असली खाद के पहचान की घरेलू विधि

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राजमणि यूरिया किसान भाइयों यूरिया की असली पहचान है इसके सफेद चमकदार लगभग समान आकार के कड़े दाने इसका पानी में पूर्णतया घुल जाना तथा इसके घोल को छूने पर शीतल अनुभूति होना ही इसकी असली पहचान है। किसान भाइयों यूरिया को तवे पर गर्म करने से इसके दाने पिघल जाते है यदि हम आंच… Read more »

हवा की शुद्वता के लिए प्रदूषण के खिलाफ जनान्दोलन छेड़ने की जरूरत

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खेती और किसानों के लिए अहम पराली को संरक्षित करने के बाबत बनाई गई राष्ट्रीय पराली नीति भी राज्य सरकारों के ठेंगा पर दिख रही है। गेहूं, धान और गन्ने की पत्तियां सबसे ज्यादा जलाई जाती है। अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार देश के सभी राज्यों को मिलाकर सालाना 50 करोड़ टन से अधिक पराली निकलती है उम्मीदों से भरे प्रदेश उत्तर प्रदेश मे छह करोड़ टन पराली में से 2.2 करोड़ टन पराली जलाई जाती है।

कहीं आपकी जन्म कुंडली में व्यभिचारी जीवनसाथी मिलने के योग तो नहीं?

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यदि जन्म कुंड़ली मे सप्तम भाव में राहु होने पर जीवनसाथी धोखा देने वाला कई स्त्री-पुरुष से संबंध रखने वाला व्यभिचारी होता हैं व विवाह के बाद अवैध संबंध बनाता है। उक्त ग्रह दोष के कारण ऐसा जीवनसाथी मिलता हैं जिसके कई स्त्री-पुरुष के साथ अवैध संबंध होते हैं। जो अपने दांपत्य जीवन के प्रति अत्यंत लापरवाह होते हैं।

फसल की अनिश्चिन्तताओं को दूर करता प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

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सुवर्णा सुषमेश्वरी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था पर आधारित होने के कारण कृषि के विकास के लिए विभाजित भारत में भारत सरकार के द्वारा समय –समय पर अनेक कार्यक्रमों , योजनाओं का प्रारम्भ किया गया , लेकिन भारतीय कृषि के विकास के लिए ये योजनायें ढाक का पात ही साबित हुई हैं । विभाजन के पश्चात कृषि… Read more »

जैविक कृषि : कृषि विचार मन्थन से अमृत तत्व

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किसी भी कार्य की दिशा में बढाया गया प्रथम कदम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि प्रथम कदम मार्ग को प्रशस्त करता है। समय तथा हमारा जीवन हमसे अपेक्षा करता है कि हम स्वयं का ध्यान रखें तथा ध्यान हम तभी रख सकते हैं जब हमारा आहार शुध्द हो एवं शुध्द आहार के लिए कृषि… Read more »

कृषि का सत्यानाश

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भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है| देश के ग्रामीण इलाकों में रहनेवाली आबादी भारी तौर पर कृषि पर ही आधारित है| इस देश का किसान अपनी मेहनत और परिश्रम के बल पर अनाज उगाता है, उसे सींचता है फिर भी उनकी मेहनत का मूल्य उपजाने में लगी लागत से भी कम मिलता है| अब… Read more »

किसान आयोग की संस्तुति लागू हो

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डा. राधेश्याम द्विवेदी खेती और किसानी पर जितनी बातें हमारे देश में होतीं हैं, अगर उनका कुछ अंश भी साकार हो तो हमारे यहां खेती को वाकई पुनर्जीवन मिल जाएगा। जो खेती इस समय मजबूरी का कार्य बन चुकी है, जिसे करने वाले अन्य पेशों से अपने को हीनतर मानने की स्वाभाविक मानसिकता में जीते… Read more »

जंगलों की भयावह आग

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अजेन्द्र अजय वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा से उत्तराखण्ड अभी ठीक से उबर भी नहीं सका था, कि जंगलों की भयावह आग ने एक बार फिर से इस प्रदेश को आपदा के आगोश में ले लिया। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में प्रदेश का 2876 हेक्टेयर वन क्षेत्र दावानल का शिकार है। फरवरी… Read more »

सृष्टि का आरम्भ और कृषि विज्ञान

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–मनमोहन कुमार आर्य ज्ञान और विज्ञान परस्पर पूरक शब्द हैं। वस्तुओं का साधारण ज्ञान सामान्य ज्ञान के अन्तर्गत आता है और उनका विशेष ज्ञान विज्ञान कहलता है। कृषि का तात्पर्य मनुष्यों के आहार के पदार्थो यथा फल, वनस्पतियां व अन्न आदि का अच्छा व गुणवत्तायुक्त प्रचुर मात्रा में उत्पादन करने को कह सकते हैं। सृष्टि… Read more »

प्रकृति की अव्यवस्था पर एक नज़र

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पृथ्वी पर कोई भी जीव एकल जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है इसलिए मानव और प्रकृति की परस्पर आत्मनिर्भरता एवं सद्भावनाओं को समाप्त करने से हमारा पारिस्थितिकी तंत्र डगमगा रहा है। पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, वैभव और ऐश्वर्य प्राप्त करने के उतावलेपन और पर्यावरण पर विजय पाने की लालसा ने प्रतिकूल प्रभाव डाला… Read more »