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अन्ना ने दिया बहनजी-बुखारी को सिमरन व इक़रा से जवाब !

अन्ना ने दिया बहनजी-बुखारी को सिमरन व इक़रा से जवाब ! इक़बाल हिंदुस्तानी आखि़रकार नेताओं की शतरंजी चालों से 12 दिन तक मौत और ज़िंदगी के बीच झूलते रहने के बाद अन्ना ने अपना अनशन दलित बच्ची सिमरन और मुस्लिम बच्ची इक़रा के हाथां जूस पीकर अपनी तीनों मांगे मनवाकर तोड़कर भी ख़त्म नहीं किया, बल्कि फिलहाल स्थगित किया है। अनशन उन्होंने ...

August 29th, 2011 | लेखक : इक़बाल हिंदुस्तानी | 145 views | 2 Comments »
Posted in Category: राजनीति, लेख | Tags: Anna Hazare, Mayawati, इमाम बुखारी, राइट टू रिकाल, राइट टू रिजेक्ट

संसद में हंगामा किस के लिये ?

संसद में हंगामा किस के लिये ? संसद के मानसून सत्र को शुरू हुए लगभग पंद्रह दिन से ज्यादा हो चुके है। पर इन पंद्रह दिनो में संसद में क्या हुआ हम सब लोग जानते है। लोकसभा में जहा मानसून सत्र के पहले सप्ताह में विपक्ष के हंगामे के चलते कोर्इ कार्यवाही न हो सकी जिस के ...

August 18th, 2011 | लेखक : शादाब जाफर 'शादाब' | 69 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Parliament, संसद में हंगामा

बाबा रामदेव न संत बन पाये न लीडर

बाबा रामदेव न संत बन पाये न लीडर शादाब जफर ''शादाब” एक बहुत पुराना और बहुत ही मशहूर है शेर ''ना खुदा ही मिला ना विसाल-ए-सनम,ना इधर के रहे न उधर के रहे। आज ये शेर बाबा रामदेव के जीवन पर कितना सटीक बैठ रहा है। स्वदेशी के मुद्दे को लेकर चले बाबा रामदेव ने गंगा, काले धन और ...

August 18th, 2011 | लेखक : शादाब जाफर 'शादाब' | 399 views | 32 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Baba Ramdev, बाबा रामदेव

सोशल नेटवर्किंग बनाम सेक्स नेटवर्किंग

सोशल नेटवर्किंग बनाम सेक्स नेटवर्किंग  डॉ. मनोज चतुर्वेदी मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह समाज के लिए जीता व मरता है। यदि वह समाज से अलग हो तो या वह देवता होगा या तो दानव होगा, लेकिन जब वह समाज में फ्रेंड्शिप के बहाने सेक्स, जनप्रवाद, अपशब्दों का मायाजाल फैलाए तो गोयबल्स की श्रेणी में आ ...

August 13th, 2011 | लेखक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 218 views | 5 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Sex networking, सेक्स नेटवर्किंग, सोशल नेटवर्किंग

वुस्तानवी एक शख्सियत नहीं बल्कि एक विचारधारा का संघर्ष

वुस्तानवी एक शख्सियत नहीं बल्कि एक विचारधारा का संघर्ष इक़बाल हिंदुस्तानी दारूलउलूम देवबंद विश्वप्रसिद्व इस्लामी संस्था है। मौलाना वुस्तानवी का मामला भले ही शांत दिख रहा हो लेकिन उनके समर्थक अगर उनकी बर्खास्तगी के मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाते हैं तो यह एक बार फिर से ज़बरदस्त चर्चा में आ जायेगा। वहां का मोहतमिम कौन होगा यह उलूम का ...

August 13th, 2011 | लेखक : इक़बाल हिंदुस्तानी | 74 views | 1 Comment »
Posted in Category: लेख | Tags: Vustanvi, वुस्तानवी

अराजकता के इस‌ दौर में देश में सैनिक शासन की संभावनायें

अराजकता के इस‌ दौर में देश में सैनिक शासन की संभावनायें मेरा बड़ा बेटा स्टेशनरी की दुकान चलाता है|वहीं पर कम्प्यूटर फोटो कापी इत्यादि भी उप‌लब्ध हैं सेवा निवृति के बाद मैं भी इस दुकान में बैठकर कंप्यूटर पर लेखन का काम करता हूं|कभी कभी काउंटर पर बैठकर रुपये गिनकर दुकान की आर्थिक हैसियत का अंदाज भी लगा लेता हूं|एक दिन ...

August 6th, 2011 | लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 120 views | 1 Comment »
Posted in Category: लेख | Tags: Military rule, सैनिक शासन

गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र

गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र शादाब जफर "शादाब’’ 15 अगस्त बहुत ही करीब है। में सोच रहा हॅू कि आखिर हमारे भोले भाले नादान प्रधानमंत्री जी लाल किले की प्राचीर से गणतंत्र का झंडा फहरायेगे या भ्रष्टतंत्र का कहना मुश्किल है। आईपीएल घोटाला, राष्ट्रमंडल खेलो में घोटाला, मुंबई के आदशर आवास सोसायटी घोटाला, टुजी स्पेक्ट्रस आवंटन ...

August 5th, 2011 | लेखक : शादाब जाफर 'शादाब' | 153 views | 2 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: independence, गणतंत्र, गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र, भ्रष्टतंत्र

नवचेतना के आधार:प्रेमचंद

नवचेतना के आधार:प्रेमचंद रामकृष्ण प्रेमचंद जयन्ती : 31 जुलाई  प्रेमचंद जितने अंश में साहित्यकार थे उतने ही अंश में एक समाजवेत्ता और मार्गदर्शक भी बल्कि उनकी यह दोनों विशेषताएं इतनी एकरूप हो गयी थीं कि उनका   अस्तित्व ही नहीं बच पाया था. इस कालजयी साहित्यसर्जक के स्मरणपर्व पर किये उनकी कला के विभिन्न पक्षों का एक ...

July 30th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 80 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Premchand, प्रेमचंद

हम किस आजादी की बात करते हैं?

हम किस आजादी की बात करते हैं? बरुण कुमार सिंह आजादी के 65 साल बाद भी मुल्क का जनमानस अपने ही द्वारा चुने गये राजनेताओं की काली करतूतों से शमिरंदा है। सब जानते हैं कि तमाम बड़े नेता ऐसे हैं, जो भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं। कोई मुख्यमंत्रा हैं, तो कोई केन्द्रीय सरकार के कैबिनेट ...

July 27th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 127 views | 1 Comment »
Posted in Category: लेख | Tags: independence, राजनेताओं की काली करतूतों

भारत-रत्न दिलवाने की जिद

भारत-रत्न दिलवाने की जिद विनोद उपाध्याय 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने जब कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा में उल्लेखनीय योगदान करने वालों को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने के लिए भारत रत्न की स्थापना की थी तब यह सोचा भी नहीं होगा की भविष्य में यह विवाद ...

July 27th, 2011 | लेखक : विनोद उपाध्याय | 96 views | 3 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Atal Bihari Vajpayee, अटल बिहारी वाजपेयी, भारत-रत्न \, सचिन तेंदुलकर

खाकी में खोखली और बीमार U.P पुलिस

खाकी में खोखली और बीमार U.P पुलिस शादाब जफर "शादाब’’ दरोगा बनने की ललक में मेरठ हादसे के अगले ही दिन 24 और अभ्यर्थी सिपाही दौड में बीमार होने के बाद आजमग में भी दौड पूरी न कर सके और अस्पताल पहुच गये। इन में से एक सिपाही तो निराशा के कारण अस्पताल की छत से जान देने ...

July 26th, 2011 | लेखक : शादाब जाफर 'शादाब' | 38 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: U.P. पुलिस, खाकी, खोखली और बीमार

शिव स्वयं सावन हैं

शिव स्वयं सावन हैं समग्र किसान चेतना का प्रतीक है- शिव पंडित सुरेश नीरव सावन का महीना। चैत्र मास से शुरू होनेवाले भारतीय कैलेंडर का पांचवा महीना। पांच यानि सृष्टि के पंचभूत का प्रतीक। तो फिर क्यों न हो भूताधिपति महादेव को प्रिय यह पांचवां महीना। जो स्वयं जल की तरह तरल और भोले हैं। जिनके ...

July 21st, 2011 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 133 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Shiv, शिव, सावन

आज बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस है

आज बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस है वीरेन्द्र जैन उन्नीस जुलाई वह तिथि है, जिसने वर्ष 1969 में न केवल राजनीति के क्षेत्र में अपितु आर्थिक, सामाजिक क्षेत्र में भी अपने निशान छोड़े है, यह वह दिन था जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद में अपना बहुमत बनाने के लिए वामपंथी दलों से समर्थन ...

July 19th, 2011 | लेखक : वीरेन्द्र जैन | 38 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Bank Natinalism Day, बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस

और कितने आतंकवादी हमले सहेगा भारत?

और कितने आतंकवादी हमले सहेगा भारत? नरेश भारतीय भारत में आतंकवादी धमाकों का दौर फिर से शुरू हो गया है. महानगरी मुम्बई जो अभी २००८ के धमाकों की गूंज और विनाशलीला को भुला नहीं सकी है उस पर इन ताजा हमलों से प्रकटत: उन्हीं तत्वों द्वारा पुनरपि यह सन्देश भारत को दिया गया है कि उनकी तरफ ...

July 15th, 2011 | लेखक : नरेश भारतीय | 414 views | 3 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: terrorism, आतंकवाद, इन्डियन मुजाहिदीन, मुंबई पर हमला

हुसैन की कला और कलाबाजी

हुसैन की कला और कलाबाजी शंकर शरण भारत के लोग दिवंगत व्यक्तियों के प्रति अप्रिय सत्य सामान्यतः नहीं कहते। किन्तु राजनीतिक लोगों और राष्ट्रीय प्रश्नों पर यह सलीका छोड़ना पड़ता है। फिर भी यदि नीचे कही गई बातें किन्हीं को अवसर के उपयुक्त न लगे तो उसे निवेदन है कि मुल्कराज आनंद के निधन पर खुशवंत ...

July 15th, 2011 | लेखक : शंकर शरण | 176 views | 4 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: MF Hussain, कला, कलाबाजी, चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन, हुसैन

बलि दो नौकरी लो – सरकारी बाबा

बलि दो नौकरी लो – सरकारी बाबा हादसों में शिकार मासूम जिन्दगी कि मौत पर गैर जिम्मेदाराना राजनीति और खबरों के नाम पर भावनाओं के साथ मीडिया द्वारा बलात्कार करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं । रेल हादसा के बाद होने वाली मौत पर सरकार – मौत के सन्नटे को चीरता सरकारी घोषणा मौत के लिए मुआवज़ा देना, मानो ...

July 14th, 2011 | लेखक : अब्दुल रशीद | 61 views | 1 Comment »
Posted in Category: लेख | Tags: Rail accident, रेल हादसा, सीरियल बम बलास्ट

चौथा विश्वयुद्ध डंडों और पत्थरों से लड़ा जाएगा

चौथा विश्वयुद्ध डंडों और पत्थरों से लड़ा जाएगा महेश दत्त शर्मा प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1919) तथा द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) ने दुनिया को ऐसी अपूरणीय क्षति दी, जिसकी भरपाई वह आज भी कर रही है। हिरोशिमा और नागासाकी के जख्म आज भी नहीं सूखे हैं। हिटलर ने यहूदियों को जो घाव दिए, उनसे वे आज भी आतंकित हैं। पर्ल हारबर का ...

July 13th, 2011 | लेखक : महेश दत्त शर्मा | 83 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Fourth world war, चौथा विश्वयुद्ध, डंडों, पत्थरों

टैगोर को नोबल प्राइज मिला, महात्मा गांधी को क्यों नहीं?

टैगोर को नोबल प्राइज मिला, महात्मा गांधी को क्यों नहीं? महेश दत्त शर्मा अकसर बीचबीच में यह सवाल उठता रहता है कि महात्मा गांधी को नोबल प्राइज क्यों नहीं मिला? इसके लिए कहना यह होगा कि लोग नोबल प्राइज मिलने पर चर्चा में आते हैं, वहीं जब गांधी जी को नोबल प्राइज देने की सुगबुगाहर शुरू हुई, वे उससे काफी पहले ...

July 12th, 2011 | लेखक : महेश दत्त शर्मा | 139 views | 3 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Rabindranath Tagore, गीतांजलि, गीतांजलिरू साँग अॉफरिंग्स, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, नोबल प्राइज, महात्मा गांधी

सामाजिक लड़ाई जारी है समलैंगिकों की

सामाजिक लड़ाई जारी है समलैंगिकों की महेश दत्त शर्मा भारतीय समलैंगिकों को कानूनी लड़ाई जीतकर क्या मिला है, यकीनन कानूनी संरक्षण तो मिला ही है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने इसे एक बीमारी कहकर एक नई बहस छेड़ दी है। इससे लगता है कि समलैंगिकों को अभी लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। हमारा ...

July 8th, 2011 | लेखक : महेश दत्त शर्मा | 96 views | No Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Social War, समलैंगिकों, सामाजिक लड़ाई

कन्या भ्रूण हत्या

कन्या भ्रूण हत्या यह पतन की पराकाष्ठा है। पश्चिमी सभ्यता भारतीय जीवन-मूल्यों को लीलने में जुटा हुआ है। भारतीय खान-पान, वेश-भूषा, भाषा, रहन-सहन, जीवन-दर्शन इन सब पर पाश्चात्य प्रवृति हावी होती जा रही है। हम नकलची होते जा रहे हैं। हम अपना वैशिष्टय भूलते जा रहे हैं। हम स्व-विस्मृति के कगार पर हैं। ...

July 6th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 164 views | 2 Comments »
Posted in Category: लेख | Tags: Female Foeticide, कन्या भ्रूण हत्या

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