इंतज़ार

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  इंतज़ार… इंतज़ार इंतज़ार बाक़ी है. तुझे मिलने की ललक और खुमार बाक़ी है.   यूँ तो बीती हैं सदियाँ तेरी झलक पाए हुए. जो होने को था वो ही करार बाक़ी है.   खाने को दौड़ रहा है जमाना आज हमें. *1यहाँ पे एक नहीं कितने ही जबार बाक़ी है.   वोही दुश्मन है,… Read more »

हर शख्स तो बिकता नहीं है

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राजेश त्रिपाठी खुद को जो मान बैठे हैं खुदा ये जान लें। ये सिर इबादत के सिवा झुकता नहीं है।। वो और होंगे, कौड़ियों के मोल जो बिक गये। पर जहां में हर शख्स तो बिकता नहीं है।। दर्दे जिंदगी का बयां कोई महरूम करेगा। यह खाये-अघाये चेहरों पे दिखता नहीं है।। पैसे से न… Read more »

ग़ज़ल-जावेद उस्मानी

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संस्कृति धरोहर की सारी पूंजी लूटाएंगे बनारस को अपने अब हम क्योटो बनाएंगे गंगा को बचाने भी को विदेशी को लाएंगे अपने देशवासियों को ये करिश्मा दिखाएंगे नीलामी में है गोशा गोशा वतन का जर्रा जर्रा बिकने को रखा है तैयार चमन का हुकूमत में आते ही मिजाज़ ऐसे बदल गए स्वदेशी के नारे वाले… Read more »

हयाते गुमशुदा ने फिर पुकारा मुझे अभी

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हयाते गुमशुदा ने फिर पुकारा मुझे अभी फिरना है दर बदर और ,आवारा मुझे अभी . जिस्म में बाकी है जां रूह अभी जिंदा है लज्जते गम से होने दे आश्कारा मुझे अभी राख होने न पाए , आतिशाकुदह सारे सुलगाना है हर बुझता शरारा मुझे अभी चाहे लाख हो कोशिश ,मिटने दूंगा न उम्मीदे… Read more »

इंसा खुद से ही हारा निकला

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-नवीन विश्वकर्मा- किसके गम का ये मारा निकला ये सागर ज्यादा खारा निकला दिन रात भटकता फिरता है क्यों सूरज भी तो बन्जारा निकला सारे जग से कहा फकीरों ने सुख दुःख में भाईचारा निकला हथियारों ने भी कहा गरजकर इंसा खुद से ही हारा निकला चांद नगर बैठी बुढ़िया का तो साथी कोई न… Read more »

या खुदा कैसा ये वक्त है

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-जावेद उस्मानी- हर सिम्त चलते खंज़र, कैसा है खूनी मंज़र हर दिल पे ज़ख्मेकारी, हर आंख में समंदर दहशती कहकहे पर रक्स करती वसूलों की लाशें इस दश्तेखौफ़ में, अमन को कहां जा के तलाशें दम घुटता है इंसानियत का, वहशीपन जारी है या खुदा कैसा ये वक्त है लहू का नशा तारी है

जब उनसे मोहब्बत थी

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-रंजीत रंजन सिंह- चिट्ठियों का जमाना था जब उनसे मोहब्बद थी, मेरा दिल भी आशिकाना था जब उनसे मोहब्बद थी। रातें गुजर जाती थीं, उनकी चिट्ठियों को पढ़ने में, मैं भी लहू से खत लिखता था जब उनसे मोहब्बत थी। आंख के आंसू सूख गए उनके खतों को जलाने में, कभी समंदर जैसा गहरा था… Read more »

क्या करूं की तू मेरा हो जाये

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-नेहा राजोरा- क्या करूं की तू मेरा हो जाये, काश एक दिन ऐसा भी आये, रोऊं तो मैं तब भी पर आंसू तुझे पाने की खुशी के हो, क्या करूं की तू मेरा हो जाये, काश एक दिन ऐसा भी आये, झूठ तो मुझसे तब भी बोलेगा, फितरत मुझे पता है तेरी, पर वो झूठ… Read more »

उनके इंतज़ार में…

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-लक्ष्मी जायसवाल- बेजुबां ये अश्क़ अपना हाल खुद ही बताते हैं। आज भी तुम पर ये अपना अधिकार जताते हैं।। याद में तेरी अश्क़ बहाना भी गुनाह अब हो गया। कैसे कहें कि दिल का चैन पता नहीं कहां खो गया।। चैन-सुकून की तलाश में सब कुछ छूट गया है। क्यों मुझसे अब मेरा वजूद… Read more »

अब तो आंखें खोल

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-पंडित सुरेश नीरव- अमल से सिद्ध हुए हैवान जमूरे अब तो आंखें खोल। न जाने किसकी है संतान जमूरे अब तो आंखें खोल।। मिला है ठलुओं को सम्मान जमूरे अब तो आंखें खोल। हुआ है प्रतिभा का अपमान जमूरे अब तो आंखें खोल।। पराई थाली में पकवान जमूरे अब तो आंखें खोल। हमारे हिस्से में… Read more »