होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व

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श्वेत रंग की कमी होती है, तो अशांति बढ़ती है, लाल रंग की कमी होने पर आलस्य और जड़ता पनपती है। पीले रंग की कमी होने पर ज्ञानतंतु निष्क्रिय बन जाते हैं। ज्योतिकेंद्र पर श्वेत रंग, दर्शन-केंद्र पर लाल रंग और ज्ञान-केंद्र पर पीले रंग का ध्यान करने से क्रमशः शांति, सक्रियता और ज्ञानतंतु की सक्रियता उपलब्ध होती है। होली के ध्यान में शरीर के विभिन्न अंगों पर विभिन्न रंगों का ध्यान कराया जाता है और इस तरह रंगों के ध्यान में गहराई से उतरकर हम विभिन्न रंगों से रंगे हुए लगने लगा।

स्मारकों के सुरक्षा में हम कितने सफल

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डा.राधेश्याम द्विवेदी स्मारक किसे कहते हैं:- कोई वस्तु या रचना जो किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति या घटना की स्मृति को बनाए रखने के लिए हो, स्मारक कहलाता है, जैसे- शहीद स्मारक, मकबरा, समाधि, स्तूप और निशानीय स्मृति चिह्न आदि। राष्ट्रीय स्मारक एक एसा स्मारक होता है जिसे उस देश के इतिहास, राजनीति या उसके लोगों के… Read more »

जहां कण-कण में बिखरी है ऋषि वाल्मिकी की स्मृतियां…!!

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तारकेश कुमार ओझा — सीता ने व्यतीत किया था अज्ञातवास — लव-कुश का हुआ था जन्म आधुनिकता के उच्चतम शिखर पर जहां आज भी मानव जीवन के चिह्न नदारद हो वहां सदियों पहले मानवीय दिनचर्या की उपस्थिति किसी को भी देवत्व प्रदान करने के लिए पर्याप्त है, क्योंकि अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में सामान्य जीवन यापन… Read more »

विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती

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विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती ‘दी गार्डियन’ में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख के संदर्भ में स्टीफन हॉकिंग को भेजे पत्र का हिंदी अनुवाद ‘दी गार्डियन’ में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित… Read more »

हाथीयुद्ध मनोरंजन का लोकप्रिय साधन तथा आगरा के हाथीघाट का इतिहास

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डा- राधेश्याम द्विवेदी हाथियों का व्ंशानुगत इतिहास :- हाथी जमीन पर रहने वाला विशाल आकार का स्तनपायी प्राणी है। आज के समय में हाथी परिवार कुल में केवल दो प्रजातियाँ जीवित हैं। एलिफस तथा लॉक्सोडॉण्टा। तीसरी प्रजाति मैमथ विलुप्त हो चुकी है। जीवित दो प्रजातियों की तीन जातियाँ पहचानी जाती हैं। लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति की दो… Read more »

अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के

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अनिल अनूप पटियाला (पंजाब) में पुरानी रियासत के महल आज भी महाराजा भुपिंदर सिंह की 365 रानियों के किस्से बयान करते हैं। महाराजा भुपिंदर सिंह ने यहां वर्ष 1900 से वर्ष 1938 तक राज किया। महाराज भुपिंद्र सिंह का जीवन रंगीनियों से भरा हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा की 10 अधिकृत रानियों के समेत… Read more »

जीवित अन्त्येष्टि

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कभी कभार आपको ऐसी किताब मिल जाती है जो आपको चौंकाती है और जीवन के प्रति आकर्षण बढ़ाती है। पिछले दिनो एक किताब पढ़ने का अवसर मिला। किताब का नाम है Tuesdays with Morrie. यह किताब अमेरिका के मैसाचुसेट्स के ब्राण्डिस विश्वविद्यालय में सामाजिक मनोविज्ञान के प्रोफेसर मॉरी श्वार्ज़ की कहानी कहती है। मॉरी जीवन… Read more »

स्थानीय हिन्दू शासक भी लड़ते रहे अपना स्वतंत्रता संग्राम

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राकेश कुमार आर्य  सिकंदर लोदी बना सुल्तान बहलोल लोदी की मृत्यु जुलाई 1489 ई. में हो गयी थी। तब उसके पश्चात दिल्ली का सुल्तान उसका पुत्र निजाम खां सिकंदर दिल्ली का सुल्तान बना। उस समय दिल्ली सल्तनत कोई विशेष बलशाली सल्तनत नही रह गयी थी। उसके विरूद्घ नित विद्रोह हो रहे थे और सुल्तानों… Read more »

विश्व हिन्दी दिवस का हिन्दी के वैश्विक विस्तार में योगदान

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डॉ. शुभ्रता मिश्रा 10 जनवरी का दिन विश्व हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाना हर उस भारतवासी के लिए गौरव का विषय है, जो अपनी हिन्दी भाषा से सच्चा प्रेम करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता, अपनी मातृभूमि और अपनी मातृभाषा से प्राकृतिक रुप से प्रेम होता है। इसे जताने की आवश्यकता नहीं… Read more »

अत्याचारों की करूण गाथा के उस काल में भी आशा जीवित रही

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राकेश कुमार आर्य   सिकंदर के शासन काल में हिंदुओं की स्थिति कश्मीर में सिकंदर का शासन और हिंदुओं की स्थिति इस प्रकार थी कि सिकंदर का शासन मानो खौलते हुए तेल का कड़ाह था और हिंदू उसमें तला जाने वाला पकौड़ा। ऐसी अवस्था में बड़ी क्रूरता से हिंदुओं से जजिया वसूल किया जाता था।… Read more »