• मुख पृष्ठ
  • राजनीति
    • चुनाव
      • लोकसभा चुनाव
      • विधानसभा चुनाव
      • घोषणा-पत्र
      • चुनाव विश्‍लेषण
      • आंकडे
  • आर्थिकी
  • विश्ववार्ता
  • मीडिया
  • मनोरंजन
    • खेल जगत
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • सिनेमा
    • संगीत
    • चुटकुले
    • कार्टून
  • धर्म-अध्यात्म
  • कला-संस्कृति
  • साहित्‍य
    • लेख
    • कहानी
    • कविता
    • गजल
    • आलोचना
    • व्यंग्य
    • पुस्तक समीक्षा
  • समाज
  • साक्षात्‍कार
  • विविधा
  • अन्य
    • वीडियो
    • महिला-जगत
    • बच्चों का पन्ना
    • विधि-कानून
    • हिंद स्‍वराज
    • सार्थक पहल
    • खेत-खलिहान
    • जन-जागरण
    • विज्ञान
    • स्‍वास्‍थ्‍य-योग
    • सैर-सपाटा
    • खान-पान
  • संपर्क

Archive for the Category ‘समाज’


  • Page 15 of 16
  • <
  • 1
  • ...
  • 7
  • 8
  • 9
  • 10
  • 11
  • 12
  • 13
  • 14
  • 15
  • 16
  • >

ढलान से उतरते हुए

ढलान से उतरते हुए मौसम के लिहाज से यह समय श्रीनगर जाने और ठाठ से बीसेक दिन रहने का है। पर भारी मन से ही सही, मुझे वहां से लौटे कुछ दिन बीत गए। दौरा चुनावी था और उसके अपने कायदे थे। खैर! कश्मीर वादी से लौटने के बाद अब कुछ रीता सा अनुभव ...

June 1st, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 65 views | No Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: social

भारत में स्थित “देवबंद” से मिलता है तालिबान को मानसिक खुराक

भारत में स्थित इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आए 'पाकिस्तान' के हालत को देख कर भष्मासुर की कहानी याद आती है । वो कहानी आप सबने सुनी होगी । 'एक बार भगवान शंकर ने भष्मासुर को वरदान दे डाला कि जिसके सर पर हाथ रखेगा वह भष्म हो जाएगा । बस फ़िर ...

May 25th, 2009 | लेखक : जयराम 'विप्लव' | 457 views | 8 Comments »
Posted in Category: विश्ववार्ता, समाज | Tags: Devband, देवबंद

गालियां या फैशन – हिमांशु डबराल

गालियां या फैशन - हिमांशु डबराल एक समय था जब भारतीय समाज को उसकी सभ्यता और मधुभाषिता के लिए जाना जाता था। समाज में कोई किसी के लिए अपशब्दों का प्रयोग नहीं करता था और अगर कोई बोल भी दे तो उसे समाज में बुरा माना जाता था। धीरे-धीरे समय बदला लेकिन गालियों को सामाजिक रूप ...

May 5th, 2009 | लेखक : हिमांशु डबराल | 258 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज | Tags: Abuse, गालियां

जनता जमीं पर, नेता आसमां पर – हिमांशु डबराल

जनता जमीं पर, नेता आसमां पर - हिमांशु डबराल जी हां जमीं से आसमां के सफर की ही बात हो रही है। लेकिन आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा की किसका सफर? मैं नेताओं के सफर की बात कर रहा हूं... एक समय था जब नेता जनता से मिलने के लिये पैदल यात्रा पर निकलते थे, उनकी बातें ...

April 27th, 2009 | लेखक : हिमांशु डबराल | 219 views | 3 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: leaders in the sky, public at the land, जनता जमीं पर, नेता आसमां पर

साध्वी प्रज्ञा पर जेल में हमला

साध्वी प्रज्ञा पर जेल में हमला मालेगांव विस्फोट मामले की एक प्रमुख अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर भायखला जेल में एक कैदी ने हमला बोल दिया, जिससे उनके चेहरे और गले पर चोटें आ गई हैं। प्रज्ञा के वकील के मुताबिक उन्होंने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की अदालत में एक आवेदन देकर इस मामले ...

April 23rd, 2009 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 219 views | 4 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: sadhvi Pragya Thakur in Jail, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर

अ स्टुपिड कॉमन मैन और जूता – जयराम ‘विप्लव’

अ स्टुपिड कॉमन मैन और जूता - जयराम 'विप्लव' बिहार के बक्सर संसदीय क्षेत्र का एक गाँव जहाँ मनमोहन और सुशासन बाबु के दावों की कलई खुलती नज़र आती है । बिजली -पानी-सड़क -शिक्षा-रोजगार जैसी आधारभूत जरूरते अधूरी है । बार-बार वादे !  हर बार नए -नए नारे ! आख़िर वादाखिलाफी से तंग आकर उनका गुस्स्सा फूट पड़ा । ...

April 13th, 2009 | लेखक : जयराम 'विप्लव' | 164 views | 3 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: shoes common man, अ स्टुपिड कॉमन मैन और जूता

स्वदेशी से स्वावलंबन तक – सुरभि दूबे

स्वदेशी से स्वावलंबन तक - सुरभि दूबे योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज का देश को स्वावलम्बन तक ले जाने का जो प्रयास है वह सचमुच सराहनीय है. आज जब पूरा देश विनाश की राह पर चल पडा है तब स्वामी जी ने जो कदम हमारे देश की स्वाधीनता को ध्यान में रखकर बढाया है वह जरुर ही ...

April 7th, 2009 | लेखक : सुरभी | 200 views | No Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: self employment from home made things, स्वामी रामदेव

मैं न रहूँगी दिल्ली में…

मैं न रहूँगी दिल्ली में... “ मैं यहाँ सब कुछ छोड़ कर आई थी गाँव से। गाँव में मेरे घर की बड़ी सी ज़मीन थी जिन्हें इनके (शौहर की ओर इशारा करते हुए) ताया-आया ने घेर लिया। अब यहाँ से भी भगाया जा रहा है हमें। हम तो यहाँ से भी गए और वहाँ से ...

March 29th, 2009 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 207 views | 2 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: i will not live in Delhi, दिल्ली

मुगलकालीन बाजार पर दीक्षितकालीन छौंक–

मुगलकालीन बाजार पर दीक्षितकालीन छौंक-- यह है मुगलकालीन बाजार पर दीक्षितकालीन छौंक ! लालकिले से दो-तीन फर्लांग दूर एक मुगलकालीन इलाका है। नाम है- चांदनी चौक। पुरानी दिल्ली का यह तंग इलाका चंद पेचिदां गलियों से घिरा एक बड़ा बाजार है, जिससे हम हिन्दुस्तानियों के रिश्ते बड़े रूहानी हैं।   सन् 1646 में जब मुगल बादशाह ...

March 26th, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 227 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज | Tags: mughalkaalin market, मुगलकालीन बाजार पर दीक्षितकालीन छौंक

सेक्स चर्चा – जयराम ‘विप्लव’

सेक्स चर्चा - जयराम 'विप्लव' इतनी आपा-धापी और उथल-पुथल भरे राजनितिक व आर्थिक परिदृश्य में बांकी चिन्ताओ से परे 'सेक्स चर्चा' -स्त्री विमर्श की आड़ में खूब फल- फूल रहा है। क्या आउटलुक और क्या ब्लॉग! मोहल्ले की फैलाई इस बीमारी ने किस-किस को संक्रमित कर दिया कहना मुश्किल है! इसके बरक्स कई अन्य ब्लोगरों ...

March 13th, 2009 | लेखक : जयराम 'विप्लव' | 3,006 views | 8 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: SEX GOSSIP, सेक्स चर्चा

स्वरोजगारियों का गांव नगला धाकड़

स्वरोजगारियों का गांव नगला धाकड़ भरतपुर जिले की वैर तहसील की इटामड़ा ग्राम पंचायत के गांव नगला-धाकड़ में रहने वाले धाकड़ जाति के लोगों की आजीविका का मुख्य आधार खेती और पशुपालन रहा है। लेकिन छोटी जोतें और उस पर अनुपजाऊ भूमि स्थानीय ग्रामीणों के जीवन की एक फांस बन चुकी थी और हालात भरण-पोषण ...

March 6th, 2009 | लेखक : उमाशंकर मिश्र | 503 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज, सार्थक पहल | Tags: self employed in village Nagla Dhakar, self employed in village Nagla Dhakar, स्वरोजगार, स्वरोजगारियों का गांव नगला धाकड़

गांधी क्यों लौट-लौट आते हैं? – रविकान्त

गांधी क्यों लौट-लौट आते हैं? - रविकान्त आशिस नंदी ने अपने एक मशहूर लेख में बताया था कि गांधी को मारनेवाला सिर्फ़ वही नहीँ था जिसकी पिस्तौल से गोली चली थी, बल्कि इस साज़िश को हिन्दुस्तानियोँ के एक बड़े तबक़े का मौन-मुखर समर्थन हासिल था। सत्ता की राजनैतिक मुख्यधारा के लिए वे काँटा बन चुके थे, और ...

March 3rd, 2009 | लेखक : रविकान्त | 175 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज | Tags: mahatama Gandhi, गांधी

शिक्षा का गोरखधंधा – हिमांशु शेखर

शिक्षा का गोरखधंधा - हिमांशु शेखर देश में शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे गोरखधंधे को जानना और समझना हो तो इस दृष्टि से इंदौर के इंस्टीटयूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज यानी आईएमएस के एमबीए ई-कामर्स के किसी विद्यार्थी से बातचीत की जा सकती है। वैसे तो यह संस्थान देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता है और ...

February 23rd, 2009 | लेखक : हिमांशु शेखर | 222 views | 2 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: educational business, शिक्षा का गोरखधंधा

ये हंगामा है क्यों बरपा … – आशीष कुमार ‘अंशु’

ये हंगामा है क्यों बरपा ... - आशीष कुमार 'अंशु' आज से छह महीने पहले लोग जिस श्रीराम सेना को जानते भी नहीं थे, आज मीडिया की मेहरबानी से एक जाना पहचाना नाम बन गया है। जरा सोचिए श्रीराम सेना के दर्जन भर कार्यकर्ताओं ने अमनेसिया पब, मंगलौर (कर्नाटक) पर हमला करके अखबरों में जितनी खबर पाई और इलैक्ट्रानिक चैनलों ...

February 21st, 2009 | लेखक : आशीष कुमार ‘अंशु’ | 266 views | 2 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: sri ram sena

वैलेंटाइन का जादू – ब्रजेश कुमार झा

वैलेंटाइन का जादू - ब्रजेश कुमार झा हिन्दी सिनेमा में मजाज़ी इश्क़ (सांसारिक प्रेम) पर लिखे गीतों के रुतबे को तो सभी महसूस करते ही होंगे ! इधर मैं कुछ दिनों से इश्क़-विश्क के उन गीतों को ढूंढ रहा था जो खासकर वैलेंटाइन डे पर लिखे गए हैं। अभी सफर जारी है। इस दौरान तत्काल जो गीत ...

February 15th, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 106 views | No Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: Valentine Day celebration, वैलेंटाइन का जादू

वैलन्टाइन डे के लिये चाहिये एक बड़ा दिल

वैलन्टाइन डे के लिये चाहिये एक बड़ा दिल मैं एक सम्भ्रान्त परिवार से सम्बन्ध रखता हूं। हम दकियानूसी नहीं है। उदारवादिता और आधुनिकता हमारी पहचान है।   हम वैलेन्टाइन डे को बुरा नहीं मानते । कुछ मूढ़ रूढ़िवादी व्यक्तियों व संगठनों की तरह। वस्तुत: मैं तो समझता हूं कि हम एक हज़ार वर्ष से अधिक समय तक ग़ुलाम रहे उसका ...

February 14th, 2009 | लेखक : अम्बा चरण वशिष्ठ | 718 views | 2 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: Valentine Day celebration in India, वैलन्टाइन डे

सुरा पर फिदा तहजीब – ब्रजेश झा

सुरा पर फिदा तहजीब - ब्रजेश झा पब संस्कृति को खत्म करने के नाम पर श्रीराम सेना के लोगों ने बड़ा उत्पात मचाया। इस दौरान युवतियों के साथ जो बेअदबी हुई, उससे भारतीय संस्कृति से जुड़े कई गहरे सवाल खड़े हुए हैं। इसपर बहस जारी है और यह जरूरी है। दरअसल, खान-पान निहायत व्यक्तिगत पसंद की चीज ...

February 4th, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 112 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज | Tags: alcohol and attiquets, सुरा पर फिदा तहजीब

वैयक्तिक अधिकार व पब कल्चर के बीच पिसता समाज व शालीनता

वैयक्तिक अधिकार व पब कल्चर के बीच पिसता समाज व शालीनता भारतीय संस्कृति के समुद्र में अनेक संस्कृतियां समाहित हैं। भारत की धरती पर अब एक नई संस्कृति उभर रही है पब कलचर। इस नई संस्कृति के उदगम में समाज नहीं वाणिज्य और बाज़ारभाव का योगदान अमूल्य है। पर मंगलौर में एक पब में जिस प्रकार से महिलाओं और लड़कियों पर ...

February 3rd, 2009 | लेखक : अम्बा चरण वशिष्ठ | 178 views | 3 Comments »
Posted in Category: समाज | Tags: pub culture, पब कल्चर, वैयक्तिक अधिकार, शालीनता, समाज

गंगाजल आपरेशन का सच – ब्रजेश झा

गंगाजल आपरेशन का सच - ब्रजेश झा डिब्रूगढ़ (असम) से हाल ही में दिल्ली आए एक व्यक्ति से मुलाकात हुई। वे हिन्दी सिनेमा बड़े चाव से देखते हैं। उन्होंने कहा, डिब्रूगढ़ आते-जाते जब भी ट्रेन भागलपुर स्टेशन पहुंचती है तो फिल्म- 'गंगाजल-द हौली वैपन ' की खूब याद आती है। यह फिल्म शहर में हुई अंखफोड़वा कांड ...

February 1st, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 157 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज | Tags: truth behind gangajal operation, गंगाजल आपरेशन का सच

आटो के पीछे क्या है?

आटो के पीछे क्या है? सुबह-सबेरे दिल्ली की सड़कों पर चलते वक्त यदि आटो रिक्शा के पीछे लिखा दिख जाय बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला तो अन्यथा न लें बल्कि गौर करें। क्या ये चुटकीली पंक्तियां शहरी समाज के एक तबके को मुंह नहीं चिढ़ा रही हैं? गौरतलब है कि ऐसी सैकड़ों पंक्तियां तमाम ...

February 1st, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 152 views | 1 Comment »
Posted in Category: समाज | Tags: backside of auto rickshaw, आटो के पीछे क्या है

  • Page 15 of 16
  • <
  • 1
  • ...
  • 7
  • 8
  • 9
  • 10
  • 11
  • 12
  • 13
  • 14
  • 15
  • 16
  • >


  • हिंदी में टाइप करें

    यहाँ क्लिक करें

  • हिंदी फॉण्ट कन्वर्टर

    हिंदी फॉण्ट से यूनिकोड

  • सबस्क्राइब

    प्रवक्‍ता डॉट कॉम के लेखों को अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें:

  • आपका मत

    उड़ीसा में अपहृत विधायक मामले में सरकार ने माओवादियों के सामने घुटने टेक दिए ?

    View Results

    Loading ... Loading ...
    • Polls Archive
  • परिचर्चा

    स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र का प्राण होती है। यहां आप समसामयिक प्रश्‍नों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।
  • विषय सूची

  • लेखक के अनुसार पढ़ें

  • अब तक

  • आपने कहा…

    • tejwani girdhar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
    • dr. madhusudan on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
    • dr. rajesh kapoor on भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?
    • Danish umar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
    • Net Ram Maharania on बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ
    • manoj sharma on क्यों बनते हैं किन्नर – राजकुमार सोनी
    • LAL CHAND on आर.एस.एस. और पी. चिदंबरम
    • harpal singh on ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’
    • Himkar Shyam on 60 साल की संसद, सड़ता अनाज और भूखे लोग
    • harpal singh on समलैंगिक स्वीकृति के मायने
    • AKASH MISHRA on 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
    • MANJU MADHUR JOHRI on 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
    • ePandit on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
    • Prof. Mukund Hambarde on राहुल गांधी के इस बयान में कुछ भी गलत नहीं है : डॉ. मीणा
    • Prof. Mukund Hambarde on हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा
    • girish pankaj on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
    • R.Singh on 60 साल की संसद, सड़ता अनाज और भूखे लोग
    • वीरेन्द्र जैन on आर.एस.एस. और पी. चिदंबरम
    • dr. rajesh kapoor on नीबू से कैंसर का इलाज संभव / डॉ. राजेश कपूर
    • tejwani girdhar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
    • iqbal hindustani on तय सीमा में करें काम-काज
  • Alexa Rank

  • FOLLOW US ON

  • ‘प्रवक्‍ता’ एक नजर में

    6,000 से अधिक लेख / 500 से अधिक लेखक / 68,534 एलेक्‍सा रैंकिंग / 51,281 पेजव्‍यू प्रतिदिन (जनवरी 2012)
  • प्रवक्ता पर लेख भेजे

    प्रवक्ता पर लेख भेजने के लिए यहां क्लिक करें या फिर सीधे prawakta@gmail.com पर हमें लिख भेजें।
  • नवीनतम लेख

    • ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार
    • कब जगमग होगा गांव
    • तुष्टिकरण का सबब है हज यात्रा में छूट
    • 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
    • भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?
    • क्या २जी घोटाले का सच सामने आएगा?
    • नक्सल समस्याः जड़ में हल तलाश कीजिए
    • खदानों में लगी आग से जल रहा झारखंड
    • बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ
    • गजल-भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां-इकबाल हिंदुस्तानी
  • परिचर्चा

    • तीन साल का हो गया ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’
    • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ बना वैकल्पिक वेबसाइटों का सिरमौर
    • परिचर्चा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम
    • यूपीए-2 के दो वर्ष: आम आदमी की कीमत पर असफलताओं का जश्‍न
    • परिचर्चा: काला धन
    • परिचर्चा : क्या डॉ. विनायक सेन देशद्रोही हैं?
    • परिचर्चा : यूपीए सरकार और भ्रष्‍टाचार
    • बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम पर परिचर्चा
    • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष
    • राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और सिमी में कोई फर्क नहीं : राहुल गांधी
    • परिचर्चा : अयोध्‍या मामले पर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ का निर्णय
    • एलेक्‍सा एक लाख क्लब में ‘प्रवक्‍ता’ शामिल
    • परिचर्चा : राष्ट्रमंडल खेल और सेक्स
    • परिचर्चा : आम आदमी आज दाल-रोटी तक के लिए मोहताज
    • परिचर्चा : क्या जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए?
    • परिचर्चा: ‘नक्‍सलवाद’ के बारे में आपका क्‍या कहना है…
    • परिचर्चा : राज ठाकरे की राजनीति के बारे में आप क्‍या कहते हैं?
    • परिचर्चा : मार्क्‍सवाद और धर्म
    • परिचर्चा : हिंद स्वराज की प्रासंगिकता
  • जरूर पढ़ें

    • भारत को कैसे मिले अब तक के अपने राष्ट्रपति
    • हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा
    • समलैंगिक स्वीकृति के मायने
    • ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’
    • शब्द वृक्ष दो: डॉ.मधुसूदन
    • खिचड़ी भाषा अंग्रेज़ी – डॉ. मधुसूदन
    • एक बंगारू तो पकड़ा गया बाकी पर न्यायतन्त्र की आंखों पर पट्टी क्यों ?
    • बंगारू लक्ष्मण का अपराध क्या था?
    • बंगारू लक्ष्मण की सजा से उठे सवाल
    • रघुनाथ सिंह की दो कविताएं
    • ॥अमृत भाषा संस्कृत॥- डॉ. मधुसूदन उवाच
    • वे जो हर सांस में भारत को ही जीते हैं / नरेश भारतीय
    • सभी धर्मों में एक ही बात नहीं / शंकर शरण
    • कम्युनिस्टों का असली चेहरा / विपिन किशोर सिन्हा
    • ईसाई धर्म और नारी मुक्ति / प्रो. कुसुमलता केडिया
    • भारतीय वामपंथ के पुनर्गठन की एक प्रस्तावना / अरुण माहेश्‍वरी
    • आदिवासी कुंभ से क्या हासिल होगा आरएसएस को / संजय द्विवेदी
    • पश्चिमी रंग में रंगा भारत: नकलची भूरा बंदर / विश्व मोहन तिवारी
    • IIT रुड़की : ये कैसी इंजीनियरिंग है? / सुरेश चिपलूनकर
    • दबाव की राजनीति में इतिहास और तथ्य की विदाई / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

  • मुख पृष्ठ
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
  • प्रवक्‍ता मण्डली
  • लेख भेजें
  • संपादक
  • ई-मेल
  • चर्चा में प्रवक्‍ता
  • प्रवक्ता पर विज्ञापन
  • Log In
  • पोल Archive
  • Pravakta Ads
    • Chhatisgarh-Ads
    • प्रवक्‍ता के सम्‍मानित पाठक
  • User Online
  • Hindi Font Converter
  • आर्थिकी
  • कला-संस्कृति
  • चुनाव
    • घोषणा-पत्र
    • जन-जागरण
    • लोकसभा चुनाव
      • आंकडे
      • चुनाव विश्‍लेषण
    • विधानसभा चुनाव
  • जरूर पढ़ें
  • ज्योतिष
    • राशिफल
    • वर्त-त्यौहार
  • टॉप स्टोरी
  • धर्म-अध्यात्म
    • चिंतन
  • पत्रिका पर नजर
  • परिचर्चा
  • पर्व – त्यौहार
  • प्रवक्ता न्यूज़
  • मनोरंजन
    • कार्टून
    • खेल जगत
    • चुटकुले
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • संगीत
    • सिनेमा
  • महत्वपूर्ण लेख
  • मीडिया
  • राजनीति
  • विधि-कानून
  • विविधा
    • उत्‍पाद समीक्षा
    • खान-पान
    • खेत-खलिहान
    • टेक्नोलॉजी
    • पर्यावरण
    • बच्चों का पन्ना
    • महिला-जगत
    • विज्ञान
    • शख्सियत
    • साक्षात्‍कार
    • सार्थक पहल
    • सैर-सपाटा
    • हिंद स्‍वराज
  • विश्ववार्ता
  • वीडियो
  • समाज
  • साहित्‍य
    • आलोचना
    • कविता
    • कहानी
    • गजल
    • पुस्तक समीक्षा
    • लेख
    • व्यंग्य
  • स्‍वास्‍थ्‍य-योग

Copyright © 2010 PRAVAKTA.COM
Designed & Developed by Manu Info Solutions (MiS)