नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का अंतिम पाठ
पाठक: आपके विचारों से ऐसा लगता है कि आप एक तीसरा ही पक्ष कायम करना चाहते हैं। आप एक्स्ट्रीमिस्ट भी नहीं है और माडरेट भी नहीं है।
संपादक: यहां आपकी भूल होती है। मेरे मन में तीसरे पक्ष का ...
पाठक: आप पश्चिम की सभ्यता को निकाल बाहर करने की बात कहते हैं, तब तो आप यह भी कहेंगे कि हमें कोई भी मशीन नहीं चाहिये।
संपादक: मुझे जो चोट लगी थी उसे यह सवाल करके आपने ताजा कर दिया है। मि. रमेशचन्द्र दत की पुस्तक हिन्दुस्तान का आर्थिक इतिहास जब ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का चौदहवां पाठ
पाठक: आपने इतना सारा कहा परन्तु उसमें कहीं भी शिक्षा तालीम की जरूरत तो बताई ही नहीं। हम शिक्षा की कमी की हमेशा शिकायत करते रहते हैं। लाजिमी तालीम देने का आन्दोलन हम सारे देश में देखते हैं।
महाराजा ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का तेरहवां पाठ
पाठक: आप जिस सत्याग्रह या आत्मबल की बात करते हैं, उसका इतिहास में कोई प्रमाण है। आज तक दुनिया का एक भी राष्ट्र इस बल से ऊपर चढ़ा हो, ऐसा देखने में नहीं आता। मार काट के बिना ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का बारहवां पाठ
पाठक: डर से दिया हुआ जब तक डर रहे तभी तक टिक सकता है, यह तो आपने विचित्र बात कही। जो दिया सो दिया। उसमें फिर क्या हेरफेर हो सकता है?
संपादक: ऐसा नहीं है। 1857 की घोषणा बलवे ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का ग्यारहवां पाठ
पाठक: इटली ने किया वैसे। मैजिनी और गैरीबाल्डी ने जो किया, वह तो हम भी कर सकते हैं। वे महावीर थे, इस बात से क्या आप इनकार कर सकेंगे?
संपादक: आपने इटली का उदाहरण ठीक दिया। मैजिनी महात्मा था। ...
हम महात्मा गांधी को राष्ट्र पिता कहते हैं, किंतु उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर भाषणबाजी और कुछ समारोहों के आयोजन के अलावा इस बात की जरा भी परवाह नहीं करते कि उन्होंने अपने अद्भुत नेतृत्व के दौरान क्या किया और क्या संदेश दिया? हिंदुत्व पर उनके गहन विचारों के बारे ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का दसवां पाठ
पाठक: सभ्यता के बारे में आपके विचार मैं समझ गया। आपने जो कहा उस पर मुझे ध्यान देना होगा। तुरन्त सब कुछ मंजूर कर लिया जाय, ऐसा तो आप नहीं मानते होंगे, ऐसी आशा भी नहीं रखते होंगे। ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का नौवां पाठ
पाठक: आपने रेल को रद्द कर दिया? वकीलों की निन्दा की, डाक्टरों को दबा दिया! तमाम कल-काम को भी आप नुकसानदेह मानेंगे, ऐसा मैं देख सकता हूं। तब सभ्यता कहें, तो किसे कहें?
संपादक: इस सवाल का जबाव मुश्किल ...
गाँधी का जन्म हिंदू धर्म में हुआ, उनके पुरे जीवन में अधिकतर सिधान्तों की उत्पति हिंदुत्व से हुआ. साधारण हिंदू कि तरह वे सारे धर्मों को समान रूप से मानते थे, और सारे प्रयासों जो उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कोशिश किए जा रहे थे उसे अस्वीकार किया. वे ब्रह्मज्ञान ...
नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का आठवां पाठ
पाठक: वकीलों की बात तो हम समझ सकते हैं। उन्होंने जो अच्छा काम किया है वह जान-बूझकर नहीं किया, ऐसा यकीन होता है। बाकी उनके धंधे को देखा जाय तो वह कनिष्ठ ही है। लेकिन आप तो डाक्टरों ...
अगर एक व्यक्ति समाज सेवा में कार्यरत है तो उसे साधारण जीवन की ओर बढ़ना चाहिए ,ऐसा बापू का कहना था जिसे वे ब्रह्मचर्य के लिए आवश्यक मानते थे. उनकी सादगी ने पाश्चात्य जीवन शैली को त्यागने पर मजबूर किया और वे दक्षिण अफ्रीका में लोकप्रिय होने लगे थे .इसे ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का आठवां पाठ
पाठक: आप कहते हैं कि दो आदमी झगडे तब उसका न्याय भी नहीं कराना चाहिये। यह तो आपने अजीब बात कहीं।
संपादक: इसे अजीब कहिये या दूसरा कोई विशेषण लगाइये, पर बात सही है। आपकी शंका हमें वकील-डाक्टरों ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का सातवां पाठ
संपादक: आपका आखिरी सवाल बड़ा गम्भीर मालूम होता है। लेकिन सोचने पर वह सहज मालूम होगा। यह सवाल उठा है, उसका कारण भी रेल, वकील और डाक्टर हैं। वकीलों और डाक्टरों का विचार तो अभी करना बाकी ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का छठा पाठ
पाठक: हिन्दुस्तान की शान्ति के बारे में मेरा जो मोह था वह आपने ले लिया। अब तो याद नहीं आता कि आपने मेरे पास कुछ भी रहने दिया हो।
संपादक: अब तक तो मैंने आपको सिर्फ धर्म की ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का पांचवां पाठ
पाठक: हिन्दुस्तान अंग्रेजों के हाथ में क्यों है, यह समझा जा सकता है। अब मैं हिन्दुस्तान की हालत के बारे में आपके विचार जानना चाहता हूं।
संपादक: आज हिन्दुस्तान की रंक दशा है। यह आपसे कहते हुए मेरी ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का चतुर्थ पाठ
पाठक: आपने सभ्यता के बारे में बहुत कुछ कहा और मुझे विचार में डाल दिया। अब तो मैं इस संकट में आ पड़ा हूं कि यूरोप की प्रजा से मैं क्या लूं और क्या न लूं। लेकिन ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का तीसरा पाठ :
पाठक: तो आपने बंग-भंग को जागृति का कारण माना, उससे फैली हुई अशान्ति को ठीक समझा जाय या नहीं?
संपादक: इन्सान नींद में से उठता है तो अंगड़ाई लेता है। इधर उधर घूमता है और अशान्त रहता ...
नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण पुस्तक 'हिंद स्वराज' का दूसरा पाठ :
पाठक: आप कहते हैं उस तरह विचार करने पर यह ठीक लगता है कि कांग्रेस ने स्वराज्य की नींव डाली लेकिन यह तो आप मानेंगे कि वह सही जागृति नहीं थी। सही जागृति कब और ...
हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि 'हिंद स्वराज की प्रासंगिकता' को लेकर प्रवक्ता डॉट कॉम द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान को ऐसा अभूतपूर्व प्रतिसाद मिलेगा। हम अभिभूत हैं। सच में राम के बाद गांधी ही इस देश को जोडने वाली प्रमुख कडी बन गए हैं। जैसा कि ...