ईश्वर से विज्ञान एवं राज्यादि ऐश्वर्य की प्रार्थना होने से वेद संसार के सर्वोत्तम धर्मग्रन्थ

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मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द महाभारत काल के पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने संसार को ईश्वर, जीव व प्रकृति, इन तीन सत्ताओं का सिद्धान्त दिया जिसे त्रैतवाद के नाम से जाना जाता है। यह सिद्धान्त युक्ति, तर्क तथा प्रत्यक्षादि प्रमाणों से भी सिद्ध होता है। इस कारण इसके विपरीत अन्य सभी सिद्धान्त अपूर्ण व दोषपूर्ण होने… Read more »

सभी मनुष्यों के करणीय पाचं सार्वभौमिक कर्तव्य

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मनुष्य का जन्म माता-पिता व सृष्टिकर्ता ईश्वर के द्वारा होता है। ईश्वर द्वारा ही सृष्टि की रचना सहित माता-पिता व सन्तान का जन्म दिये जाने से ईश्वर प्रथम स्थान पर व माता-पिता उसके बाद आते हैं। आचार्य बालक व मनुष्य को संस्कारित कर विद्या व ज्ञान से आलोकित करते हैं। अतः अपने आचार्यों के प्रति भी मनुष्यों का कर्तव्य है कि वह अपने सभी आचार्यों के प्रति श्रद्धा का भाव रखंे और उनकी अधिक से अधिक सेवा व सहायता करें।

ऋषि दयानन्द के जीवन के अन्तिम प्रेरक शिक्षाप्रद क्षण

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स्वामी दयानन्द जी का जीवन आदर्श मनुष्य, महापुरुष व महात्मा का जीवन था। उन्होने अपने पुरुषार्थ से ऋषित्व प्राप्त किया और अपने अनुयायियों के ऋषित्व प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया। एक ऋषि का जीवन कैसा होता है और ऋषि की मृत्यु किस प्रकार होती है, ऋषि दयानन्द का जीवनचरित उसका प्रमाणिक दस्तावेज हैं जिसका अध्ययन व मनन कर सभी अपने जीवन व मृत्यु का तदनुकूल वरण व अनुकरण कर सकते हैं। हम आशा करते हैं कि पूर्व अध्ययन किये हुए ऋषि भक्तों को इसे पढ़कर मृत्यु वरण के संस्कार प्राप्त होंगे। इसी के साथ यह चर्चा समाप्त करते हैं। ओ३म् शम्।

ईश्वर और जीवात्मा का परस्पर सम्बन्ध

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मनमोहन कुमार आर्य हम अनुभव करते हैं कि यह विषय मनुष्यों के विचार करने व जानने हेतु उत्तम विषय है। यह तो हम जानते ही हैं कि ईश्वर इस सृष्टि का कर्ता व रचयिता है व इसका तथा प्राणी जगत का पालन करता है। यह भी जानते हैं कि जब इस सृष्टि की अवधि पूरी… Read more »

नारियां शुभ, शोभा, शोभनीयता गुणों से सुशोभित हों : ऋग्वेद

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मनमोहन कुमार आर्य हम सन् 1970 व उसके कुछ माह बाद आर्यसमाज के सम्पर्क में आये थे। हमारे कक्षा 12 के एक पड़ोसी मित्र स्व. श्री धर्मपाल सिंह आर्यसमाजी थे। हम दोनों में धीरे धीरे निकटतायें बढ़ने लगी। सायं को जब भी अवकाश होता दोनों घूमने जाते और यदि कहीं किसी भी मत व संस्था… Read more »

पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी का पावन एवं प्रेरणाप्रद जीवन

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आज 26 अप्रैल जयन्ती पर मनमोहन कुमार आर्य महान कार्य करने वाले लोगों को महापुरुष कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि महापुरुष अमर होते हैं। भारत में महापुरुषों की एक लम्बी श्रृंखला वा परम्परा है। ऐसे ही एक महापुरुष पं. गुरुदत्त विद्यार्थी थे। आप उन्नीसवीं शताब्दी में तेजी से पतन को प्राप्त हो रहे… Read more »

आत्मा का स्वराज्य

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मनमोहन कुमार आर्य डा. रामनाथ वेदालंकार जी वेदों के प्रसिद्ध विद्वान थे। अनेक विद्वानों के श्रीमुख से हमने उनके लिए वेदमूर्ति सम्बोधन द्वारा उनका यशोगान भी सुना है। उनकी मृत्यु पर मूर्धन्य विद्वानों ने विवेचना पूर्वक उन्हें मोक्षपद का उत्तराधिकारी भी कहा था। हमारा सौभाग्य है कि हमें उनके साथ जीवन का कुछ समय व्यतीत… Read more »

जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर जैन

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-अशोक “प्रवृद्ध”   सत्य और अहिंसा का पाठ पढाकर मानव समाज को अन्धकार से प्रकाश की ओर लाने वाले महापुरुष जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ईस्वी काल गणना के अनुसार सोमवार, दिनांक 27 मार्च, 598 ईसा… Read more »

आज के पार्थ सारथी

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पहले के पार्थ सारथी कृष्ण को लगभग ३५०० वर्षों बाद हम में से कुछ लोग अब कुछ समझ पाए हैं । उस समय के अधिकाँश लोग उनके असली स्वरूप को पहचान नहीं पाए थे । पार्थ सारथी कृष्ण, महाभारत में पार्थ (अर्जुन) के सारथी रहे । वे रथ पर पार्थ के साथ रहे । वे… Read more »

सृष्टि का रचयिता ईश्वर ही है

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मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य हैं और पृथिवी पर जन्में हैं। पृथिवी माता के समान अन्न, फल, गोदुग्ध आदि पदार्थों से हमारा पोषण व रक्षण करती है। हमारे शरीर में दो आंखे बनाई गईं हैं जिनसे हम संसार की वस्तुओं को देखते  वा उन्हें अनुभव करते हैं। हम पृथिवी व उसकी सतह के ऊपर स्थित… Read more »