राजेश कश्यप
हाल ही में प्रधानमंत्री ने भूख और कुपोषण सर्वेक्षण रिपोर्ट (हंगामा-2011) जारी करते हुए, स्पष्टतः स्वीकार किया कि देश में भूखमरी और कुपोषण की स्थिति राष्ट्रीय शर्म का विषय है। निःसन्देह यह रिपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और विश्व की दूसरी सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश को ...
जीनत जिशान फाजि़ल
हाल ही में सर्वोच्च न्यायलय ने अपने एक अहम फैसले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां सभी थानों में बाल कल्याण अधिकारी (सीडब्ल्यूओ) की तैनाती करे जो थानों में किशोरों के साथ होने वाले पुलिस बर्ताव पर निगरानी करेंगे। ...
14 नवम्बर / बाल दिवस पर विशेष
राजेश कश्यप
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता सर्वप्रथम वर्ष 1934 में महसूस की गई और जेनेवा घोषणा के तहत बाल अधिकार सुनिश्चित किए गए। इसके उपरांत बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके हितों के रक्षार्थ संयुक्त महासभा द्वारा 20 नवम्बर, ...
राजेश कश्यप
दीपावली पर्व पर प्रत्येक बच्चे की इच्छा होती है कि वो आतिशबाजी करे। वैसे आतिशबाजी करने में बड़ा आनंद आता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि आखिर इस आतिशबाजी को बनाया कैसे जाता है? अगर नहीं तो हम आपको इसी आतिशबाजी के अवसर (दीपावली) पर बताने जा रहे ...
दूर कहीं एक गाँव में
रहती थी ‘ मुस्कान ‘ ,
माँ की थी वो राजदुलारी ,
और पिता की थी वो जान !
चिडियां-सी चहकती ,
फूलों-सी महकती ,
चेहरे पे उसके
सदा रहती थी मुस्कान !
दादी से अपनी वो
सुनती थी परियों की कहानियां !
नेकी और ...
रामकुमार 'विद्यार्थी॔'
म.प्र. के दमोहसागर रेल लाइन पर मालगाड़ी के चपेट में आने के कारण 3 बच्चों की वीभत्स मौत हो गई। घटना अनुसार दमोह से सागर की तरफ जा रही रेल जैसे ही मलैया मिल के समीप पहुची तभी कचरा बीन रहे उम्र 14 वर्ष, अमीर 13 वर्ष एवं शाहिद ...
लिमटी खरे
सरकार चाहे केंद्र की हो राज्य की, सियासी दल चाहे जो भी हो, जनसेवक किसी भी मानसिकता का हो, हर कोई अपने आप को देश और समाज के उत्थान के प्रति अपने आप को पूरी तरह से समर्पित बताने से नहीं चूकता है। अपनी घोषित प्राथमिकताओं के प्रति ये ...
खतरों से खेलते बचपन पर सर्वोच्च न्यायालय की अंकुश लगाने की पहल एक अच्छी शुरूआत है। क्योंकि करतब दिखाने वाले नाबालिग बच्चों को प्रदर्शन के दौरान जिस अनुशासित संतुलन बनाए रखने के मानसिक तनाव से गुजरना होता है, निशिचत रूप से वह पीड़ादायी होता है। इसलिए इन बच्चों को संजीदगाी ...
प्रमोद भार्गव
खतरों से खेलते बचपन पर सर्वोच्च न्यायालय की अंकुश लगाने की पहल एक अच्छी शुरूआत है। क्योंकि करतब दिखाने वाले नाबालिग बच्चों को प्रदर्शन के दौरान जिस अनुशासित संतुलन बनाए रखने के मानसिक तनाव से गुजरना होता है, निशिचत रूप से वह पीड़ादायी होता है। इसलिए इन बच्चों को ...
॔॔तख्ती पे तख्ती, तख्ती पे दाना कल की छुटटी परसो को आना’’ पकर आज न जाने कितने लोग अपने बचपन में खो गये होगे। अब से लगभग तीन दशक पहले ज्यादातर बच्चे प्रारम्भिक शिक्षा सरकारी बेसिक प्राईमरी स्कूल में ही ग्रहण करते थे। मैने भी प्राईमरी शिक्षा सरकारी बेसिक प्राईमरी ...
एक राजा का लड़का था जो इतने के बावजूद राजपूत नहीं था। चूँकि उसका पिता जन्म से क्षत्रप न होकर निशाद था अतः वह राजपूत होने की न्यूनतम अर्हता पूरी करके भी वांछनीयताओं में पिछड़ जाता था। तत्कालीन पूर्ण पक्के राज पुत्रों के समान उसने भी िक्षित होने का ...
-पंकज
किसी भी देश का बच्चा उस देश की वास्तविक स्थिति पेश करता है। वह उसके सभ्यता संस्कृति से ही साक्षात्कार नहीं कराता है बल्कि उसके भविष्य का भी स्पष्ट संकेत देता है। इस स्थापना के आलोक में देखें तो हमारे नौनिहाल जिस हाल ...
अनिल अनूप
दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में बच्चे बाल-व्यापार के शिकार हैं यह सर्वविदित है. देश में बाल व्यापार कानून की जद में वेश्याव्रित्त और यौन शोषण ही है, यह सत्य है की भारत के मौजूदा कानून बाल व्यापार पर लगाम लगाने में समर्थ नहीं है शायद इसीलिये नए कानून ...
चानपा बड़ी देर से चट्टान की ओट में खड़ा बारिश रुकने का इंतजार कर रहा था। अभी एक घंटा पहले आसमान बिल्कुल साफ था। चानपा को उम्मीद थी कि वह अंधेरा होते-होते घर पहुंच जाएगा। पर बादल ऐसे घिरे कि दो कदम चलना मुश्किल हो गया। वह बार-बार आसमान की ...
अखिलेश आर्येन्दु
सात महीने पहले कोलकाता के मार्तिनेर स्कूल के एक छात्र रौवनजीत रावला की स्कूल के अध्यापकों द्वारा बेंतों से बेतहाशा पिटाई करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। तब पुलिस प्रशासन ने दोषी प्रिंसिपल और अध्यापकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। लेकिन सामाजिक संगठनों और राश्ट्रीय बाल ...
अखिलेश आर्येन्दु
ग्लोबल मूवमेंट फॉर चिल्ड्रन(जीएमसी) के जरिए जो सर्वेक्षण कराए गए हैं उससे भारत में नौनिहालों की खस्ता हालात का पता चलता है। इस सर्वेक्षण के मुताबिक देश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की हालात सबसे बद्त्तार है। बीमारियों, कुपोषण और दूसरे कारणों से देश में हर ...
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प्रवक्ता डॉट कॉम भारतीय परंपरा की जान 'शास्त्रार्थ' का आधुनिक स्वरूप है, जहां विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक ही मंच पर बेहतर लोकतांत्रिक समाज के लिए विचार-विमर्श करते हैं।