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व्यंग्य/ हे गण, न उदास कर मन!!

व्यंग्य/ हे गण, न उदास कर मन!! अशोक गौतम गण उठ, महंगाई का रोना छोड़। महंगाई का रोना बहुत रो लिया। पहले मां बच्चे को रोने से पहले खुद दूध देती थी। तब देश में लोकतंत्र नहीं था। अब समय बदल गया है। बच्चा रोता है तो भी मां उसे दूध देने के लिए सौ ...

January 26th, 2011 | लेखक : अशोक गौतम | 55 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

यात्रा-संस्मरण/ इजिप्त की सैर- पिरामिडों के देश में

यात्रा-संस्मरण/ इजिप्त की सैर- पिरामिडों के देश में पंडित सुरेश नीरव विश्वप्रसिद्ध पिरामिडों,ममियों और विश्व सुंदरी नेफरीतीती और क्लियोपेट्रा के देश इजिप्त के लिए 11जनवरी2011 को गल्फ एअर लाइंस की फ्लाइट से हम लोग बेहरीन के लिए दिल्ली से सुबह 5.30 बजे की फ्लाइट से रवाना हुए। इजिप्त की राजधानी केरों पहुंचने के लिए बेहरीन से दूसरी फ्लाइट ...

January 26th, 2011 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 47 views | 2 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Yatra sansmaran, यात्रा-संस्मरण

वामपंथियों की उल्टी दुनिया

वामपंथियों की उल्टी दुनिया विजय कुमार अयोध्या प्रकरण पर सत्य के पक्ष में निर्णय आने पर कुछ दिन चुप रहकर अपनी आदत से मजबूर वामपंथी फिर वही उल्टा बाबरी राग गाने लगे। तब से मैं इनकी जन्मकुंडली का अध्ययन कर रहा हूं। बचपन में जब मेरा परिचय कम्यूनिस्ट शब्द से हुआ, तो मैं इन्हें पशु ...

January 17th, 2011 | लेखक : विजय कुमार | 246 views | 3 Comments »
Posted in Category: राजनीति, व्यंग्य | Tags: Left, वामपंथ

पैसे की भाषा

पैसे की भाषा विजय कुमार इन दिनों शादी-विवाह का मौसम है। जिधर देखो उधर ‘आज मेरे यार की शादी है’ की धुन पर नाचते लोग मिल जाते हैं। कुछ लोगों को इस शोर या सड़क जाम होने से परेशानी होती है; पर वे यह सोच कर चुप रहते हैं कि अपनी जवानी में उन्होंने ...

December 25th, 2010 | लेखक : विजय कुमार | 44 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Money, पैसे

यूपीए सरकार और भ्रष्टाचार

यूपीए सरकार और भ्रष्टाचार पंडित सुरेश नीरव यूपीए सरकार और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के अभिन्न पूरक त्तव हैं। जैसे हायड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से पानी बनता है वैसे ही है इनका अटूट मिलन। और जैसे पानी की रासायनिक सरंचना में से हायड्रोजन और ऑक्सीजन में से किसी एक को अलग करने पर पानी पानी नहीं ...

December 24th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 76 views | 3 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: UPA Government, भ्रष्‍टाचार, यूपीए सरकार

व्यंग्य: वर्तमान परिदृश्य

व्यंग्य: वर्तमान परिदृश्य विजय कुमार बहुत पुरानी बात है। एक रानी के दरबार में राजा नामक एक मुंहलगा दरबारी था। रानी साहिबा मायके संबंधी किसी मजबूरी के चलते गद्दी पर बैठ नहीं सकीं। बेटा छोटा और अनुभवहीन था, इसलिए उन्होंने अपने एक विश्वासपात्र सरदार को ही गद्दी पर बैठा दिया। वे उस राज्य को ...

December 24th, 2010 | लेखक : विजय कुमार | 37 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

व्यंग्य/ चातक वैष्‍णव प्याज पुकारे

व्यंग्य/ चातक वैष्‍णव प्याज पुकारे अशोक गौतम उनकी पार्टी के बीसियों समाज सेवकों के पास बीसियों धक्के खाने के बाद बड़ी मुश्किल से अपनी चिंता पर उनकी चिंता व्यक्त करा अपनी चिंता से मुक्त होने के लिए उनके दरबार में हाजिर हुआ तो देखता क्या हूं कि वे तो चिंताओं से मुझसे भी ...

December 24th, 2010 | लेखक : अशोक गौतम | 54 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य/ रेडियोएक्टिव साहित्यकार

हास्य-व्यंग्य/ रेडियोएक्टिव साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव अपने लपकू चंपक जुगाड़ीजी आजकल रेडियो एक्टिव साहित्यकार हो गए हैं। यूरेनियम-जैसे रेडियो एक्टिव पदार्थ में और रेडियोएक्टिव साहित्यकार में सिर्फ इतना फ़र्क होता है कि रेडियोएक्टिव साहित्यकार हमेशा अपनी दम पर सक्रिय रहता है वहीं रेडियोएक्टिव साहित्यकार सिर्फ रेडियो में नोकरी लगने के बाद ही सक्रिय होता ...

December 22nd, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 24 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya

हास्य-व्यंग्य/ निजी कारणों से हुई सरकारी मौत

हास्य-व्यंग्य/ निजी कारणों से हुई सरकारी मौत पंडित सुरेश नीरव बांसुरी प्रसादजी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि ज़िंदगीभर चैन की बांसुरी बजानेवाले बांसुरी प्रसाद की मौत सरकार के जी का जंजाल बन जाएगी। संवेदनशील सरकार का एक कलाकार की मौत पर परेशान होना लाजिमी है। और फिर बांसुरी प्रसादजी तो सरकार के बुलाने पर ही लोक-कला-संगीत ...

December 17th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 26 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

व्यंग्य/ किरकिटवा उर्फ किस्सा ए सत्र

व्यंग्य/ किरकिटवा उर्फ किस्सा ए सत्र अशोक गौतम पहाड़ों से ऊंचे पेड़ों से सूरज पूरी तरह ढका होने के बाद भी जनता के हिस्से की चुराई गुनगुनी धूप का आंनद ले रहा था कि सामने अपने सरकारी प्राइमरी स्कूल में छुट्टियां होने के बाद अपने बेड़े के बच्चे तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार गुड्डू मौसी ...

December 17th, 2010 | लेखक : अशोक गौतम | 19 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya

हास्य-व्यंग्य/ झूठ की मोबाइल अकादमीः पिद्दी राजा

हास्य-व्यंग्य/ झूठ की मोबाइल अकादमीः पिद्दी राजा पंडित सुरेश नीरव सच बोलने के लिए दिमाग की जरूरत नहीं पड़ती है। जब से मैंने यह महावाक्य पढ़ा और सुना है तभी से जितने भी दिमागी-विद्वान लोग हैं, उन्हें मैं झूठा मानने लगा हूं। और दुनिया के जितने भी झूठे हैं,उन्हें विद्वान। इस समीकरण के मुताबिक जो जिस दर्जे का ...

December 14th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 46 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Mobile, मोबाइल

हास्य-व्यंग्य /हवासिंह हवा-हवाई

हास्य-व्यंग्य /हवासिंह हवा-हवाई पंडित सुरेश नीरव जब से हवासिंह किसी ऊपरी हवा के प्रभाव में आए हैं बेचारे की तो हवा ही खराब हो गई है। और हवा हुई भी इतनी खराब है कि नाक की प्राणवायु और कूल्हे की अपान वायु में कोई भेद नहीं रह गया है। हवा का ऐसा हवाई सदभाव ...

December 13th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 25 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य / सत्यवीरजी के झूठे बयान

हास्य-व्यंग्य / सत्यवीरजी के झूठे बयान पंडित सुरेश नीरव सत्यवीरजी का दावा है कि वे कभी झूठ नहीं बोलते और उनके जाननेवालों का दावा है कि सत्यवीरजी से बड़ा झूठा उन्होंने अपनी ज़िंदगी में आजतक नहीं देखा है। उनके जन्म को लेकर किंवदंती प्रचलित है कि जिस गांव में सत्यवीरजी का जन्म हुआ वहां सत्यवीरजी के जन्म ...

December 6th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 62 views | 2 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

क्या फायदा बड़े होने में

क्या फायदा बड़े होने में -पंडित सुरेश नीरव ये छोटेपन का दौर है। कभी छुटपन में पढ़ा था कि बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जैसे पेड़ खजूर..मगर अब जब बड़े हुए तब समझ में आई बड़ेपन की फालतूनेस। और छोटेपन की यूजफुल उपयोगिता। जिधर देखो उधर छोटेपन का जलबा। छोटेपन का दंभ। बड़े तो बेचारे अपने बड़प्पन ...

December 6th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 56 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Profit, फायदा

व्यंग्य / चक्कर करोड़पति बनने का

व्यंग्य / चक्कर करोड़पति बनने का -गिरीश पंकज हम अपने मित्र लतखोरीलाल के घर पहुँचे। देखा तो वे सामान्य ज्ञान की किताबों से घिरे हुए हैं। मैं चकराया। इस प्रौढ़ावस्था में ये पट्ठा कौन-सी परीक्षा की तैयारी में भिड़ा हैं। पूछने पर शरमाते हुए बोले - ''हे...हे...बस, ऐसे ही...'' ''अरे, शरमाओ मत, बता भी दो। कहीं ...

December 3rd, 2010 | लेखक : गिरीश पंकज | 96 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्यंग्य

व्‍यंग/ रिश्तों का सुपरपावर देश भारत

व्‍यंग/ रिश्तों का सुपरपावर देश भारत पंडित सुरेश नीरव ये कितनी नाइंसाफी है कि बेचारा आदमी एक और उसकी जान को रिश्ते अनेक। बेचारा कहां जाए। और कितने रिश्ते निभाए। एक को पकड़ो तो दूसरा मेंढक की तरह उछलकर दूर खड़ा हो जाता है। हम यह तो फिजूल ही कहते हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान देश ...

December 2nd, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 59 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: India, भारत

व्‍यंग/ परंपरा की परंपरा

व्‍यंग/ परंपरा की परंपरा पंडित सुरेश नीरव हमें गर्व है कि हम हिंदुस्तानी हैं। जहां आज भी परंपराओं को निभाने की परंपरा जिंदा है। भले ही आदमियत मर चुकी हो। पैदा होने से लेकर मरने तक यहां आदमी परंपराओं को निभाता है। सच तो यह है कि यहां आदमी परंपराओं को ही ओढ़ता है औऱ ...

December 2nd, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 26 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Tradition, परंपरा

हास्य-व्यंग्य : रपट कूकर कॉलौनी की

हास्य-व्यंग्य : रपट कूकर कॉलौनी की मैं नगर के सबसे पॉश इलाके में रहता हूं। चाय के उत्पादन से लिए जैसे दार्जिलिंग और बरसात के मामले में चेरापूंजी की प्रतिष्ठा है,ठीक वैसे ही कुत्तों के मामले में हमारी कॉलौनी का भी अखिल भारतीय रुतबा है। एक-से-एक उच्चवर्णी और कुलीन गोत्रों के कुत्ते इस कूकर कॉलौनी में ...

November 29th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 86 views | 2 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, पंडित सुरेश नीरव, हास्य-व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य/ मुन्‍ना बदनाम हुआ धन्नो ये तेरे लिए

हास्य-व्यंग्य/ मुन्‍ना बदनाम हुआ धन्नो ये तेरे लिए पंडित सुरेश नीरव हम बदनाम भी हुए तो कुछ गम नहीं...चलो इस बहाने नाम तो हुआ। नामचीन होने के तमाम बहाने आजमाने के बाद दुनियाभर के आम आदमी ने सर्वसम्मति से नामचीन होने के लिए बदनाम होने के फार्मूले को ही सबसे सुविधापूर्ण और सम्मानजनक नुस्खा पाया है। इसमें सबसे बड़ा ...

November 26th, 2010 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 74 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: vyangya, व्‍यंग

व्यंग्य/विपक्ष का मुंह बंद कर दिया रे……

व्यंग्य/विपक्ष का मुंह बंद कर दिया रे...... -अशोक गौतम 'मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनाऊं..... मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनाऊं। किसका किस्सा सुनोगे? राष्‍ट्रमंडल खेलों में खिलाड़ियों से अधिक सोना बटोरने वाले दरबारियों का?' 'नहीं, सोने से अधिक प्यारा तो हमें भूखे सोना है। क्योंकि अपनी सरकार चुनने के बाद भी हमारी किस्मत ...

November 20th, 2010 | लेखक : अशोक गौतम | 49 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: mouth shut of opponent, विपक्ष का मुंह बंद कर दिया

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