में पड़े हैं ।

अतः जरूरत हैं कि हम विज्ञापनों के मकरजाल से बहार आकर प्रकृति के वरदान को  आत्मसात करे ,नीम के दातुन का खुद भी उपयोग करे और लोगो को भी प्ररित करे। अगर दातुन की कमी हो तो एक ही दातुन को उपयोग करने के बाद उसके अगले सिरे को कट कर रख ले और जब जरुरत पड़े तो  दोबारा उसकाउपयोग करें ।  ( आखिर हम  ही ब्रश को कई बार उपयोग करते है ना ) ज्यादा से ज्यादा नीम का वृक्ष लगायें । इससे प्रदुषण की समस्या भी कम होगी । आम के आम गुट्लियो के दाम ।
और हाँ कृपया कर जल्द से जल्द विज्ञापन के मायाजाल से बहार आयें

कुमार विमल

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5 Comments on "विज्ञापन के मकरजाल में वरदान"

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Agyaani
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महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद, पीएचडी प्रशिक्षु होने के नाते आपसे कम त्रुटियों की अपेक्षा की जाती है!

कुमार विमल
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Thanks for comment , I will try to minimise the errors. Few of the errors has also occurred dew to the lack of Hindi typing skill.I do not know Hindi typing therefore I am dependent on English keyboard and convertor software , however, I am trying to overcome this problem.

कुमार विमल
Guest
हिंदी टाइपिंग कला की जानकारी न होने के कारण में हिंदी टाइपिंग इंग्लिश अल्फाबेट का प्रयोग कर करता हूँ देवनागरी लिपि में रूपांतरण हेतु मैं पूरी तरह कोन्वेर्टर सॉफ्टवेर पर निर्भर हूँ, जिसके कारण भी काफी त्रुटिया रह गई है , उधाहरणआर्थ छ और क्ष में . पुरंविराम देने में भी समस्या आ रही हैं इसके लिए मुझे virtual keyboard का प्रयोग करना पर रहा हैं बार बार इसका उपयोग करना असुविधाजनक हैं फिर टेक्निकल रिसर्च में बराबर इंग्लिश का प्रयोग करने के कारण भी थोडा हिंदी शब्दों को लिखने में दिक्कत आ रही हैं लकिन राष्ट्रभाषा के ज्यादा से… Read more »
कुमार विमल
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Thanks for comment , I will really try to minimise the errors. Few of the errors has also occurred dew to the lack of Hindi typing skill.I do not know Hindi typing therefore I am dependent on English keyboard and convertor software , however, I am trying to overcome this problem

Kumar Vimal (Researcher DRDO)

कुमार विमल
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हिंदी टाइपिंग कला की जानकारी न होने के कारण में हिंदी टाइपिंग इंग्लिश अल्फाबेट का प्रयोग कर करता हूँ देवनागरी लिपि में रूपांतरण हेतु मैं पूरी तरह कोन्वेर्टर सॉफ्टवेर पर निर्भर हूँ, जिसके कारण भी काफी त्रुटिया रह गई है , उधाहरणआर्थ छ और क्ष में . पुरंविराम देने में भी समस्या आ रही हैं इसके लिए मुझे virtual keyboard का प्रयोग करना पर रहा हैं बार बार इसका उपयोग करना असुविधाजनक हैं फिर टेक्निकल रिसर्च में बराबर इंग्लिश का प्रयोग करने के कारण भी थोडा हिंदी शब्दों को लिखने में दिक्कत आ रही हैं लकिन राष्ट्रभाषा के ज्यादा से… Read more »
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