गुरुकुल गौतमनगर दिल्ली में चतुर्वेद ब्रह्म पारायण यज्ञ एवं वार्षिकोत्सव सोत्साह सम्पन्न

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

दिल्ली में चतुर्वेद ब्रह्म पारायण यज्ञमनमोहन कुमार आर्य गुरुकुल गौतमनगर दिल्ली देश का वैदिक संस्कृत शिक्षा का एक प्रमुख केन्द्र है जो विगत 83 वर्षों से अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य कर रहा है। यहां प्रत्येक वार्षिकोत्सव पर वेद पारायण यज्ञ किये जाते हैं। इस वर्ष यहां 37 वां चतुर्वेद ब्रह्म पारायण यज्ञ… Read more »

स्वामी दयानन्द जी ने वेद पढ़ने का सबको अधिकार दिलवायाः डा. महेश विद्यालंकार’

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य गुरुकुल गौतमनगर, दिल्ली आर्यों का तीर्थ स्थल है। प्रत्येक वर्ष दिसम्बर के महीने में यहां वार्षिकोत्सव आयोजित किया जाता है। अनेक वर्षों से यहां वार्षिकोत्सव के अवसर पर चतुर्वेद पारायण यज्ञों का अनुष्ठान भी किया जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है यह एक गुरुकुल है जहां वर्तमान में लगभग 150… Read more »

भगवान परशुराम का समतामूलक एवं क्रांतिकारी समाज सुधारक कार्य

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

डा.राधेश्याम द्विवेदी हमारे धर्मग्रंथ, कथावाचक ब्राह्मण और दलित राजनीति की रोटी सेकने वाले नेतागण भारत के प्राचीन पराक्रमी महानायकों की संहारपूर्ण हिंसक घटनाओं के आख्यान खूब सुनाते हैं, लेकिन उनके समाज सुधार से जुड़े क्रांतिकारी कार्यों को नजरअंदाज कर जाते हैं। विष्णु के दशावतारों में से छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम के साथ… Read more »

महाभारत के महान योद्धा बर्बरीक ‘खाटू श्याम’ का शीशदान कथा

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

बर्बरीक एक यक्ष और महाभारत का महान योद्धा था, उनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। वह गदाधारी भीमसेन का पोता, नाग कन्या अहिलावती और घटोत्कच का पुत्र था । बाल्यकाल से ही वह बहुत वीर और महान योद्धा था । उन्होंने युद्ध-कला अपनी माँ से सीखी। उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वह इसी सिद्धांत पर लड़ता भी रहा।

ऐसे करें भगवान् शिव जी की आराधना —-

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

ऐसे करें भगवान् शिव जी की आराधना —- ।। || ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं,वन्दे जगत्कारणम् lवन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं,वन्दे पशूनां पतिम् लाल वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं,वन्दे मुकुन्दप्रियम् lवन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं,वन्दे शिवंशंकरम।।। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कुछ छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है, ये उपाय… Read more »

पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय रचित मनुस्मृति के प्रकाशन का सुखद समाचार

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

-मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज की पहचान सत्य व प्रामाणिक धार्मिक व इतर ग्रन्थों के अध्ययनशील लोगों के रूप में होती है। संसार में आज जितने भी मत व पन्थ प्रचलित है, शायद किसी के पास इतना साहित्य नहीं है जितना कि वैदिक सनातन धर्मी आर्यसमाज के पास। दूसरे मतों के अनुयायी अपने एक व कुछ… Read more »

ईश्वर के यथार्थ स्वरूप को कौन जानता है?

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

संसार में ईश्वर को मानने वाले और न मानने वाले दो श्रेणियों के लोग हैं। ईश्वर के अस्तित्व को न मानने वालों को नास्तिक कहते हैं। जो नास्तिक लोग हैं उनसे तो यह अपेक्षा की ही नहीं जा सकती है कि वह ईश्वर के सत्य स्वरूप जानते हैं। प्रश्न है कि जो ईश्वर को मानते हैं, क्या वह सब ईश्वर के सत्य स्वरूप को भी जानते हैं या नहीं?

वसिष्ठ के ब्रहम ज्ञान व बसावट से सम्बन्धित गाथा

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, विविधा, शख्सियत

हर्षि वसिष्ठ का निवास स्थान से सम्बन्धित होने के कारण बस्ती और श्रावस्ती का नामकरण उनके नाम के शब्दों को समेटते हुए पड़ा है। दोनो स्थान आज दो रूप में देखे जा सकते हैं , परन्तु प्राचीन काल में ये एक ही इकाई रहे हैं।इसी क्रम में आज वशिष्ठ के विकास यात्रा के कुछ अनछुये पहलुओं एवं कुछ प्रमुख स्थलों की कहानी का

ईश्वर द्वारा जीवात्माओं को सुधार के अवसर देने की कोई सीमा नहीं

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य हमारा स्वभाव ऐसा है कि जो लोग हमसे जुड़े हैं वह सभी हमारे अनुकूल हों और हमारी अपेक्षाओं को पूरा करें। यदि कोई हमारे अनुकूल नहीं होता व अपेक्षायें पूरी नहीं करता तो प्रायः हम उससे दूरी बना लेते हैं। ऐसे ही कारणों से पति व पत्नी के संबंध तक टूट जाते… Read more »

नदियों में स्नान का धार्मिक औचीत्य और महर्षि दयानन्द

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

आज एक आर्य मित्र से प्रातः गंगा स्नान की चर्चा चली तो हमने इस पर उनके साथ विचार किया और हमारे मन में जो जो विचार आये उसे अपने मित्रों से साझा करने का विचार भी आया। हमारी धर्म व संस्कृति संसार के सभी मतों व पन्थों में सबसे प्राचीन व वैज्ञानिक है। प्राचीन काल में परमात्मा ने मनुष्यों को कर्तव्यों व अकर्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए चार आदि ऋषियों को चार वेदों का ज्ञान दिया था।