बाल श्रम के कलंक से मुक्ति कब?

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स्निग्धा श्रीवास्तव मैं उसका नाम नहीं जानती। लेकिन अकसर अपने घर से मेट्रो तक आने-जाने के दौरान उसे सड़कों से पालीथिन, कागज, प्लास्टिक और लोहे के टुकड़ों को बीनते देखती हूं। अगर हम अपने आसपास नजर दौड़ाएं, तो रेस्टोरेंट, ढाबों, दुकानों और अन्य जगहों पर बच्चे काम करते हुए मिल जाएंगे। चौदह साल से कम… Read more »

साइकिल

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राजू कई दिन से साइकिल सीखने की जिद कर रहा था। उसके साथ के कई लड़के साइकिल चलाते थे; पर उसके घर वालों को लगता था कि वह अभी छोटा है, इसलिए चोट खा जाएगा। अतः वे हिचकिचा रहे थे। यों तो घर में एक साइकिल थी, जिसे पिताजी चलाते थे; पर वह बड़ी थी।… Read more »

बच्चों का बिगड़ता बचपन

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एक जमाना था जब बच्चे नानी-दादी की गोद में परी कथायों की रंगीन दुनिया में खो जाते और नींद में ही बुन लेते सपनों का एक सुनहरा संसार| एक अजीब सा वक्त, जिसमें न कोई फिक्र न कोई गम और न ही किसी की परवाह| याद है, जब हम हम बच्चे थे तो उस समय… Read more »

सरल श्लोकों से बाल संस्कार

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डॉ, मधुसूदन सूचना: मित्रों के अनुरोध पर: सरल श्लोकों का चयन, बालकों को हिन्दी-संस्कृत उच्चारण के अभ्यास के लिए। सूचना: (आप एक या आधी पंक्ति गाकर बच्चों को पीछे दोहराने के लिए कहें।) अर्थ कभी भी समझा जा सकेगा। पर उच्चारण बालकपन के १० वर्षों में ही सुदृढ हो सकेगा। शुद्ध उच्चारण बालकों का शुद्ध… Read more »

एक चुनौती:-बच्चों को ‘ना’ कैसे कहें

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(बाल दिवस पर विशेष) आज लगभग हर माँ बाप इस समस्या से परेशान है कि वह अपने बच्चे की बात माने या न माने। शिक्षाविद् आर्यवीर लायन विकास मित्तल बताते है कि अगर आपका बच्चा किसी बात के लिए ज़िद्द करता है, तो हो सकता है कि ‘ना’ कहने से वह आसानी से नहीं माने।… Read more »

यह कैसी मित्रता

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गणेशी के खेत में बने तीन कमरों के घर में चिंकू चूहे ने अपना निवास बना लिया था |घर के ठीक सामने दो ढाई सौ फुट की दूरी पर एक नीली नदी बहती थी |नदी थी तो पहाड़ी परन्तु मार्च महीने तक उसमें भरपूर पानी रहता था |बरसात में तो पानी खेत की मेढ तक… Read more »

बेसहारा किसान

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  कुमार अपने बच्चों से बहुत प्रेम करता था , लेकिन लड़के आधुनिक जीवन शैली में रहना चाहते थे ‘ बाप घर पर खेती बाड़ी के धंधे में हमेशा व्यस्त ही रहता था ‘   कुमार अपने बच्चों से हमेशा अच्छी तरीके से बातें करता था लेकिन बेटे जो काफी नखरा करते हमेशा उनकी बात काट… Read more »

शेर और लोमड़ी की दुश्मनी

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एक बार एक शेर और लोमड़ी थी जो कि ज्यादा अच्छे मित्र नहीं थे हमेशा दोनों में अनबन चलती रहती थी ,फिर भी दोनों साथ-साथ रहते तथा खेती करते थे ‘ एक बार ऐसा हुआ कि लोमड़ी किसी कारणवस बाहर जंगल में गयी और काफी समय तक जंगल में ही रही ‘ इसी बीच शेर… Read more »

मासूम बचपन का शोषण एवं उत्पीडन

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अभी चंद दिन पहले दिल्ली के लगभग सभी अखबारों में यह दुखद खबर छपी कि एक पंद्रह वर्षीय छात्र, शुभम जिंदल जो कृष्णा मॉडल स्कूल में नवीं कक्षा में पढ़ते थे, को उसी के दो सहपाठियों ने लकड़ी के एक मजबूत डंडे से सिर पर लगातार वार करते हुए पहले बुरी तरह घायल क्या और… Read more »

गाँव चलें हम

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चलो पिताजी गांव चलें हम , दादाजी के पास | बहुत दिनों से दादाजी का, नहीं मिला है साथ | वरद हस्त सिर पर हो उनका , भीतर मेरे साध | पता नहीं क्यों ह्रृदय व्यथित है, मन है बहुत उदास | दादी के हाथों की रोटी, का आ जाता ख्याल | लकड़ी से चूल्हे… Read more »