लेखक परिचय

संजय कुमार बलौदिया

संजय कुमार बलौदिया

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-संजय कुमार बलौदिया-   weeping girl

पिछले दिनों द इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी का सर्वे प्रकाशित हुआ जिसके मुताबिक कॉस्मेटिक सर्जरी के मामले में अमेरिका, चीन और ब्राजील के बाद भारत चौथे स्थान पर आता है। यह आंकड़ा भारत की कुल आबादी पर आधारित है। सोशल न्यूज नेटवर्क वोकेटिव के अनुसार सर्जरी का बड़ा कारण सोशल साइट पर दूसरों से ज्यादा बेहतर दिखने की होड़ को बताया गया है। प्लास्टिक सर्जरी करवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। अब लोग सिर्फ इसलिए सर्जरी करवाने लगे हैं कि उन्हें फेसबुक पर सुंदर दिखना है। सोशल साइट्स पर ज्यादा दोस्त बनाने के लिए और ज्यादा लाइक पाने के लिए भी लोग सुंदर दिखना चाहते हैं। इस बात से समझा जा सकता है कि पिछले एक दशक में कैसे सुंदरता को लोगों के बीच प्रचारित किया गया है और सुंदरता के मायने बदल दिये गये हैं। पूंजीवादी व्यवस्था में महिला के शरीर और उसकी सुंदरता को बाजार में बेचने वाले उत्पाद के तौर पर पेश किया जाता है। पहले लोगों के लिए सुंदरता व्यक्ति के व्यक्तित्व से होती थी। लेकिन अब लोगों के लिए सुंदरता के मायने सिर्फ आकर्षक दिखने और जवान दिखने तक सिमट कर रह गए हैं। सुंदर दिखने की इच्छा हर व्यक्ति की होती है, लेकिन सिर्फ बाहरी सुंदरता को ही सुंदरता मान लेना कितना सही है।

दरअसल सवाल यह है कि लोगों के सुंदर दिखने की चाह को बाजार ने कैसे भुनाया और बढ़ाया है। आज अलग-अलग ब्रांड की हजारों तरह की क्रीमों से बाजार अटे पड़े है। कई कंपनियों ने तो उम्र और स्क्रीन के हिसाब से अलग-अलग फेशियल भी लॉन्च किए हैं। रोज कोई न कोई नया ब्रांड सुंदर दिखने की क्रीम लांच कर रहा है। पहले महिलाओं के लिए ही सुंदर दिखने की क्रीम और फेसियल उपलब्ध थे, लेकिन आज कई कम्पनियां पुरुषों को भी सुंदर बनाने काम में जुट गई हैं और पुरुषों के लिए भी कई तरह की क्रीम्स मार्केट में उपलब्ध है। अब इसके एक कदम आगे बढ़कर तकनीक के जरिए लोगों को सुंदर बनाने की कोशिश की जा रही है। यह तकनीक कॉस्मेटिक सर्जरी है। कॉस्मेटिक सर्जरी को त्वचा में कसाव लाने के लिए किया जाता है। पहले जो कास्मेटिक सर्जरी गम्भीर चोट के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती थी, वही सर्जरी आज लोगों को मनचाहा रूप दे रही है। यह प्रोडक्ट्स या सर्जरी लोगों को यह विश्वास दिलाते है कि उनकी बढ़ती उम्र में भी वह पहले की तरह आकर्षक और जवान दिखेंगे और इन प्रोडक्ट्स से उनका जीवन, करियर और संभावनाएं खिल उठेंगी। जबकि इन प्रोडक्ट्स या सर्जरी से लोगों के दिखने में कोई खास अंतर नहीं आता है, लेकिन उसके बावजूद भी लोग इस सुंदरता को पाने होड़ में लगे रहते है।  जिससे आज मार्केट में लोगों को सुंदर बनाने के लिए अलग-अलग तरह की क्रीमों से लेकर कई तरह के सर्जरी पैकेज भी उपलब्ध है।

एक खबर के मुताबिक देश में सौंदर्य प्रसाधनों का कारोबार साल 2012-13 में 10,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2007 से अब तक राइनोप्लास्टी ( नाक की सर्जरी) के मामलों में 2400 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। कॉस्मेटिक सर्जरी का व्यापार अरबों डॉलर के आंकड़े पर पहुंच चुका है। आज स्त्री सुंदरता के संदर्भ में स्त्री के स्तन, उसकी कमर और उसके नितंबों का एक खास साइज होना चाहिए, जो बाजार के बनाए मानक के अनुसार हो, अन्यथा वह स्त्री सुंदर नहीं कही जाएगी। स्त्री की इसी छवि को विज्ञापनों के जरिए खूब प्रचारित किया जा रहा है। इसके पीछे कॉस्मेटिक इंडस्ट्री और हेल्थ इंडस्ट्री की भी अहम भूमिका है।

प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक में कई तरह की सुंदर बनाने वाली क्रीमों या सर्जरी के विज्ञापन बखूबी देखने को मिल जाते है। इनके अलावा अब समाचारपत्रों में एक पेज पर सुंदरता को लेकर कई तरह की फीचर स्टोरी भी दी जाती है जिसमें यह बताया जाता है कि कैसे क्रीम्स या सर्जरी से सुंदर बना जा सकता है और प्रकृति उपायों द्वारा भी सुंदर बनने के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा सर्जरी को करवाने के खर्च से लेकर उन संस्थानों तक की जानकारी भी दी जाती है। इस प्रकार देखा जा सकता है कि किस तरह से मीडिया भी बाजार द्वारा बनाई गई सुदंरता को खूब प्रचारित-प्रसारित कर रहा है। जिससे अब लोगों के लिए सबसे जरूरी सुंदर दिखना हो गया है। करियर, पदोन्नति, दोस्तों की संख्या बढ़ाने या लाइक पाने के लिए और आत्मविश्वास पाने के लिए भी सुंदर दिखना जरूरी है। कुल मिलाकर बाजार की सुंदरता के मानदंडों से ही आप स्वयं को सुंदर मान सकते हैं, वरना नहीं। अब तो लोग जॉब इंटरव्यू और पदोन्नति के लिए भी कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने लगे।

पिछले साल एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जंस ऑफ इंडिया के एक अध्ययन के मुताबिक, पुरुषों में सीने की सर्जरी ने पिछले 5 साल में 150 फीसदी की बढ़त दर्ज की है। पिछले कुछ सालों में ब्रेस्ट सर्जरी अब बेहद लोकप्रिय कॉस्मेटिक सर्जरी में बन गई है। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी सर्वे के मुताबिक, भारत में 2010-11 में 51,000 ब्रेस्ट सर्जरी की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 15 लाख है। इस प्रकार समझ जा सकता है कि भारत में सर्जरी कराने की गलत प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। भले ही कॉस्मेटिक सर्जरी महंगी न हो, लेकिन इसके नुकसानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अभी हाल ही में जामा प्लास्टिक फेसियल सर्जरी ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी से मरीजों के युवा दिखने में सिर्फ तीन साल का अंतर आता है। सर्जरी से पहले मरीजों की उम्र क्रमशः 2.1 साल कम उम्र दिखती और सर्जरी के बाद 5.2 साल अधिक जवान दिखते कुल मिलाकर आकर्षक या जवान दिखने में औसतन सिर्फ 3.1 साल का अंतर आता है। इस अध्ययन और द इंटरनेशनल सोसायटी आफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी के सर्वे से यह बात साफ हो जाती है कि बाजार की सुंदरता और सुंदरता के लिए होने वाली प्रतियोगिताओं ने लोगों को कैसे प्रभावित किया है। पुरुषों के लिए सुदंरता का मतलब सीना सुस्त होना चाहिए और पेट पर अनचाही चर्बी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं के संदर्भ सुंदरता, उनका सीना, उनकी कमर, उनके नितंब और उनका वजन बाजार की सुंदरता के मापदंड के अनुसार होना चाहिए। इस सुंदरता को पाने के लिए लोगों की बीच एक होड़ सी लगी है। इससे वह लोग जो इस प्रकार की सुंदरता हासिल नहीं कर पाते है, वह स्वयं को हीन भावना से देखने लगते हैं। इससे वह स्वयं को सुंदर नहीं मानते है। भले ही यह कहा जाता है कि रंग के आधार पर भेदभाव खत्म हो गया हो, लेकिन सच यह है कि सुंदरता का यह विचार लोगों में एक प्रकार की विषमता को जन्म दे रहा है। जिससे लोगों में कहीं न कहीं इस सुंदरता को पाने की लालसा बढ़ती जा रही है और लोग सुंदरता के इन मापदंडों के अनुसार सुंदर दिखने की होड़ में शामिल होते जा रहे हैं।

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