निजता-हनन के कानून

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प्रमोद भार्गव व्हाट्सप की नई गोपनीय नीति से निजता के हनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने कहा कि निजी जानकारियों की सुरक्षा जीवन के अधिकार के दायरे में आता है। लिहाजा निजी डाटा को व्यावसायिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना गलत है। निजी जानकारी जीवन के अधिकार का ही एक पहलू… Read more »

पत्रकारिता की विश्वसनीयता : भरोसे का वज़न करता समाज 

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मनोज कुमार इन दिनों भरोसा तराजू पर है. उसका सौदा-सुलह हो रहा है. तराजू पर रखकर उसका वजन नापा जा रहा है. भरोस कम है या ज्यादा, इस पर विमर्श चल रहा है. यह सच है कि तराजू का काम है तौलना और उसके पलड़े पर जो भी रखोगे, वह तौल कर बता देगा लेकिन… Read more »

सोशल मीडिया पर मधुर संवाद 

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शैलेन्द्र चौहान सम्प्रति सोशल मीडिया पर दो तरह के लोग सक्रिय हैं। एक वे जो लिखते हैं और दूसरे जो बकते हैं। लिखने वाले लोग अच्छा भी लिखते हैं और बुरा भी. लेकिन बकने वाले लोग बस बकते हैं। और जो वे बकते हैं, वे अपने से असहमत लोगों से बड़ी  मधुरता से संवाद करते… Read more »

आपातकाल के समय उत्तराखण्ड में पत्रकारिता

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गढवाल टाईम्स नाम से  पाक्षिक पत्रिका प्रकाशित करते थे। वे बताते हैं कि ठभ्म्स् रानीपुर हरिद्वार में अस्सिटैंट इंजीनियर ए.के.सूरी के घर बैठक होती थी, समाचारों का संकलन किया जाता था। उनमें छपने लायक समाचार तय किये जाते कहां कितने लोग पकड़े गये, संघ, जनसंघ व अन्य कितने लोगों ने सत्याग्रह किया, क्या-क्या अत्याचार हुये। ए.के.सूरी अपने आॅफिस से साइक्लोस्टाइल मशीन मंगाकर घर पर ही पत्रिका छापते। एक-एक प्रति डाक द्वारा जिलाधिकारी, एस.पी. एवं शासन के लिये भेजी जाती, शेष थैले में भरकर क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं को वितरित कर दी जाती। कार्यकर्ताओं द्वारा समाज में विचार प्रेषित किये जाते।

वेबसाइट की आड़ में पत्रकार बनाने का गोरखधंधा

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पत्रकार बनने का सुनहरा मौका । आवश्यकता है देश के हर जिले में रिपोर्टर, कैमरामैन और ब्योरो की. दिए गए नम्बर पर जल्द से जल्द सम्पर्क करें। ये मै नहीं कह रहा हूं। आज कल धड़ल्ले से खुल रही न्यूज वेबसाइट कह रही हैं। सोशल मीडिया पर मज़ाक बनाकर रख दिया है। जिधर देखो आवश्यकता… Read more »

सोशल मीडिया का धमाल  

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  मेरे बच्चे कभी औरकुट पर चैट करते दिखते थे तो बस एक रटी रटाई डाँट लगा दिया करती थी, पढ़ाई करो …….समय बर्बाद मत करो……….. उस समय तक कम्पूयूटर मुझे हउआ सा लगता था कभी छुआ नहीं था,सीखना तो दूर की बात है। अब औरकुट तो कोमा में है पर उसके बन्धु पूरे विश्व में… Read more »

सीबीआई ने धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई की है या एनडीटीवी की स्वतंत्रता के खिलाफ? – एस. गुरुमूर्ति

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पूरे यूपीए सरकार के कार्यकाल में, एनडीटीवी ने अपनी शेल सहायक कंपनियों में निवेशकों की पहचान का खुलासा करने से इनकार कर दिया। यहाँ तक कि उसने कानूनन आवश्यक अपेक्षित विदेशी सहयोगियों की बैलेंस शीट को भी संलग्न नहीं किया। हैरत की बात तो यह कि यूपीए सरकार के कंपनी कानून विभाग ने भी बैलेंस… Read more »

राष्ट्रवादी पत्रकारिता का दौर

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भारत की अवधारणा एक ऐसे राष्ट्र की अवधारणा है जिसके लिए संघर्ष को निर्माण का आधार रूप में कभी स्वीकार नहीं किया गया. यहाँ आदि काल से ही चिंतन को प्राथमिकता दी गई और अनेकों भाषा, समुदाय, जाति इत्यादि के मष्तिष्क और शरीर यहाँ आएं और यहीं के होकर रह गए. ऐसे में सम्पूर्ण विश्वजगत… Read more »

ये कैसा विकास है

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भारत में मोबाईल के उपयोगकर्त्ताआंे की संख्या में लगातार बढोतरी हो रही है । जून, 2017 तक भारत में 42 करोड से भी अधिक मोबाईल उपभोक्ता हो चुके हैं । प्राथमिक तौर पर देखने और सुनने में ऐसा लगता है कि हमारे वतन में एक संचार क्रांति जन्म ले चुकी है और उसका निरंतर विकास… Read more »

ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म

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–मनोज कुमार ‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ चुके हैं जहां उद्देश्य तय है,… Read more »