अमृत कलश में भरे सोम रस का रहस्य

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प्रमोद भार्गव श्रावकों, कलश में भरे इस अमृत को अगर आप अलौकिक पेय द्रव्य न मानकर चलें, तो आपको इस पदार्थ को समझने में ज्यादा आसानी होगी। हम सभी सुनते-पढ़ते चले आ रहे हैं कि वैदिक देवता सोमरस पीते थे। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इसे सोमलता नामक वनस्पति से बनाने का उल्लेख है। इसलिए सोमलता… Read more »

नारी के बारे में तुलसीदास जी के विचार

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तमाम सीमाओं और अंतर्विरोधों के बावजूद तुलसी लोकमानस में रमे हुए कवि हैं। वे गृहस्थ-जीवन और आत्म निवेदन दोनों अनुभव क्षेत्रों के बड़े कवि हैं। तुलसी भक्ति के आवरण में समाज के बारे में सोचते हैं। इनकी साधना केवल धार्मिक उपदेश नहीं है वह लोक से जुड़ी हुई साधना है।

कर्बला : हुसैन का भारत से दिल और दर्द का सम्बंध

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कर्बला पर गौर करने के बाद ये साफ हो जाता है कि मोहम्मद साहब ने जो इस्लाम दिया था वह ज़ुल्म और दहशतगर्दों का इस्लाम नहीं बल्कि अमन शांति और सब्र का इस्लाम है।आज के दौर मे फिर आतंकवात ने पंख फैला लिये हैं,इस्लाम की नई परिभाषा गढ़ कर बेगुनाहों का कत्ल किया जा रहा है।महिलाओं की आबरू लूटी जा रही है,लोगों को बेघर किया जा रहा है।

2 अक्टूबर : अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस

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यदि किसी ‘विशुद्ध मानव’ जो सब नैसर्गिक मानवीय गुणों से परिपूर्ण हो, इसकी मूर्त कल्पना करनी हो तो ‘राम’, ‘कृष्ण’, ‘बुद्ध’ के अवतार के बाद गाँधीजी का व्यक्तित्व उभरकर आता है। गाँधीजी से बढ़कर मानव पूजक दिखलाई देना आसान नहीं है।

उनकी नजर में शायद हिंदी शासितों की भाषा है,और अंग्रेजी शासकों की भाषा है।

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श्रीराम तिवारी वेशक दुनिया के अधिकांस प्राच्य भाषा विशारद ,व्याकरणवेत्ता ,अध्यात्म -दर्शन के अध्येता और भाषा रिसर्च- स्कालर समवेत स्वर में उत्तर वैदिक संस्कृत वांग्मय के ही मुरीद रहे हैं। जिसका वैचारिक चरमोत्कर्ष उस वेदांत दर्शन में झलकता है,जिसके प्रतिवाद स्वरूप अनेक ‘अवैदिक’ भारतीय दर्शनों का यहाँ निरंतर उदभव होता रहा है। जिसका भाषाई चरमोत्कर्ष… Read more »

अक्तूबर मास के पर्व और महापुरुषों की जयन्तियां

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मनमोहन कुमार आर्य अक्तूबर, 2016 माह में अनेक पर्व व जयन्तियां पड़ रही हैं। जयंतियों में वीर हनुमान, महर्षि बाल्मीकि, ऋषि धनवन्तरी, गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी सम्मिलित हैं वहीं पर्वों में विजयादशमी, दीपावली, ऋषि दयानन्द बलिदान दिवस एवं गोवर्धन पूजा सम्मिलित हैं। इस अवसर पर हम कुछ चर्चा सभी जयन्तियों व पर्वों… Read more »

शिक्षक दिवस की महत्ता

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डा. राधेश्याम द्विवेदी गुरु की महत्ता बताने वाला दिवस:- शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जीवन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। इस वजह से हमारा राष्ट्र ढ़ेर सारे… Read more »

राजनीति का हिन्दूकरण’ और सावरकर, भाग-2

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सावरकर जी के हिंदू राष्ट्र में ‘राजनीति का हिंदूकरण’ हो जाने पर कुछ ये बातें स्वाभाविक रूप से देखने को मिलतीं :- हिंदी को प्राथमिकता दी जाती :- सावरकर जी मूलरूप से मराठी भाषा को बोलने वाले थे। पर उनका अपना चिंतन अत्यंत राष्ट्रवादी और पवित्र था। मराठी भाषी होकर भी वह हिंदी के अनन्यतम… Read more »

एक चिट्ठी, धर्माचार्यों के नाम

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संदर्भ: मूर्ति विसर्जन पर प्रधानमंत्री जी के मन की बात आदरणीय आचार्यवर, आम धारणा है कि मुख्य रूप से उद्योग, सीवेज और शहरी ठोस कचरा मिलकर हमारी नदियों को प्रदूषित करते हैं। इसीलिए प्रदूषण के दूसरों स्त्रोत, कभी किसी बङे प्रदूषण विरोधी आंदोलन का निशाना नहीं बने। समाज ने खेती में प्रयोग होने वाले रासायनिक… Read more »

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2016

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डा. राधेश्याम द्विवेदी सप्ताह का इतिहास:-पोषण शिक्षा के द्वारा अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 1982 में केन्द्रीय सरकार द्वारा पहली बार इस अभियान की शुरुआत की गयी क्योंकि राष्ट्रीय विकास के लिये मुख्य रुकावट के रुप में कुपोषण है। इसी लक्ष्य के लिये लोगों को बढ़ावा देने के लिये,… Read more »