लेखक परिचय

ब्रजेश कुमार झा

ब्रजेश कुमार झा

गंगा के तट से यमुना के किनारे आना हुआ, यानी भागलपुर से दिल्ली। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से पढ़ाई-वढ़ाई हुई। कैंपस के माहौल में ही दिन बीता। अब खबरनवीशी की दुनिया ही अपनी दुनिया है।

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govindji__27प्रश्न- आपने गत 14 और 15 जनवरी को इलाहाबाद में देश की छोटी-छोटी पार्टियों के साथ एक बैठक की थी। इस बैठक में क्या हुआ ?

उत्तर- देश के विभिन्न प्रांतों में सक्रिय कई छोटी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि के साथ इस बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता व विभिन्न विषयों के जानकार भी शामिल हुए। वे सभी देश की मौजूदा राजनीतिक तंत्र की बदहाली से खासे चिंतित दिखे। अब सभी इस बात से सहमत हैं कि सुधार की छोटी-बड़ी कोशिशों के बावजूद देश की राजनीति निरंतर अमीरपरस्त, विदेशपरस्त होने के साथ दबंग लोगों के गिरोह में तबदील हो रही है। वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में सज्जन शक्ति का चुन कर आना नामुमकिन होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया में सुधार की तत्काल जरूरत है। इस बाबत आम सहमति से राष्ट्रवादी मोर्चा का गठन किया गया है। यह मोर्चा चुनाव सुधार प्रक्रिया के लिए चौतरफा प्रयास करेगा।

प्रश्न- इस काम को राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन अपने तरीके से कर ही रहा है। फिर नए मोर्चे की जरूरत क्यों पड़ी ?

उत्तर- यह सही है। लेकिन, किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का सक्रिय सदस्य नहीं बन सकता है। जबकि, सक्रिय राजनीति में कई ऐसे लोग हैं जो वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में बुनियादी स्तर पर मौजूद कमियों को महसूस कर रहे हैं। वे एक ऐसे मंच की तलाश में थे, जहां से इस दिशा में सार्थक पहल की जा सके। पिछले दिनों प्रवास के दौरान मेरी कई लोगों से मुलाकात हुई और तब एक सही मोर्चा के गठन की जरूरत महसूस हुई।

प्रश्न- बैठक में किन-किन पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल थे ?

उत्तर- कई पार्टियों के प्रतिनिधि थे। इनमें डा. स्वामी की जनता पार्टी, भारतीय जनशक्ति पार्टी, जागृत भारत पार्टी, सद्भावना पार्टी, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी आदि के प्रतिनिधि थे। साथ ही पहले से संविधान में सुधार व चुनाव सुधार की जरूरत पर बल देते हुए गंभीर बहस चला रहे बुद्धीजीवी भी बैठक में शामिल हुए यानी कुल 44 लोग थे।

प्रश्न- राष्ट्रवादी मोर्चा में शामिल राजनीतिक पार्टियां आगामी आम चुनाव में क्या एक साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है ?

उत्तर- मैं इतना कह सकता हूं कि यह मंच सभी पार्टियों के बीच समझ का एका बनाएगा। साथ ही वर्ष 2009 में होने वाले आम चुनाव से पहले चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए चुनाव आयोग के समक्ष एक संवर्धित चुनाव सुधार पत्रक प्रस्तुत करेगा।

प्रश्न- चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए आपकी क्या मांगे हैं ?

उत्तर- आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पहली और सबसे छोटी मांग है कि वोटिंग मशीन (ईवीएम) में तमाम बटनों के साथ एक बटन यह भी लगा हो कि इनमें से कोई प्रत्यासी उचित नहीं । ताकि उम्मीदवार पसंद न आने के बावजूद मतदाताओं के पास अपने विचार अभिव्यक्त करने का विकल्प वहां मौजूद हो। दूसरी बात चुनाव अभियान के दौरान खर्च की जाने वाली राशि ठीक व इमानदारी से तय की जाए, जिससे पार्टी या उम्मीदवार को मुकाबला मूल्यों और मुद्दों के आधार पर लड़े के लिए बाध्य किया जा सके। किसी को संसाधनों के बेजा इस्तेमाल की छूट न दी जाए। ये दो छोटी मांगे हैं। इसपर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न- कई लोग मानते है कि राष्ट्रवादी मोर्चा लालकृष्ण आडवाणी के प्रधानमंत्री बनने में बाधा उत्पन्न कर सकता है !

उत्तरसबों को सोचने व समझने का अधिकार है। पर मैं यह कहूंगा कि न काहू से दोस्ती न काहू से बैर।

प्रश्न- राष्ट्रवादी मोर्चा में शामिल लोग यदि अपनी चुनावी सभा में आपको बुलाते हैं तो क्या आप जाएंगे ?

उत्तर- मुझे नहीं लगता कि कोई प्रत्यासी अपनी चुनावी सभा में भीड़ कम करने के लिए ऐसा करेंगे। यदि वे ऐसा करेंगे तो देखा जाएगा।

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