उत्तराखंड का बालपर्व “फूलदेई”

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, समाज

पहाड़ की यह अनूठी बाल पर्व की परम्परा जो मानव और प्रकृति के बीच के पारस्परिक सम्बन्धों का प्रतीक है । तेज़ी से बड़ रही आधुनिकता के कारण यह प्राचीन परम्परा विलुप्त की कगार पर खड़ी हो गयी है इन प्राचीन परम्पराओ को बचाने के लिए सरकार को निति तय करनी होगी और स्कूलों मे बच्चों को इस बालपर्व फूलदेई को मनाने के लिए प्रेरित किया जाय व इस परम्परा से संबन्धित लेख या कविताओं को नौनिहालों के पाठ्यक्रम मे शामिल किया जाय ताकि इसे व्यापकता प्रदान हो सके.

जोगीरा हास्य व्यंग की अनूठी विधा

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, वर्त-त्यौहार

किसके बेटा राजा रावण किसके बेटा बाली?
किसके बेटा हनुमान जी जे लंका जारी?
विसेश्रवा के राजा रावण बाणासुर का बाली।
पवन के बेटा हनुमान जी, ओहि लंका के जारी।
जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।

आइये जाने होली खेलने के दौरान क्या रखें सावधानी…

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, जन-जागरण, धर्म-अध्यात्म

होली रंगों का त्योहार है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है | ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है | भारत पहले से ही कला और संस्कृति के क्षेत्र में अग्रणी रहा हैं अगर भारतीय समाज के त्यौहार की… Read more »

चैतन्य महाप्रभु की संकीर्तन रस संस्कृति

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती-12 मार्च 2017 पर विशेष ललित गर्ग चैतन्य महाप्रभु भारतीय संत परम्परा के भक्ति रस संस्कृति के एक महान् कवि, संत, समाज सुधारक एवं क्रांतिकारी प्रचारक थे। वैष्णव धर्म के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे। उन्होंने जात-पांत के बंधन को तोड़ने और सम्पूर्ण मानव जाति को एक… Read more »

होली पर्व भारत में बहुसांस्कृतिक समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, पर्व - त्यौहार, वर्त-त्यौहार, समाज

होली पर्व पूरे देश में परंपरा, हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है। होली पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली पर्व हमारे देश में उपस्थित बहुसांस्कृतिक समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक है। होली पर्व देश में हमारी संस्कृति और सभ्यता के मूल सहिष्णुता और सौहार्द की भावना को बढ़ावा देने वाला पर्व है। इस पर्व को सभी लोगों को शांति, सौहार्द और भाईचारे की भावना से मनाना चाहिए।

अमालकी एकादशी

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में जाना जाता है। आमलकी एकादशी महाशिवरात्रि और होली के मध्य में आती है। अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार वर्तमान में यह फरवरी या मार्च के महीने में आती है। इस वर्ष यह आज (बुधवार),08 मार्च,2017 को मनाई जा रही हैं|सनातन धर्म में एकादशी व्रत का… Read more »

हनुमान जयंती

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

प्रिय पाठकों/मित्रों, 2017 में हनुमान जयंती 11 अप्रैल, दिन मंगलवार को मनाई जाएगी ।हनुमान जयंती भारत में लोगों के द्वारा हर साल, हिन्दू देवता हनुमान जी के जन्म दिवस को मनाने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। भारतीय हिन्दी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर साल चैत्र (चैत्र पूर्णिमा) माह के शुक्ल पक्ष में 15वें… Read more »

जानिए की क्यों नहीं करना चाहिए बिस्तर पर बैठ कर भोजन…???

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

  ऐसा करना दे सकता है शनिदेव  को आमंत्रण….. प्रिय पाठकों/मित्रों, कुछ कार्य ऐसे भी होते हैं जो बहुत साधारण लगते हैं लेकिन ज्योतिष के अनुसार वे शुभ नहीं होते. दूसरे शब्दों में कहें तो वे मनुष्य के जीवन से सुख और समृद्धि को नष्ट करते हैं. ऐसे कार्यों से सदैव दूर रहना चाहिए. जानिए… Read more »

अक्षय तृतीया (आखा तीज) 2017

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, पर्व - त्यौहार

अक्षय तृतीया पर्व को कई नामों से जाना जाता है| इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है| इस वर्ष यह पर्व 28 अप्रैल 2017 (शुक्रवार) के दिन मनाया जाएगा. इस पर्व को भारतवर्ष के खास त्यौहारों की श्रेणी में रखा जाता है| अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है | इस दिन स्नान, दान, जप, होम आदि अपने सामर्थ्य के अनुसार जितना भी किया जाएं, अक्षय रुप में प्राप्त होता है | वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “अक्षय तृतीया” या “आखा तृतीया” अथवा “आखातीज” भी कहते हैं।

विलुप्त हो रही सिक्की कला की पहचान

Posted On by & filed under कला-संस्कृति

                  मधुबनी की पहचान पेंटिंग से होती है लेकिन ऐसी कई कलाएं है जो अपनी पहचान के लिए बाट जोह रही है ऐसी ही एक कला है सिक्की कला, सिक्की कला से बननेवाली कलाकृतियाँ न केवल खूबसूरत होती है बल्कि गांव घर की महिलाओं को स्वरोजगार देने… Read more »