रासलीलाओं के रसिया अब बीजेपी की चौखट पर !

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वे लोग धन्य हैं जो कहते हैं कि नारायण दत्त का राजनीति में बहुत सम्मान है। कांग्रेस में तो खैर तिवारी की कोई कदर बची नहीं है। लेकिन वैसे भी अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में न तो नारायण दत्त तिवारी की और न ही उनके नाम की कोई ऐसी हैसियत बची है कि उसके दम पर राजनीति की जा सके। सो, बीजेपी और उसके अध्यक्ष अमित शाह ने ठीक ही किया कि नारायण दत्त तिवारी को बीजेपी लेने का उपकार नहीं किया।

चुनाव आचार संहिता कोरा दिखावा न बने

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 ललित गर्ग – चुनाव आयोग द्वारा पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता के उल्लंघन के मामले भी तेजी से सामने आने लगे हैं। यहां तक कि अनेक वरिष्ठ नेताओं और राज्यों के मंत्रियों तक पर इसके उल्लंघन के आरोप लगे हैं। जो… Read more »

 क्षेत्रीयता की जकड़न को बेधने का माकूल अवसर

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सियासी गलियारों में उटा-पटक का दौर शुभारंभ हो चुका है। राजनीतिक पार्टियों में जुबानी जंग के माध्यम से ही शह और मात का राजनीतिक माहौल बुलंद हो चुका है। अब ऊंट पहाड़ के नीचे की कहावत को राजनीतिक दलों के माननीय चरित्रार्थ कर रहे है, यानि जनता के गांव-गलियारों की याद और मूलभूत सुविधाओं से… Read more »

जीवन में कोशिश किए बिना सिर्फ डैंड्रफ ही मिल सकता है:सिद्धू

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पंजाब प्रदेश कांग्रेस के करीबी सूत्र ने बताया कि,’पार्टी फेसबुक, ट्विटर और वॉट्स ऐप के जरिए पंजाबियत के साथ-साथ ‘इनसाइडर बनाम आउटसाइडर सीएम’ के बहस को भी जोर शोर से प्रचारित करेगी. हम सभी जन सभाओं और रैलियों में लोगों से इस बात के लिए रायशुमारी कराने जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री पंजाबी होना चाहिए या फिर बाहरी?

दागी नेताओं की स्वच्छ राजनीति

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एक नजरिया यह भी: राजनीति ( पॉलिटिक्स ) यूनानी भाषा के ‘पोलिस’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है – समुदाय, जनता या समाज .आमतौर पर हम लोग जनता की नुमाइंदगी करके सत्ता तक पहुँचने, बड़ा ओहदा हथियाने , जनता और सरकार का बिचौलिया बनकर अपने छल बल से जनता का पैसा अपने खाते में… Read more »

बिहार से यूपी तक पिछलग्गू बनती कांगे्रस

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दरअसल, 2009 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है। कांग्रेस के हाथ से राज्यों की सत्ता छिटक रही है। लिहाजा यूपी में सत्ता में होना कांग्रेस की राजनीतिक मजबूरी माना जा रहा है। कांग्रेस सत्ता में तो आना चाहती है। इसके अलावा एक मकसद बीजेपी को यूपी की सत्ता से दूर रखना भी है। कांगे्रस की दुर्दशा के कारणों पर नजर डाली जाये तो जटिल जातीय समीकरण वाले इस सूबे में कांग्रेस के पास अपना परंपरागत वोट बैंक नही बचा है। ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम अब कांग्रेस के वोटर नहीं रह गये हैं।

तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

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बहरहाल, हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है? जो लोग गांधीजी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर संदेह कर रहे हैं, उन्हें ध्यान करना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे अधिक प्रचारित ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को महात्मा गांधी को ही समर्पित किया है। इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए गांधीजी के चित्र और उसके प्रतीकों का ही उपयोग किया जाता है।

अखिलेश 19 को आगरा से फूकंेगे चुनावी बिगुल

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आगरा सहित पश्चिमी यूपी मेें कल से नामांकन प्रक्रिया संजय सक्सेना उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहले चरण में 15 जिलों की 73 सीटों के लिए कल (17जनवरी) से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इसके लिये चुनाव आयोग ने इन जिलों में नामांकन की तैयारियां पूरी कर ली है। पहले चरण में पश्चिमी यूपी में चुनाव… Read more »

सबको सम्मति दे भगवान

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यह सही है कि लफ्जों में इतनी ताकत होती है कि किसी पुरानी डायरी के पन्नों पर कुछ समय पहले चली हुई कलम आज कोई तूफान लाने की क्षमता रखती है लेकिन किसी डायरी के खाली पन्ने भी आँधियाँ ला सकते हैं ऐसा शायद पहली बार हो रहा है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के 2017… Read more »

दलितों में आज भी है मायावती की लोकप्रियता

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(मायावती के 61वें जन्मदिवस 15 जनवरी 2017 पर विशेष) उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में एक दलित परिवार में हुआ था। मायावती के पिता का नाम प्रभुदयाल और माता का नाम रामरती था। मायावती के छः भाई और दो बहनें हैं। इनका पैतृक गाँव बादलपुर है जो… Read more »