लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

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talkingतुम्हारे मुंह पर तुम्हारी बतियाँ
हमारे मुंह पर  हमारी  बतियाँ
बहुत मीठी मीठी सी लगती हैं
उन की ऐसी खुशामदी बतियाँ !

तुम्हारे मुंह पर हमारी बतियाँ
हमारे मुंह पर तुम्हारी बतियाँ
सीना तक छलनी कर जाती हैं
उन की ऐसी हैं कटारी बतियाँ !

कभी हैं शोला कभी हैं शबनम
मरहम  नहीं हैं उन की बतियाँ
नही वो हमारे न ही वो तुम्हारे
बड़ी मतलबी हैं उन की बतियाँ

 

यादों के सहारे जिंदगी नहीं कटती
आंसुओं से कभी झोली नहीं भरती !
दिल की धरती बंज़र अगर होती
तमन्नाओं की फसल नहीं खिलती !
जगमगाते शहर में अँधेरी सी गली
कौन कहता है , कि नहीं मिलती !
मैं भी अकेला हूँ, है तू भी अकेला
जिंदगी मिल कर क्यों नहीं चलती !
गम में दिल की हालत मैं क्या कहूं
बैठे बैठे अब रात भी नहीं ढलती !
… दिन भर का चैन और रात की सुध
खुशियाँ तो खैरात में नहीं मिलती !
चाँद में कोई बोल कर छिप गया
तस्वीर उसकी अब तो नहीं दिखती !
चलते रहने का ही तो नाम जिंदगी है
जिंदगी रुक रुक कर भी नहीं चलती !

 

अपनों की किस से शिकायत करूं
बच्चों सी क्या अब शरारत करूं !
मन्दिर मिली तुम तो सोचता रहा
देखता रहूँ तुम्हे या इबादत करूं !
बला की खुबसूरत हो तुम इतनी
इन आँखों पे कितनी इनायत करूं !
आँखे इतरा रही हैं देख कर तुम्हे
न देखने की कैसे मैं हिमाक़त करूं !
खुशबु की उजालों की धनक हो तुम
किस क़दर तुम्हारी हिमायत करूं !
खो न दे मासूमियत अपनी ये कहीं
इस दिल की कितनी हिफाज़त करूं !

 

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