खाद्य सुरक्षा कानून देशभर में लागू

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अनाज वितरण की विसंगतियों के चलते राज्य सरकारें आबंटित कोटा वक्त पर नहीं उठातीं हैं। क्योंकि पीडीएस के अनाज का ढुलाई खर्च उन्हें उठाना होता है। दरअसल अब सरकारों को भण्डारण के इंतजाम पंचायत स्तर पर करने की जरूरत है। यदि ऐसा होता है तो अनाज का दोतरफा ढुलाई खर्च तो बचेगा ही, इस प्रक्रिया में अनाज का जो छीजन होता है उससे भी निजात मिलेगी।

देशी गाय बनाम विदेशी गाय

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देशी गाय

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने १९९३ ई. में डायबिटीज (टाइप-१), ऑटो इम्यून रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कई बीमारियों की जड़ यूरोपियन गायों का दूध होने का दावा (हाइपोथिसिस)पेश किया है!इस दूध को वे A1 दूध कहते हैं!यूरोपियन गोवंशमें से होल्सटीन, फ्रिजियन, जर्सी, स्विसब्राउन के दूध में BCM 7 जहर होने का मुद्दा उठने के बाद… Read more »

फाइलों के खोह में अटकी दलहन क्रांति

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पीली क्रांति पर ग्रहण संदर्भ : दलहन और तिहलन का घटता उत्पादन बढ़ता आयात खास बात : देश में हर साल 30 हजार करोड़ के खाद्य तेल का आयात किया जा रहा है। 90 के दशक में तिलहन के मामले में देश आत्म निर्भरता के करीब था। देश में घरेलू जरूरत का 97 प्रतिशत तक… Read more »

भारत के मार्टिन लूथर हैं फ्रांसिस

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   डॉ. वेदप्रताप वैदिक भारत का सांस्कृतिक पुर्नजागरण अधूरा ही रह गया। स्वाधीनता आने पर राजनीतिक जागृति तो फैल गई लेकिन भारतीय समाज के कई महत्वपूर्ण हिस्से सोते ही रह गए। हिंदुओं को जगाने का काम महर्षि दयानंद, राजाराम मोहन राय, वीर सावरकर, भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फूले और राम मनोहर लोहिया जैसे महापुरुषों ने किया जरुर… Read more »

खतरनाक है बोतलबंद पानी पर बढ़ती निर्भरता

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प्रमोद भार्गव अब तक बोतलबंद पानी को पेयजल स्त्रोतों से सीधे पीने की तुलना में सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षात्मक विकल्प माना जाता रहा था, किंतु नए अध्ययनों से पता चला है कि राजधानी दिल्ली में विभिन्न ब्राण्डों का जो बोतलबंद पानी बेचा जा रहा है, वह शरीर के लिए हानिकारक है। इसकी गुणवत्ता इसे… Read more »

जीन संवर्धित फसलों की प्रासंगिकता

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भारत में जीन संवर्धित (जीएम) फसलों पर किये जाने वाले प्रयोग को लेकर शुरु से ही विवाद रहा है। कुछ लोग इस तरह के प्रयोग के पक्ष में हैं, तो वहीं कुछ विरोध में। इस बाबत फसलों पर केनिद्रत भारतीय जैव प्रौधोगिकी नियामक प्राधिकरण विधेयक (बीआरएआर्इ), 2009 को लेकर पहले भी काफी हो-हल्ला मच चुका… Read more »

सफेद दूध का काला कारोबार

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डॉ. आशीष वशिष्ठ दूध देशभर के आशीर्वाद में पिरोया हुआ शब्द है। रिश्ते में बड़ा आज भी छोटे को आशीष देते समय दूध और पुत्र का आशीर्वाद देता है लेकिन अब दूध में ऐसा जहर घोला जा रहा है कि आशीर्वाद देने वाला भी अपने आपको गलत महसूस करने लगा है। केन्द्र तथा राज्य सरकारें… Read more »

अनाज की बर्बादी और जिम्मेदार नौकरशाह

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प्रमोद भार्गव गेहूं की बर्बादी पर इलाहबाद उच्च न्यायालय की नजीर- इससे बड़ी विडंबना और कोर्इ नहीं हो सकती कि कृषि प्रधान देश में अनुमानित लक्ष्य से ज्यादा अन्न उत्पादन न केवल समस्या बन जाए, बलिक उसके खुले में पड़े रहने के कारण सड़ने की नौबत आ जाए। ऐसे ही हालात से रुबरु होकर ‘वी… Read more »

प्रौद्योगिकी सफल होने पर ओझल हो जाती है

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गंगानन्द झा एक घिसीपिटी बात ही दुहराई जाएगी अगर हम कहें कि आज के काल-खण्ड की तस्वीर की रूपरेखा प्रौद्योगिकी के बगैर नहीं बनाई जा सकती। इस आलेख के जरिए हम प्रोद्योगिकी के विकास के एक पहलू की चर्चा करेंगे। प्रौद्योगिकियाँ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में काफी जटिल रहा करती हैं, लेकिन अन्ततोगत्वा सभी कामयाब प्रौद्योगिकी… Read more »