ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म

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–मनोज कुमार ‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ चुके हैं जहां उद्देश्य तय है,… Read more »

नकारात्मक व ओच्छी मानसिकता की पत्रकारिता

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यह दुख का विषय है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कुछ ऐसे लोग प्रवेश कर गये हैं-जिनका खोजी पत्रकारिता से दूर दूर का भी संबंध नही है, उन्हें ना तो लोकतंत्र की परिभाषा ज्ञात है और ना ही धर्म की परिभाषा का ज्ञान है। वह उत्पीडऩ और भयादोहन कर लेखनी के साथ अन्याय करते हैं और समाज पर लेखनी का आतंक स्थापित करते हैं। ऐसी प्रवृत्ति निश्चय ही भयावह है।

एक अजूबा यह भी : शिलालेख में विज्ञापन

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भारत में विज्ञापन संबंधी इतिहास खोजने वालों ने बताया है कि जहाँ तक उत्पादित माल बेचने के लिए विज्ञापन का संबंध है, संभवतः विश्व के सबसे पुराने विज्ञापन का श्रेय भारत को ही है । यह लगभग डेढ़ हजार वर्ष पुरानी बात है । तब देश के एक बड़े भाग पर कुमार गुप्त -प्रथम (415–455 ई.) का शासन था (जिसे शक्रादित्य और महेंद्रादित्य भी कहते हैं ; पिता चन्द्रगुप्त द्वितीय और माँ ध्रुवदेवी थीं जिन्हें ध्रुवस्वामिनी भी कहते हैं; प्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर ‘प्रसाद’ के इसी नाम के नाटक से कुछ पाठक परिचित ही होंगे) । कुमारगुप्त का साम्राज्य बंगाल से काठियावाड़ और हिमालय से नर्मदा तक फैला हुआ था । दिल्ली में क़ुतुब मीनार के पास खुले आकाश में खड़ा वह लौह स्तंभ भी कुमारगुप्त का ही बनवाया हुआ है जिसमें आजतक जंक नहीं लगी ।

यह कैसा ‘राष्ट्रधर्म’ है?

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माचार पत्र एवं दृश्य मीडिया इसमें एक कारगर हथियार है। विगत इतिहास में सरकारी पैसों से वामपंथियों ने इसकी दम पर जहर घोला है घोल रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में मूल्य आधारित पत्रकारिता राष्ट्रीय विचारों की पत्रकारिता के टिमटिमाते ही सही दीए कौन कौन से हैं यह सरकार को सरकारी चश्मा हटाकर देखना होगा, समझना होगा। ध्ांधे के लिए पत्रकारिता एवं विचार के लिए पत्रकारिता इसमें सरकार को भेद करना होगा।

वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य

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आज वेब-संस्करण चलाने बाली समाचार-पत्र और पत्रिकाओं की संख्या कम है. भविष्य में हर पत्र-पत्रिका ऑन-लाईन होगी. साथ ही साथ स्वतंत्र न्यूज पोर्टल की संख्या में भी वृद्धि होगी. पत्रिका ‘न्यूज वीक’ ने अपने प्रिंट संस्करण को बंद कर ऑनलाईन संस्करण जारी रखने का फैसला किया है. ‘जनसत्ता’के बारे में यह आसार लगाया जा रहा है कि समाचार-पत्र घाटे से बचने के लिए प्रिंट संस्करण बंद कर ऑन-लाईन से अपनी सेवा जारी रखेगा. बात स्पष्ट है कि जिस पत्र का लक्षित समूह उच्च वर्ग है और जिनके पास इंटरनेट आसानी से उपलब्ध है, वह धीरे-धीरे प्रिंट संस्करण बंद कर पूर्ण रूप से ऑन-लाईन हो जायेगा.

इतिहास से खिलवाड़ का किसी को हक नहीं

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महारानी पद्मावती पर केन्द्रित दो प्रख्यात महाकाव्य ‘पद्मावत’ और ‘जौहर’ हिन्दी-साहित्य में उपलब्ध हैं। सूफी संत परम्परा के कवि जायसी ने 947 हिजरी अर्थात सन् 1540 ईसवी के लगभग ‘पद्मावत’ महाकाव्य की रचना पूर्ण की। इसमें चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण और पद्मावती के जौहर का सविस्तार वर्णन है किन्तु कहीं भी पद्मावती की प्रस्तुति खिलजी की प्रेमिका के रुप में नहीं है।

सामाजिक सरोकार और स्टारडम

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कई राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी को भी अपनी माँ सोनिया गांधी से उनकी संपत्ति में पचास प्रतिशत हिस्सा मांग लेना चाहिए क्योंकि जिस तरीके से पूरी कांग्रेस और श्री राहुल गांधी परफॉर्म कर रहे है उससे बहुत संभव है की श्रीमती सोनिया गांधी की आधी से ज़्यादा संपत्ति राहुल जी को लॉन्च करने में व्यय हो जाये।

दोषी कौन: ठग या लालची लोग?

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नोएडा का अनुभव मित्तल उस्तादों का उस्ताद निकला। इस 26 वर्षीय नौजवान ने अपनी एक कंपनी के जरिए लगभग 7 लाख लोगों को ठगा और उनसे 37 अरब रु. डकार गया। इस वक्त वह और उसके दो साथी जेल की हवा खा रहे हैं। मित्तल के पहले भी देश की कुछ नामी-गिरामी कंपनियों के मालिक… Read more »

आखिरकार ये  विज्ञापन जनता को क्या देते हैं?

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-अनिल अनूप दूरदर्शन पर कीटनाशक, चूहानाशक, भोजन-वस्त्र-आवास के घटक, प्रसाधन सामग्री, स्वाथ्यवर्द्धक, आदि-आदि चीजों से लेकर निरोध, गर्भनिरोधक, उत्तेजनावर्द्धक रसायन तक के विज्ञापन आखिरकार जनता को क्या देते हैं? परिवार नियोजन, साक्षरता अभियान, आयकर, गर्भपात, घूस, अनाचार, यातायात नियम, पर्यावरण सुरक्षा, नेत्रदान आदि की उपयोगी सूचनाएँ विज्ञापन के माध्यम से दी जाती हैं, जनता क्रमश:… Read more »

खतरा तो है पत्रकारिता के भविष्य पर…

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अजय जैन ‘विकल्प’ अखबारों और पत्रकारों कॊ अब नए प्रकार के खतरे का सामना करना पड़ सकता है,जिसका संकेत रोबोट पत्रकार ने दे दिया है।यकीनन आश्चर्यजनक बात और ख़बर है कि,रोबोट ने पत्रकार की तरह भीड़ की ख़बर मात्र 1सेकंड में लिख दी है। ये खतरनाक कारनामा पहली बार अखबार में छपा रोबोट पत्रकार का… Read more »