लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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caashlessडा. राधेश्याम द्विवेदी
देश से काले धन को ख़त्म करने के लिए भारत सरकार ने 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया है. अब बिना नकदी इस्तेमाल किए लेनदेन और ख़रीद फ़रोख्त को बढ़ावा दिया जाने का सलाह दिया जा रहा है. #नोटबंदी के बाद ये चर्चा है कि हिंदुस्तान #कैसेलेसअर्थव्यवस्था की और बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री #नरेंद्रमोदी और वित्तमंत्री #अरुणजेटली भी इस बारे में कह चुके है कि काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में इसे बहुत कारगर मना जा रहा है. भारत की सकल अर्थव्यवस्था के घरेलू उत्पाद में कैश #जीडीपी का अनुपात 12 से 13 प्रतिशत है, जो अमरीका और यूरोप से अधिक है पर जापान से कम है.
सरकार ने भी एक पैनल स्थापित किया:- देश की कैशलेस अर्थव्यवस्था बदलने के लिए प्रयासों के रूप में, सरकार ने एक पैनल सभी सरकारी-नागरिक लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान करने के लिए स्थापित किया है. समिति अनुकूल डिजिटल पेमेंट को यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए काम कर रही है. एक अनुमान के मुताबिक नोटबंदी के बाद ऑनलाइन भुगतान 300 प्रतिशत तक बढ़ गए है.विशेषज्ञों ने कहा है कि नकदी खत्म करने के लाभ से प्रेरित अपराधों का पूरी तरह उन्मूलन नहीं होगा, लेकिन उनकी लागत बढ़ जाएगी. भारतीय स्टेट बैंक की आर्थिक अनुसंधान विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड से लेनदेन पीओएस के माध्यम से (बिक्री के प्वाइंट) टर्मिनलों , एम बटुआ और मोबाइल बैंकिंग की तरह प्रीपेड भुगतान के माध्यम से लेनदेन सहित डिजिटल बैंकिंग के मौजूदा आकार के आसपास 1.2 लाख करोड़ रुपये है, यह 3 लाख करोड़ रुपये तक आकर पंहुच सकता है.नोटबंदी का कदम अर्थव्यवस्था को कैशलेस बनाने एक का सोचा समझ कदम है.
प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के माध्यम से पुनः चेताया :-8 नवंबर को हिन्दुस्तान की लीडरशिप ने जब नोटबंदी का फैसला लिया, तब शायद उसके लिए यह कल्पना करना मुश्किल रहा होगा कि आने वाले वक्त में इस नीति को लेकर कितने तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे. पिछले बीस-बाइस दिनों में इस फैसले को लेकर सरकार के मन में जो संशय दिखता है उसकी शायद यही वजह है.यह बात सबसे ज्यादा देश और दुनिया में उभर कर सामने आ रही है कि नोटबंदी भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. प्रधानमंत्री ने अपनी ‘मन की बात’ में भी अपनी इस इच्छा को जताया है. नोटबंदी के समर्थकों और आलोचकों दोनों के मन में यह सवाल है कि क्या भारत कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए तैयार है? एक बहुत बड़ी आबादी इस देश में रहती है जिसके लिए ग्रामीण, अशिक्षित और बैंक अकाउंट्स व स्मार्टफोन के बगैर इस नई व्यवस्था से जूझना काफी मुश्किल है. कैशलेस अर्थव्यवस्था के प्रस्ताव की प्रतिक्रिया में कई तरह की राय सामने आई है, जिसमें कुछ सकारात्मक और तसल्ली देने वाली हैं, तो कुछ बिल्कुल धुंधले भविष्य का दृश्य खींचती हुई नकारात्मक हैं.
लोगों के पास स्मार्टफोन होने चाहिए:-24 नवंबर, 2016 को द इकॉनामिक टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के हवाले से कहा गया कि चीन की मीडिया भारत की इस कोशिश को सही मानती है. उसका यह भी कहना है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास अगर स्मार्टफोन हों, तो यह पहलकदमी सफल हो सकती है. उनका आकलन है कि स्मार्टफोन की बिक्री के लिए भारत सबसे संभावनाशील बाजार है. इस संदर्भ में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चीन की ही ज्यादातर कंपनियां स्मार्टफोन के निर्माण में शामिल हैं.
बड़े शहरों तक सिमटा :- बीबीसी में 25 नवंबर, 2016 को छपी समीर हाशमी की रिपोर्ट एक निराशाजनक तस्वीर पेश करती है. उन्होंने इस बात को उजागर किया है कि पेटीएम के साथ-साथ फ्रीचार्ज और मोबिक्वीक जैसी मोबाइल पेमेंट कंपनियों के कारोबार में बहुत बड़ा इजाफा आया है. अपने फील्ड रिपोर्ट में उनका यह भी अनुभव था कि यह बड़े शहरों तक सिमटा है और छोटे शहरों में अभी भी इस नए तरीके को लेकर कारोबारी उत्साहित नहीं हैं. इस मसले पर बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा कराए सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी लोग यह मानते हैं कि भारत नगद आधारित अर्थव्यवस्था से मुक्त होने के लिए अभी तैयार नहीं है.
धन को ही खत्म कर दिया जाए:- आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ मिहिर शर्मा कैशलेस अर्थव्यवस्था को कर चोरी करने वालों पर बड़ा हमला मानते हैं. 20 जुलाई, 2016 को ‘ब्लूमबर्ग’ पर प्रकाशित उनके लेख में साफतौर पर कहा गया है , ‘‘नगदी का जितना कम से कम लेन-देन के लिए इस्तेमाल होगा, एजेंसियों के लिए टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ना उतना ही आसान होगा. काले धन से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है कि धन को ही खत्म कर दिया जाए’’. उस वक्त उनका अनुमान था कि भारत में दूसरे देशों की तुलना में कैशलेस अर्थव्यवस्था को ज्यादा तेजी से लागू किया जा सकता है. हावर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री केनेथ रोगॉफ की राय है कि कैशलेस अर्थव्यवस्था में लोग अपनी बचत को बिस्तर के गद्दे के नीचे नहीं, बल्कि बैंक में रखेंगे. लेकिन यह अभी देखना बाकी है कि जिस देश में लोगों के पास घर, शिक्षा और रोजगार नहीं है वे अपने काम चलाने भर के थोड़े से पैसे प्लास्टिक कार्डस और ई-मनी के जरिये कैसे संभालेंगे ? तात्पर्य यह है कि इसमें दिक्कते आ सकती हैं.
कैशलेस अर्थव्यवस्था के समर्थन में कैट:-अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने डिजीटल भुगतान की व्यवस्था को तर्कसंगत बताते हुए कहा है कि इससे कम नगद यानी कैशलेस को बढावा मिलेगा. जिससे आगे चलकर देश की अर्थव्यवस्था कैशलेस यानी नगद रहित को सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत सप्ताह मन की बात कार्यक्रम में कैशलेस के बारे में बात की. कैट का कहना है कि वह इस मुद्दे पर श्री मोदी का समर्थन करता है. इसके लिए डिजीटल भुगतान व्यवस्था की शुरुआत बेहद जरुरी है. कैट ने आग्रह किया कि डिजीटल भुगतान को सुलभ बनाने के लिए सरकार को क्रेडिट कार्ड तथा डेबिट कार्ड के जरिये होने वाली लेनदेन का चार्ज संबंधित बैंकों में खुद ही जमा करना चाहिए, ताकि उपभोक्ता इस अतिरिक्त बोझ से मुक्त हो सके. साथ ही परिसंघ ने नगद रहित अर्थव्यवस्था के लिए मोबाइल एटीएम और कार्ड स्वाइप मशीन को बेहद जरुरी बताया है. उसके मुताबिक मार्ड स्वाइप मशीनों पर लगाने वाली आयात शुल्क खत्म करके इसे देश में ही निर्मित करने में जरुरी मदद दी जानी चाहिए.इसके साथ ही गैर बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों तथा माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शामिल करना चाहिए.इस बारे में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से कैट 2-3 दिसंबर को राष्ट्रीय आर्थिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. जहां नोटबंदी का व्यापार पर प्रभाव, इस समस्या का निदान ,जीएसटी और वित्तीय समावेश जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है । कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. एस. भरतिया तथा राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार अगर शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान का प्रचलन तेजी से बढेगा तो इन क्षेत्रों में इस्तेमाल न की जाने वाली नगदी का उपयोग ग्रामीण तथा दूर दराज के क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
कैशलेस अर्थव्यवस्था की पहल में आईआरसीटीसी :-कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कोरपोरेशन लिमिटेड (आई आर सी टी सी) ने अपने परिचालन के डिजिटलीकरण के लिए खासतौर से ई-कैटरिंग, ई-टिकटिंग और पर्यटन खंड में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने का फैसला किया है. आई आर सी टी सी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. ए.के. मानोचा ने बताया, “भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री की नोटबंदी की नवीनतम पहल से इस प्रक्रिया को गति मिलेगी. हमने सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अपने कई खंडों को पहले ही डिजिटल बना लिया है और हम आगे प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके और अधिक आक्रामक तरीके से अपने यात्रियों के अनुकूल उपायों को बढ़ावा देंगे.”
कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा:- हाल ही में आईआरसीटीसी ने ई-कैटरिंग सेवा ‘फू़ड ऑन ट्रैक’ की शुरुआत की है, जिसमें बड़ी सफलता मिली है. इससे रेल यात्री अपनी पसंद का खाना ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्री भोजन का भुगतान ऑनलाइन करते हैं और उन्हें नकदी लेकर चलने की जरूरत नहीं है.इस सेवा के लिए आईआरसीटीसी ने डोमिनोज, हल्दीराम, केएफसी और सरवन भवन जैसे लोकप्रिय रेस्तरांओं से साझेदारी की है, ताकि यात्री अपनी पसंद का भोजन खा सकें.यही नहीं यात्रियों को क्षेत्रीय भोजन मुहैया कराने के लिए आईआरसीटीसी ने नाबार्ड के सहयोग से महिला स्वयंसहायता समूहों से हाथ मिलाया है.कोंकण क्षेत्र में एमएएचइआर, एमएवीआईएम, ल्यूपिन ह्यूमन वेलफेयर रिसर्च फाउंडेशन जैसी महिला स्वयंसहायता समूह यात्रियों को ट्रेन की सीट पर स्वादिष्ट कोंकणी भोजन परोसती हैं. डॉ. मानोचा ने कहा, “ग्रामीण आबादी को ई-कैटरिंग के माध्यम से कैशलेस लेनदेने से जोड़ने के लिए यह आईआरसीटीसी की महत्वपूर्ण पहल है.इसमें समूह की महिलाओं को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है.कोंकण रेलवे ने यह पायलट परियोजना शुरू की है .” मार्गन स्टेनले की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का इंटरनेट आधारित बाजार फिलहाल 16 अरब डॉलर का है जो साल 2020 तक 159 अरब डॉलर का हो जाएगा, जोकि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती ई-कॉमर्स अर्थव्यवस्था है.यद्यपि भारत जैसे एक पिछड़े एवं विकासशील देश में कैशलेश व्यवस्था ना तो इतना आसान है और ना ही इतनी व्यस्थित व्यवस्था बन पा रही है, फिर भी यह एक सार्थक कदम के रूप में देखा जा सकता है. जिस प्रकार ग्रामीण भारत की जनता ईवीएम की मशीन से मत देने के लिए दक्ष व सहज हो चुकी है. गांव के बच्चे से लेकर बड़े-वूढ़े मोवाइल फोन का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करने लगे हैं.उसी प्रकार कैशलेश लेनदेन को भी समुचित प्रशिक्षण के उपरान्त प्रशिक्षित होकर अपना सकती है. भारत सरकार प्रदेश सरकार के माध्यम से प्रत्येक प्राइमरी वेसिक तथा इन्टर कालेज में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों व जानकारों को सिखाये फिर वे अगले क्रम में कमपढ़े लिखों को क्रमबद्ध सिखा सकते हैं.

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1 Comment on "भारत कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ा"

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हिमवंत
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भारत कैशलेश बनने की दिशा में अग्रसर है. लेकिन इसके लिए आवश्यकता से अधिक प्रयासों से विषाक्तता की संभावना है. भारत की हकीकत को समझने वाले ‘लेस-कैश’ की बात करेंगे ‘कैशलेस’ की नही.

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